रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले में खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही अन्नदाता भारी संकट से घिर गया है। बोनी के ऐन वक्त पर खेतों के लिए जरूरी खाद और ट्रैक्टरों के लिए डीजल न मिलने से नाराज किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। शुक्रवार को सीटू (CITU) के बैनर तले बड़ी संख्या में किसान एकजुट हुए और अपनी मांगों को लेकर जिला कलेक्टर कार्यालय का घेराव कर दिया। कलेक्ट्रेट परिसर में किसानों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी समस्याओं के समाधान के लिए कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा।
ऑनलाइन ई-प्रणाली बनी जी का जंजाल, दूर मिल रहे केंद्र
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने बताया कि प्रशासन द्वारा खाद वितरण के लिए लागू की गई नई ऑनलाइन ई-प्रणाली पूरी तरह फेल साबित हो रही है। इस व्यवस्था से सेंटरों पर लगने वाली लंबी कतारें तो खत्म हो गईं, लेकिन अब नई मुसीबत खड़ी हो गई है। सर्वर डाउन होने और अन्य तकनीकी दिक्कतों के कारण किसानों के स्लॉट ही बुक नहीं हो पा रहे हैं। इसके अलावा, जिन किसानों के स्लॉट जैसे-तैसे बुक हो भी रहे हैं, उन्हें उनके घर से 30 से 40 किलोमीटर दूर के वितरण केंद्र अलॉट किए जा रहे हैं। इससे छोटे और गरीब किसानों का समय और किराया-भाड़ा दोनों बर्बाद हो रहा है।
शत-प्रतिशत ट्रैक्टरों से खेती, पर बाजार से डीजल गायब
किसानों ने अपनी दूसरी सबसे बड़ी समस्या डीजल की किल्लत को बताया। किसान नेताओं का कहना है कि आज के दौर में जिले में शत-प्रतिशत खेती ट्रैक्टर और आधुनिक मशीनों से होती है। बोनी के लिए खेतों को तैयार करना बेहद जरूरी है, लेकिन इस समय रीवा संभाग के बाजार और पेट्रोल पंपों से डीजल गायब है। डीजल न मिलने के कारण ट्रैक्टर गैरेज और खेतों में खड़े हैं। खरीफ की फसल की बोनी का समय निकला जा रहा है, जिससे किसान बेहद चिंतित हैं।
मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी
कलेक्टर कार्यालय पहुंचे किसानों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि वे अब झूठे आश्वासनों से मानने वाले नहीं हैं। किसानों ने मांग की है कि ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग की बाध्यता को सरल किया जाए या नजदीकी सोसायटियों से सीधे खाद दिलाई जाए। साथ ही ग्रामीण इलाकों के पंपों पर पर्याप्त डीजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। किसानों ने दोटूक कहा कि अगर खाद की वितरण व्यवस्था में तत्काल सुधार नहीं हुआ और डीजल की किल्लत दूर नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में पूरे जिले के किसान सड़कों पर उतरकर उग्र चक्काजाम और आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।




