Bollywood tragic actress Vimi : की मशहूर-दिलक़श अभिनेत्री, विमी का शोहरत से श्मशान तक का सफ़र

Bollywood tragic actress Vimi : की मशहूर-दिलक़श अभिनेत्री, विमी का शोहरत से श्मशान तक का सफ़र-बॉलीवुड की चमक-दमक के पीछे कई ऐसी कहानियां दबी हैं, जो न केवल चौंकाती हैं बल्कि भीतर तक झकझोर देती हैं। ऐसी ही एक कहानी है अभिनेत्री विमी की-एक ऐसी अभिनेत्री, जिसने सफलता का शिखर भी देखा और गुमनामी का अंधकार भी। 1968 में सुपरहिट फिल्म ‘हमराज़’ से रातों-रात स्टार बनी विमी का जीवन कुछ ही वर्षों में इस कदर बिखर गया कि 34 वर्ष की उम्र में वह निर्धन, बीमार और अकेली दुनिया से विदा हो गईं। उनकी अंतिम यात्रा तक के दृश्य बॉलीवुड के संवेदनहीन चेहरे को उजागर करते हैं। बॉलीवुड अभिनेत्री विमी की ज़िंदगी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं थी। “हमराज़” की अपार सफलता से लेकर गुमनामी, शोषण और 34 वर्ष की आयु में दर्दनाक मौत तक-जानिए विमी की अनकही त्रासद कहानी।

फिल्मी करियर की तेज़ शुरुआत

1943 में जन्मी विमी मूलत गायिका बनना चाहती थीं और उन्होंने इसके लिए प्रशिक्षण भी लिया था। हालांकि, अभिनय के प्रति उनके रुझान को परिवार का समर्थन नहीं मिला। परिवार से अलग होकर उन्होंने फिल्मी दुनिया में कदम रखा। 1968 की फिल्म “हमराज़” जिसके निर्देशक बीआर चोपड़ा और सह-कलाकार- राज कुमार व सुनील दत्त रहे। यह फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई और विमी को एक संभावित सुपरस्टार माना जाने लगा। वह पाली हिल के बंगले में रहती थीं और आलीशान जीवन जीती थीं, गोल्फ खेलती थीं और लग्ज़री कारें चलना उनके पसंदीदा शोकों में शुमार था।

निजी जीवन और करियर का पतन

फिल्मों में आने से पहले ही विमी की शादी कोलकाता के व्यवसायी शिव अग्रवाल से हो चुकी थी। शुरुआती सफलता के दौरान सब कुछ सामान्य दिखता रहा लेकिन जैसे-जैसे उनकी अगली फिल्में असफल होती गईं उसी के साथ उनके हालत भी बदलते हालात बदलते चले गए और सबसे बड़ी शिक़स्त उन्हें मिली की पति का साथ छूट गया क्योंकि उनके ससुराल पक्ष के परिवार ने उन्हें दोबारा स्वीकार नहीं किया। दूसरी हर की उन्हें इंडस्ट्री में काम मिलना बंद हो गया हालांकि बीआर चोपड़ा ने उन्हें हमेशा ही बतौर अभिनेत्री ही नहीं असल ज़िंदगी में “बुद्धिमान और समझदार” महिला बताया था लेकिन “हमराज़” के बाद उन्हें कोई बड़ा मौका नहीं मिला।

शराब, शोषण और अकेलापन

अपने बुरे दिनों में विमी काम की तलाश, बदनामी और आर्थिक तंगी ने उनको मानसिक रूप से तोड़ दिया तो ऐंसे उन्होंने शराब का सहारा लेना शुरू किया। तबस्सुम के अनुसार, एक फिल्म वितरक “जॉली” के साथ रहने के दौरान उन्हें यह कहकर शोषण के लिए मजबूर किया गया कि यही उनके करियर को दोबारा खड़ा करने का रास्ता है। यह दौर विमी के जीवन का सबसे अंधकारमय अध्याय साबित हुआ।

दर्दनाक अंत और अंतिम अपमान

1977 में, महज़ 34 वर्ष की उम्र में, नानावती अस्पताल में लीवर की बीमारी से विमी का निधन हो गया। उनकी अंतिम यात्रा के लिए कोई बड़ा नाम सामने नहीं आया। कहा जाता है कि उनका शव ठेले पर श्मशान घाट ले जाया गया। फिल्म जगत से केवल सुनील दत्त के मौजूद होने की बात कही जाती है। मृत्यु के बाद भी उनका अपमान नहीं रुका-एक कथित मित्र द्वारा लिखा गया आपत्तिजनक शोक संदेश उनकी पीड़ा को और गहरा कर गया।

अभिनेत्री विमी का फिल्मों में योगदान

अपने छोटे से करियर में विमी ने लगभग 10 फिल्मों में काम किया, जिनमें प्रमुख हैं- “हमराज़”,”आबरू” (अशोक कुमार के साथ),”नानक नाम जहाज है”,”गुड्डी” (छोटी भूमिका) और “क्रोधी” जो उनकी मृत्यु के बाद रिलीज़ हुई।

निष्कर्ष (Conclusion)-विमी की कहानी केवल एक अभिनेत्री के असफल करियर की कहानी नहीं है बल्कि यह बॉलीवुड की संवेदनहीनता, महिला शोषण और अकेलेपन की कड़वी सच्चाई को उजागर करती है। शोहरत के शिखर से गुमनामी की गहराइयों तक पहुंचना जितना आसान लगता है उतना ही भयावह भी है। विमी आज भले ही फिल्मों के पोस्टरों में न दिखें लेकिन उनकी कहानी, हमें यह याद दिलाने के लिए काफी है कि हर चमकती दुनिया के पीछे कई बुझी हुई ज़िंदगी भी होती हैं।

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