Budget 2026: क्या Old Tax Regime को खत्म किया जाएगा? क्या कहते हैं Expert

Income Tax New Rules

Budget 2026: बीते वर्ष यानी 2025 के बजट में वित्त मंत्री ने टैक्सपेयर्स के लिए एक बड़ी राहत दी, जिसमें न्यू टैक्स रिजीम के तहत सेक्शन 87A रिबेट बढ़ाकर इनकम टैक्स एग्जेंप्शन लिमिट बढ़ा दी गई थी. जी हां इसके बाद अब 12 लाख रुपए तक की इनकम (सैलरीभोगियों के लिए 12.75 लाख रुपए) पर कोई टैक्स नहीं लगेगा. इस बदलाव से न्यू टैक्स सिस्टम को अपनाने की प्रवृत्ति बढ़ने की उम्मीद है, खासकर उन सैलरीड एम्प्लॉइज के बीच जिनके पास टैक्स बचाने वाले ज्यादा निवेश नहीं हैं.

ओल्ड टैक्स रिजीम के फायदे

गौरतलब है कि, ओल्ड टैक्स रिजीम का महत्व अब भी बहुत सारे टैक्सपेयर्स के लिए बना हुआ है. जी हां आपको बताएं सेक्शन 80C, 80D, 24(b), 80CCD(1B) के तहत मिलने वाली छूट, हाउस रेंट अलाउंस ( HRA ) और अन्य भत्तों की छूट उन लोगों के लिए फायदेमंद हैं जिनके पास होम लोन, इंश्योरेंस कमिटमेंट और लंबी अवधि वाले रिटायरमेंट प्लान हैं.

पुरानी टैक्स रिजीम खत्म हुई तो क्या होगा

अब मान लीजिए अचानक पुराने ओल्ड टैक्स रिजीम को हटा दिया जाए, तो यह उनकी पहले से तय फाइनेंशियल स्ट्रैटेजीज पर दिक्कत पैदा कर सकती है. इसके चलते सवाल उठता है, कि क्या बजट 2026 में ओल्ड टैक्स रिजीम को खत्म करने की कोई टाइम लिमिट घोषित की जाएगी.

क्या है एक्सपर्ट की सलाह

चार्टर्ड अकाउंटेंट सुरेश सुराना की मानें तो, पॉलिसी परस्पेक्टिव से ओल्ड टैक्स रिजीम को खत्म करने की एक निश्चित तारीख की घोषणा करना प्रशासनिक रूप से सही लग सकता है. लेकिन इसके लिए टैक्सपेयर्स को पर्याप्त ट्रांजिशन सेफगार्ड देना जरूरी होगा, ताकि कोई अचानक परेशानी का सामना न करे.

Nangia & Co LLP के सचिन गर्ग का मानना है कि ओल्ड टैक्स रिजीम को तुरंत बंद करना जल्दबाजी होगी. यह अभी भी कई टैक्सपेयर्स के लिए उपयोगी है.

दो टैक्स रिजीम रखना सही है?

एक्सपर्ट्स की मानें तो दो टैक्स सिस्टम एक साथ होना टैक्सपेयर्स के लिए कठिनता बढ़ा देता है. हर साल उन्हें बार-बार टैक्स की कैल्कुलेशन और तुलना करनी पड़ती है ताकि यह तय किया जा सके कि उनके लिए कौन-सी रिजीम फायदेमंद है. भारत को संतुलित तरीका अपनाना चाहिए.

गौरतलब है कि, न्यू टैक्स रिजीम को धीरे-धीरे पेश किया जाना चाहिए. इसके साथ ही, टैक्सपेयर्स को प्रोत्साहित किया जाए कि वे अपनी बचत ऐसे निवेशों में लगाएं, जिन्हें न्यू टैक्स रिजीम में मान्यता प्राप्त हो. इस तरह धीरे-धीरे एकल और आसान टैक्स प्रणाली की ओर जाना फायदेमंद होगा.

सबसे बड़ी बात यह है कि द्वी टैक्स प्रणाली या दो टैक्स सिस्टम एक साथ होने से कंफ्यूजन के साथ गणना करने में भी समस्या आती है. इतना ही नहीं कुछ और भी इसके नुकसान हैं लेकिन इसमें बड़ी बात यह है की जब भी नई टैक्स रिजीम को पूरी तरह लाना हो तो धीरे धीरे सिस्टम में उतार कर लाया जा सकता हैं.

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