राजस्थान की राजधानी जयपुर में आयोजित 78th Army Day Parade ने भारतीय सैन्य शक्ति और आधुनिकता की एक नई तस्वीर पेश की है। पहली बार छावनी से बाहर निकलकर सार्वजनिक सड़क पर आयोजित इस परेड में ‘आत्मनिर्भर भारत’ की झलक साफ दिखी। इस दौरान सेना की K9 डॉग यूनिट के ‘चार पैर वाले योद्धाओं’ ने अपने खास अंदाज और स्वदेशी पहचान से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
जयपुर में आयोजित हुआ ऐतिहासिक Army Day Parade
पिंक सिटी की सड़कों पर सैन्य शौर्य का प्रदर्शन जयपुर के जगतपुरा स्थित महल रोड पर जब सेना के टैंक और मिसाइल सिस्टम उतरे, तो माहौल जोश से भर गया। 78th Army Day Parade के इतिहास में यह एक बड़ा बदलाव था, क्योंकि पारंपरिक रूप से यह आयोजन सैन्य क्षेत्रों तक सीमित रहता था। हजारों की संख्या में मौजूद नागरिकों ने ब्रह्मोस मिसाइल, पिनाका रॉकेट लॉन्चर और भीष्म जैसे शक्तिशाली टैंकों को अपनी आंखों के सामने से गुजरते देखा।

K9 डॉग्स बने आकर्षण का केंद्र
सेना की K9 यूनिट में स्वदेशी नस्लों की धमक इस परेड का सबसे चर्चित हिस्सा सेना की K9 डॉग यूनिट रही। केंद्र सरकार के आत्मनिर्भरता के विजन को आगे बढ़ाते हुए, सेना ने अब विदेशी नस्लों पर निर्भरता कम कर दी है। अब भारतीय सेना में मुधोल हाउंड, रामपुर हाउंड, चिप्पीपाराई, कोम्बाई और राजापलायम जैसी स्वदेशी नस्लों को शामिल किया गया है। इन नस्लों को उनकी चपलता, स्थानीय जलवायु के प्रति अनुकूलता और बेहतर सूंघने की क्षमता के लिए चुना गया है।
चश्मा पहने डॉग्स: स्टाइल नहीं, सुरक्षा का सवाल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में सेना के ये कुत्ते काले चश्मे (Goggles) पहने नजर आ रहे हैं। हालांकि, यह कोई फैशन नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रोटोकॉल है। ऑपरेशन्स के दौरान, विशेषकर जब ग्रेनेड विस्फोट या गोलीबारी होती है, तो उड़ने वाले मलबे, धूल और छर्रों से इन कुत्तों की आंखों को बचाने के लिए यह विशेष चश्मा पहनाया जाता है। यह उनकी कार्यक्षमता को सुरक्षित रखने का एक वैज्ञानिक तरीका है।
रोबोटिक डॉग ने दिखाई तकनीकी झलक
भविष्य की युद्धकला और रोबोटिक डॉग तकनीकी विकास की दिशा में एक और बड़ा कदम ‘रोबोटिक डॉग’ का प्रदर्शन था। यह चार पैरों वाला रोबोट दुर्गम पहाड़ियों, संकरी गलियों और उन इलाकों में जा सकता है जहाँ इंसानी सैनिकों के लिए खतरा ज्यादा होता है। इसमें लगे हाई-डेफिनिशन कैमरे और सेंसर दुश्मन की लोकेशन ट्रैक करने में सक्षम हैं। यह आधुनिक युद्ध क्षेत्र में सेना की ‘थर्ड आई’ (तीसरी आंख) के रूप में काम करेगा।

रणनीतिक महत्व और नागरिक जुड़ाव जयपुर में इस भव्य आयोजन का चुनाव रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। राजस्थान की सीमाएं पाकिस्तान से सटी हैं, और यहाँ की जनता का सेना से पुराना भावनात्मक जुड़ाव रहा है। परेड को सैन्य छावनी से बाहर लाने का उद्देश्य आम लोगों, विशेषकर युवाओं को भारतीय सेना की कार्यप्रणाली और गौरवशाली इतिहास से रूबरू कराना है, ताकि वे राष्ट्र सेवा के प्रति प्रेरित हों।
आधुनिक हथियारों का जखीरा परेड में स्वदेशी तकनीक से बने ‘अर्जुन’ टैंक और एडवांस्ड कॉम्बैट सिस्टम का प्रदर्शन यह बताता है कि भारतीय सेना अब केवल आयातित हथियारों पर निर्भर नहीं है। डिजिटल वॉरफेयर और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के इस दौर में सेना खुद को तेजी से अपग्रेड कर रही है।
अधिक जानने के लिए आज ही शब्द साँची के सोशल मीडिया पेज को फॉलो करें और अपडेटेड रहे।
- Facebook: shabdsanchi
- Instagram: shabdsanchiofficial
- YouTube: @shabd_sanchi
- Twitter: shabdsanchi
