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Air Pollution: AIIMS स्टडी में खुलासा, गर्भ में पल रहे बच्चों पर बढ़ा खतरा…

Air Pollution: AIIMS study reveals increased risk to brain and development of unborn childrenAir Pollution: AIIMS study reveals increased risk to brain and development of unborn children

Air Pollution: AIIMS study reveals increased risk to brain and development of unborn children

Air Pollution: देश में बढ़ते वायु प्रदूषण का असर सिर्फ फेफड़ों तक ही सीमित नहीं है बल्कि गर्भ में पल रहे बच्चों की सेहत पर भी एक गंभीर प्रभाव डालता है। एम्स की स्टडी में बताया गया है कि प्रदूषित हवा गर्भ के विकास मस्तिष्क की ग्रोथ और जन्म के बाद मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े रिस्क को बढ़ा सकती है। तो चलिए अब हम जानते हैं डॉक्टरों की रिसर्च में क्या पता चला है।

AIIMS स्टडी में डॉक्टर को क्या पता चला?

डॉक्टर के द्वारा एम्स के रिसर्च में किए अध्ययन में पाया गया है की हवा में मौजूद पीएम 2.5 और म 10 जैसे सूक्ष्म प्रदूषक तत्व गर्भवती महिलाओं के प्लेसेंटा तक पहुंचकर उसके सामान्य कार्य प्रणाली को प्रभावित करने वाले हैं। ऑफिशियल बयान में डॉक्टरों ने बताया कि इससे भ्रूण तक ऑक्सीजन और जरूरी पोषक तत्व की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ती जाती है। इस अध्ययन के अनुसार इससे बच्चों के शरीर की वृद्धि के शासन मस्तिष्क की शुरुआती विकास पर भी असर देखा जाता है।

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Air Pollution कैसे पहुंचा रहा है हमें नुकसान?

इस रिसर्च में बताया गया है कि प्रदूषण के कारण शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता जाता है। जिससे IGFBP3 नाम का महत्वपूर्ण प्रोटीन का स्तर प्रभावित होता है जो भ्रूण की सामान्य वृद्धि में एक अहम भूमिका निभाते है। डॉक्टर के अनुसार जब यह प्रक्रिया बाधित हो जाती है तो गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास धीमा हो जाता है और भविष्य में स्वास्थ्य संबंधित चुनौतियां का रिस्क भी बढ़ जाता है।

किन स्वास्थ्य समस्याओं का बढ़ सकता है अब
खतरा?

एम्स के अध्ययन में बताया क्या है कि ऐसे बच्चे जिनका जन्म के समय वजन कम रहता है या फिर समय के पहले प्रसव और गर्भावस्था के दौरान प्री-एक्लेम्प्सिया जैसी रिस्क अधिक पाया जाता है। वहीं पहुंच मॉडल पर किए गए परीक्षणों में बच्चों के व्यवहार मॉडल कोऑर्डिनेशन और चिंता जैसे लक्षण से जुड़े बदलाव भी देखे जाते हैं। हालांकि रिसर्च करने वाले लोगों ने स्पष्ट बताया है कि इंसानों में भविष्य में डिप्रेशन और एंजायटी होना अभी पूरी तरह साबित नहीं हुआ है और इस विषय पर आगे और भी रिसर्च की जरूरत है।

इसकी रिसर्च कैसे की गई?

इस अध्ययन में दिल्ली जैसे अधिक प्रदूषण वाले क्षेत्र और भारत के झारखंड के देवघर जैसे अपेक्षाकृत कम प्रदूषण वाले क्षेत्र की कुल 994 डिलीवरी के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। इसके अलावा वैज्ञानिकों ने पशु मॉडल का भी प्रयोग किया है। ताकि यह समझा जाए की प्रदूषण शरीर के अंदर कि जैविक प्रक्रिया के जरिए भ्रूण को प्रभावित करती है।

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Air Pollution पर अन्य शोधकर्ता क्या कहते हैं?

अन्य जानकारी के अनुसार दुनिया के कई अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में भी गर्भावस्था के दौरान वायु प्रदूषण और बच्चों की शुरुआती मस्तिष्क के विकास, भाषा की क्षमता तथा संज्ञानात्मक विकास के बीच संबंध देखने को मिला है। गर्भवती महिलाओं को प्रदूषण वाले वातावरण में अनावश्यक रूप से अधिक समय तक जाने से बचना चाहिए और नियमित स्वास्थ्य की जांच भी करते रहनी चाहिए।

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