उत्तर प्रदेश के अयोध्या में तैनात GST कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह कदम उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति अपनी निष्ठा जताते हुए उठाया है। प्रशांत कुमार सिंह का कहना है कि वे पिछले दो दिनों से सरकार के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ की जा रही बयानबाजी से आहत थे, जिसके विरोध में उन्होंने राज्यपाल को अपना त्यागपत्र भेज दिया है।
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में तैनात GST कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह कदम उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति अपनी निष्ठा जताते हुए उठाया है। प्रशांत कुमार सिंह का कहना है कि वे पिछले दो दिनों से सरकार के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ की जा रही बयानबाजी से आहत थे, जिसके विरोध में उन्होंने राज्यपाल को अपना त्यागपत्र भेज दिया है।

अयोध्या में प्रशासनिक गलियारों से लेकर धार्मिक हलकों तक इस समय भारी हलचल देखी जा रही है। जीएसटी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच ‘शंकराचार्य’ की पदवी को लेकर विवाद गहराया हुआ है।
प्रशांत कुमार सिंह ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि वे सरकार के समर्थन में और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विरोध में अपना पद छोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा, “जिस सरकार से मुझे वेतन मिलता है, उसके प्रति मेरी नैतिक जिम्मेदारियां हैं। जब मैंने देखा कि मेरे मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री का अपमान किया जा रहा है, तो मैंने पद पर बने रहना उचित नहीं समझा।”
विवाद की जड़: माघ मेला और शंकराचार्य पदवी
यह पूरा विवाद माघ मेले के दौरान प्रयागराज में शुरू हुआ। मौनी अमावस्या के अवसर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को उनकी पालकी के साथ पवित्र स्नान करने से कथित तौर पर रोका गया था। इसके बाद से ही वे प्रशासन के खिलाफ धरने पर बैठे हैं। यूपी सरकार ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर उनसे शंकराचार्य की पदवी से जुड़े प्रमाण मांगे थे, जिसे लेकर हिंदू संगठनों और विपक्षी दलों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट का निलंबन और आरोप
अयोध्या के घटनाक्रम से ठीक पहले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का मामला भी सुर्खियों में रहा। गणतंत्र दिवस पर इस्तीफा देने के बाद सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था। अग्निहोत्री ने उत्तर प्रदेश सरकार पर “ब्राह्मण विरोधी अभियान” चलाने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने प्रयागराज के माघ मेले में संतों के साथ हुई बदसलूकी को अपने इस्तीफे का मुख्य कारण बताया था।

उमा भारती का रुख: मर्यादा का उल्लंघन
भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने भी इस विवाद पर अपनी राय साझा की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा कि किसी से उसके शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगना “मर्यादा का उल्लंघन” है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि उनका यह बयान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ नहीं है।
उमा भारती के अनुसार, किसी संत की पदवी की वैधता जांचने का अधिकार केवल विद्वत परिषद या अन्य शंकराचार्यों के पास है, न कि शासन या प्रशासन के पास। उन्होंने उम्मीद जताई कि उत्तर प्रदेश सरकार और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच इस विवाद का जल्द ही कोई सकारात्मक समाधान निकलेगा।
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