Augmont Enterprises के आईपीओ को लेकर अब कंपनी ने डॉक्यूमेंट में किए गए डिस्क्लोजर पर चर्चाएं शुरू की है। इसके रिपोर्ट के अनुसार कंपनी के वाइडर प्रमोटर ग्रुप में शामिल दो रिश्तेदारों से जुड़े पुराने एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट प्रोसीडिंग का आईपीओ डॉक्यूमेंट के एलिगेशन डिस्क्लोजर में कोई उल्लेख नहींहै। हालांकि इसे सीधे नियम का उल्लंघन या फिर आईपीओ में धोखाधड़ी कहना सही नहीं होगा।
Augmont IPO में किस बात पर उठ रहे है सवाल?
ताजा रिपोर्ट की जानकारी के अनुसार ऑगमेंट इंटरप्राइजेज के डीआरएचपी और आरएचपी मैं राकेश मानिकचंद कोठारी और पृथ्वीराज सारे माल कोठारी को प्रमोटर्स ग्रुप में शामिल नेचुरल पर्सन के तौर पर दिखाया गया है। जानकारी के अनुसार इन दोनों से जुड़े एड प्रोसिडिंग का उल्लेख लीटिगेशन डिस्क्लोजर में नहीं है। हालांकि जानकारी में यह स्पष्ट बताया गया है कि इस ओमिशन से आप अपने आप यह साबित नहीं कर सकते हैं कि कंपनी के आईपीओ डिस्क्लोजर रूल का उल्लंघन हुआ है या नहीं। कंपनी के डिस्क्लोजर मुख्य रूप से कंपनी उसकी सब्सिडियरी डायरेक्टर्स नामित प्रमोटर्स और मटेरियल प्रोसिडिंग से संबंधित होती है।
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राकेश कोठारी से जुड़ा हुआ है ED मामला क्या था?
गुजरात हाई कोर्ट के 9 अगस्त 2023 के फैसले की जानकारी के अनुसार ed ने राकेश कोठारी को 1 सितंबर 2014 को पीएमएलए मामले में गिरफ्तार किया था। यह मामला ऐसी कंपनी की जांच से जुड़ा हुआ था जिन पर कथित रूप से बोगस बिल और इनवॉइस के जरिए दुबई और हांगकांग की एंटिटीज को विदेशी रेमिटेंस में भेजने का आरोप था। कोर्ट के रिकॉर्ड में ED की ओर से करीब 5395.75 करोड रुपए के कथित इलीगल ट्रांसफर से जुड़े आरोप का उल्लेख मिलता है। लेकिन यह आंकड़ा जांच एजेंसी द्वारा लगाए गए आरोपों से संबंधित है इसे राकेश कोठारी द्वारा किए गए या फिर अदालत से साबित किसी अपराध की रकम के रूप में नहीं दिखाया गया है।
पृथ्वीराज कोठारी के मामले में कोर्ट ने क्या कहा था
गुजरात हाई कोर्ट ने 23 जुलाई 2015 को अपने फैसले में पृथ्वीराज कोठारी से जुड़े मामले में ED ने नॉन बैलेबल वारंट की जब मांग की थी तो अदालत ने बाद में उस वारंट को रद्द कर दिया था।
अदालत के द्वारा लिया जाने वाले या फैसला मुख्य रूप से वारंट जारी करने के प्रक्रिया और पर्याप्त कारण से जुड़ा हुआ था। कोर्ट ने पीएमएलए मामले में भी लगाए गए आरोपों की मेरिट पर फैसला नहीं किया था इसलिए इसे क्लीन चिट या आरोपी से पूरी तरह मुक्त होना नहीं कहा जा सकता है।
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क्या Augmont ने अपने नियमों का उल्लंघन किया?
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर ऐसा निष्कर्ष निकालना सही नहीं होता है कि ऑगमेंट ने आईपीओ रूल का उल्लंघन किया है। सोशल मीडिया पर प्राप्त रिपोर्ट में यह कहा गया है कि इन प्रोसेसिंग का डिस्क्लोजर ना होना अपने आप में आईपीओ डिस्क्लोजर वायलेशन साबित नहीं करता है। वही प्रमोटर्स फैमिली के करीबी सूत्रों ने ऐसा दावा किया है कि राकेश कोठारी ऑगमेंट के बिजनेस में शामिल नहीं है और कंपनी ने सेबी की आईसीडीआर नियम के अनुसार जरूरी डिस्क्लोजर भी किए हैं।
इसलिए इस मामले में मुख्य सवाल फिलहाल डिस्क्लोजर और ट्रांसपेरेंसी से जुड़ा हुआ है निवेश करने वाले लोगों के लिए जरूरी हो जाता है कि वह कंपनी के rhp रिस्क के खतरों और ऑफिशियल फिलिंग्स को देखकर ही इसके आईपीओ से जुड़े।

