रीवा के शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय के बीएएमएस (BAMS) इंटर्न डॉक्टरों का गुस्सा आखिरकार सड़कों पर फूट पड़ा है। समान स्टाइपेंड और अन्य प्रमुख मांगों को लेकर पिछले दस दिनों से चल रहे आंदोलन के तहत, सोमवार को नौवें दिन डॉक्टरों ने उग्र रूप धारण करते हुए कॉलेज के मुख्य गेट पर अपनी डिग्रियां तक जला डालीं। इसके अगले ही दिन, यानी मंगलवार को ये इंटर्न चिकित्सक अपनी विभिन्न मांगों का ज्ञापन सौंपने के लिए सीधे रीवा कलेक्ट्रेट कार्यालय की जनसुनवाई में जा पहुंचे।
मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों के स्टाइपेंड में भारी अंतर
आंदोलनकारी चिकित्सकों का मुख्य मुद्दा मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों के स्टाइपेंड में मिलने वाले भारी अंतर को दूर करना है। डॉक्टरों का कहना है कि आयुष छात्रों और एलोपैथी के डॉक्टरों की पढ़ाई और कार्यप्रणाली में समानता होने के बावजूद, उन्हें मिलने वाले मानदेय में जमीन-आसमान का फर्क है।
वर्तमान स्थिति यह है कि:
- प्रदेश के बीएएमएस इंटर्न डॉक्टरों को मात्र 9,383 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जाता है।
- वहीं दूसरी ओर, हाल ही में ए एलोपैथी के डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाकर 21,500 रुपये कर दिया गया है।
एलोपैथी डॉक्टरों के समान सुविधाओं की मांग
आयुष छात्रों का साफ तौर पर कहना है कि उन्हें भी एलोपैथी डॉक्टरों के समान ही स्टाइपेंड और समाज में पूरा सम्मान मिलना चाहिए। डॉक्टरों का आरोप है कि शासन स्तर पर पूर्व में इस संबंध में कई बार सकारात्मक आश्वासन दिए जा चुके हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर अभी तक कोई भी आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है, जिसके कारण छात्रों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
आंदोलन के और तेज होने की चेतावनी
दस दिनों से जारी इस लगातार विरोध प्रदर्शन और हाल ही में डिग्री जलाने जैसी उग्र घटनाओं के बाद प्रशासन पर भी दबाव बढ़ गया है। कलेक्ट्रेट पहुंचे इंटर्न चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ही सहानुभूतिपूर्वक विचार कर उचित आदेश जारी नहीं किया गया, तो उनका यह आंदोलन और अधिक व्यापक रूप ले सकता है।




