Bride sent off in a palanquin in Rewa: रीवा शहर में आधुनिकता के बीच प्राचीन सनातनी परंपरा ने एक बार फिर जीवंत रूप लिया। शनिवार सुबह इको पार्क में संपन्न हुए एक शादी समारोह के बाद दुल्हन को पारंपरिक पालकी में बिठाकर विदाई दी गई। परिजन बैंड-बाजे की मधुर धुन पर नाचते-गाते हुए दुल्हन को पालकी में लेकर इको पार्क से दीनदयाल धाम तक ले गए, आगे-आगे घोड़े पर सवार दूल्हा जा रहा था। यह मनोरम दृश्य शहर में चर्चा का विषय बन गया।
जानकारी के मुताबिक, दुल्हन बुरहानपुर की रहने वाली है और शादी के लिए पूरा परिवार रीवा आया था। वैवाहिक समारोह इको पार्क में आयोजित हुआ। शादी के बाद सनातन परंपरा के अनुसार दुल्हन की विदाई पालकी में की गई, जो भारत की प्राचीन रस्म है। हालांकि आजकल अधिकांश विदाइयाँ कार या अन्य वाहनों से होती हैं, लेकिन इस परिवार ने पूर्वजों की इस खूबसूरत परंपरा को पुनर्जीवित करने का सराहनीय प्रयास किया।
परिजन विजेंद्र ताम्रकार ने बताया कि, “हमारा उद्देश्य सनातनी परंपराओं को जीवित रखना और उन्हें अगली पीढ़ी तक पहुंचाना है। ” यह पहल रीवा में सांस्कृतिक जागरूकता और परंपराओं के प्रति गहरे लगाव का एक सुंदर उदाहरण बनकर सामने आई है, जिसकी हर कोई सराहना कर रहा है।
