रीवा : करंट लगने से 9 वर्षीय मासूम की मौत, अंग निकालने के डर से पीएम को लेकर परिजनों का हंगामा

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रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक बेहद हृदयविदारक और संवेदनशील मामला सामने आया है। यहां के प्रतिष्ठित संजय गांधी चिकित्सालय में कूलर से करंट लगने के कारण एक 9 वर्षीय मासूम बच्चे की असमय मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे के बाद अस्पताल परिसर में उस समय भारी हंगामा और तनाव की स्थिति निर्मित हो गई, जब मृतक के परिजनों ने अंधविश्वास और एक अजीब से डर के चलते बच्चे का पोस्टमॉर्टम कराने से साफ इनकार कर दिया। कई घंटों की हाई-वोल्टेज ड्रामे और समझाइश के बाद आखिरकार शव का पोस्टमॉर्टम हो सका।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक बच्चे की पहचान 9 वर्षीय चित्रांश पांडेय के रूप में हुई है। उसके पिता प्रदीप पांडेय निवासी मरजादपुर, थाना रामनगर पेशे से एक शिक्षक हैं। बताया जा रहा है कि मंगलवार दोपहर करीब 1 बजे घर में चल रहे कूलर से अचानक चित्रांश को जोरदार करंट लग गया, जिससे वह मौके पर ही अचेत होकर गिर पड़ा। आनन-फानन में बदहवास परिजन उसे लेकर तुरंत संजय गांधी चिकित्सालय पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। बच्चे की मौत की खबर सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया।

मासूम की मौत के बाद जब अस्पताल प्रशासन ने वैधानिक प्रक्रिया के तहत शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजने की तैयारी की, तो मृतक के पिता प्रदीप पांडेय और अन्य परिजनों ने इसका कड़ा विरोध करना शुरू कर दिया। पेशे से शिक्षक होने के बावजूद पिता के मन में यह गहरा डर बैठ गया था कि पोस्टमॉर्टम की आड़ में डॉक्टरों द्वारा उनके बच्चे के शरीर से अंदरूनी अंग निकाल लिए जाएंगे। इस बात को लेकर परिजनों का आक्रोश इस कदर बढ़ा कि उन्होंने अस्पताल परिसर को ही छावनी में तब्दील कर दिया और हंगामा शुरू कर दिया।

अस्पताल में बढ़ते हंगामे और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों और वरिष्ठ चिकित्सकों की टीम ने मोर्चा संभाला। अधिकारियों ने रोते-बिलखते परिजनों और शिक्षक पिता को बंद कमरे में बैठाकर पोस्टमॉर्टम की पूरी कानूनी प्रक्रिया समझाई और उनके मन से अंग निकालने के भ्रम व डर को दूर करने का प्रयास किया।

डॉक्टरों और पुलिस प्रशासन की भारी मशक्कत और लंबी समझाइश के बाद आखिरकार बुधवार सुबह परिजन पोस्टमॉर्टम के लिए राजी हुए। मर्चुरी में डॉक्टरों के पैनल द्वारा बच्चे के शव का पोस्टमॉर्टम संपन्न किया गया। इसके तुरंत बाद पुलिस की मौजूदगी में मासूम चित्रांश के शव को अंतिम संस्कार के लिए रोते-बिलखते परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। इस घटना के बाद से रामनगर के मरजादपुर गांव सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।

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