क्या आपके पेट के आसपास जमा चर्बी यानी belly fat सिर्फ मोटापे की वजह बनती है न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर सुधीर कुमार के द्वारा दी जाने वाली जानकारी के अनुसार ऐसा बिल्कुल नहीं है। उनके द्वारा दिए गई जानकारी में बताया गया है किBelly Fat खासकर पेट के अंदर जमा होने वाली विस्तारित फैट दिमाग की सेहत पर भी असर डाल सकती इसलिए अपनी कमर का घेरा नियंत्रण रखना शरीर के लिए ही नहीं बल्कि आपके दिमाग के लिए भी सुरक्षित होता है।
Belly Fat और Brain के बीच क्या होता है संबंध?
डॉ सुधीर कुमार के अनुसार पेट के अंदर जमा होने वाली विशाल फैट सम्मानित त्वचा के नीचे की चर्बी से थोड़ी अलग होती है या शरीर में लगातार सूजन की मात्रा बढ़ती रहती है और ऐसे में कई सारे केमिकल छोड़ती है जो हमारे दिमाग के कामकाज को भी प्रभावित कर सकते हैं। यही कारण है कि ज्यादा Belly Fat वाले लोगों को समय के साथ-साथ याददाश्त और सोचने समझने की क्षमताएं भी कमजोर होने लगतीहैं।
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कैसे बढ़ता है इससे दिमागी बीमारियों का जोखिम?
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक ज्यादा विजुअल फैट इन्सुलिन रेजिस्टेंस हाई ब्लड प्रेशर और मेटाबॉलिक दिक्कतों का कारण हो सकती है। यह सभी स्थितियां दिमाग तक पहुंचने वाले ब्लड के सरकुलेशन और न्यूरो की कार्य क्षमता पर असर करतीहै। लंबे समय तक अगर ऐसी स्थिति रही तो भविष्य में डिमेंशिया और कॉग्निटिव डिक्लिन का रिस्क हो जाता है हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि पेट की चर्बी होने से हर व्यक्ति को दिमाग की बीमारी हो लेकिन रिस्क होता है।
सिर्फ वजन नहीं, कमर का घेरा भी होता है जरूरी
आम तौर पर डॉक्टर के द्वारा केवल वजन देखकर ही हेल्थ का आकलन नहीं किया जा सकता है कहीं पर सामान्य वजन वाले लोगों में भी पेट के अंदर विसरल फैट ज्यादा देखा जाता है। इसलिए कमर का बढ़ता हुआ घेरा भी एक महत्वपूर्ण संकेत होता है कि आपको अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत है।
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आप Belly Fat कम करने के लिए क्या करें?
डॉक्टर के द्वारा सलाह दी जाती है कि रोज कमी से कम 30 से 45 मिनट तक तेज चल में आपको चलना चाहिए भोजन में फल हरी सब्जियां और पर्याप्त प्रोटीन की मात्रा शामिल करना चाहिए। मीठे या फिर बाहरी खाने से दूरी बनाए रखना चाहिए साथ ही साथ से 8 घंटे की अच्छी नींद लेनी चाहिए जिसके अलावा तनाव कम करने के लिएयोग या मेडिटेशन आदि जैसी चीज करनी चाहिए यह सभी आदतें शरीर के साथ-साथ आपके दिमाग के सेहत के लिए भी फायदेमंद होती है। डॉक्टर का स्पष्ट संदेश है कि स्वस्थ कमर का मतलब केवल स्पीड शेयर नहीं होता है बल्कि स्वस्थ दिमाग भी होता है।

