आकाशवाणी विशेष। देश के जनसंचार और सांस्कृतिक इतिहास के महत्वपूर्ण स्तंभ आकाशवाणी (ऑल इंडिया रेडियो) ने अपनी स्थापना के 90 गौरवशाली वर्ष पूरे कर लिए हैं। 8 जून 1936 को इंडियन स्टेट ब्रॉडकास्टिंग सर्विस का नाम बदलकर ऑल इंडिया रेडियो किया गया था, जिसे 1957 में आधिकारिक तौर पर आकाशवाणी नाम दिया गया। आकाशवाणी (ऑल इंडिया रेडियो) केवल एक प्रसारण माध्यम नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के बचपन, संस्कृति और भावनाओं का अटूट हिस्सा है। इसकी खट्टी-मीठी यादें आज भी उस सुरीली सिग्नेचर ट्यून के साथ जेहन में ताजा हो जाती हैं।
591 से अधिक रेडियो स्टेशन
आज आकाशवाणी देश के कोने-कोने तक 591 से अधिक रेडियो स्टेशनों के माध्यम से अपनी पहुंच बनाए हुए है। यह भारत की विविधता को दर्शाते हुए 23 भाषाओं और 146 बोलियों में अपने कार्यक्रम और समाचार प्रसारित करता है। बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय के मूल मंत्र से प्रेरित होकर, यह गांव की चौपाल से लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म तक आम जनता को सूचित, शिक्षित और मनोरंजन कर रहा है। अपनी पहुंच को बढ़ाते हुए आज इसके कार्यक्रम न्यूज़ ऑन एयर ऐप और डिजिटल माध्यमों (इंटरनेट) के जरिए भी सुने जा सकते हैं।
अनमोल यादें
विविध भारती और हवामहल- शाम को 7.30 बजे विविध भारती पर प्रसारित होने वाला हवामहल और रात 8 बजे आने वाली जयमाला की फरमाइशें, जिन्हें सुनने के लिए पूरा परिवार एक साथ जुट जाता था।
समाचार की गूंज- रात को ठीक 8.30 बजे बजने वाले प्रादेशिक समाचार और उससे ठीक पहले की टु..टु..टु.. की बीप। पिता या दादाजी का रेडियो के सामने कान लगाकर बैठना, और कोई बीच में बोले तो डांट पड़ना।
बचपन के कार्यक्रम- बच्चों के लिए रविवार सुबह 9.15 बजे आने वाला कार्यक्रम, जिसमें मामाजी की कहानियां और बाल कलाकारों के गीत होते थे।
बिना इंटरनेट के चुनाव- जब टीवी या स्मार्टफोन नहीं थे, तब चुनाव के नतीजे और क्रिकेट मैचों की बॉल-बाय-बॉल कमेंट्री केवल इसी पर सुनी जाती थी!
चिड़ियों की चहचहाहट- सुबह-सुबह केंद्र के खुलने पर बजने वाली शहनाई या संगीत की मधुर धुन, जिसके साथ दिन की शुरुआत होती थी। आज भी पुराने दौर के ट्रांजिस्टर (रेडियो) और आकाशवाणी की यादें दिलों में ताजा हैं।
किसान भाईयों की चर्चा- रेडियों किसान भाईयों के लिए खास कार्यक्रम प्रसारित करता था। किसान भाईयों से राम-राम का कार्यक्रम सुनने के लिए रेडियों पर किसान अपना ध्यान केन्द्रीत करते थें।




