CEC Gyanesh Kumar : राज्यसभा में विपक्ष के 73 सदस्यों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग करते हुए नया नोटिस दिया है। इसमें उन पर ‘प्रमाणित कदाचार’ का आरोप लगाया गया है। आरोपों में आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन, पक्षपातपूर्ण व्यवहार, सोशल मीडिया पर राजनीतिक दल की निंदा, मतदाता सूची में हेरफेर और अधिकारियों के तबादले शामिल हैं।
73 सांसदों ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नोटिस भेजा
73 राज्यसभा सांसदों ने नोटिस शुक्रवार को राज्यसभा के महासचिव को सौंपा गया। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा कि इन 73 सांसदों ने राष्ट्रपति के नाम एक प्रस्ताव भी भेजा है, जिसमें ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने का आग्रह किया गया है। आरोप 15 मार्च 2026 के बाद किए गए कार्यों से संबंधित हैं।
सांसदों ने नोटिस में क्या आरोप लगाया
पहला आरोप- प्रथम आरोप में कहा गया है कि चुनाव आयोग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 18 अप्रैल के भाषण के बाद आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया।
दूसरा आरोप- दूसरे आरोप में सोशल मीडिया पर तृणमूल कांग्रेस की निंदा का जिक्र है।
तीसरा आरोप- तीसरे में भाजपा के चुनाव उल्लंघनों का जिक्र है।
चौथा आरोप- चौथे आरोप में चुनाव आयोग के व्यवहार पर सवाल उठाए गए हैं।
पांचवा आरोप- पांचवें में मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर संशोधन का आरोप है, जिसमें कई मतदाताओं को मताधिकार से वंचित किया गया।
छठा आरोप- छठे आरोप में शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करने का जिक्र है।
सातवां आरोप- सातवें में संपूर्ण मतदाता सूची संशोधन का उल्लेख है।
आठवां आरोप- आठवें आरोप में न्यायालय की आलोचना की गई है। और नौवें में तमिलनाडु में अधिकारियों के तबादले का आरोप है।
नोटिस पर 73 सांसदों के हस्ताक्षर हैं
यह नया नोटिस 12 मार्च को लोकसभा और राज्यसभा में पेश किए गए नोटिसों के कुछ ही हफ्तों बाद आया है, जिनमें भी कुमार पर आरोप लगाए गए थे। इन नोटिसों पर 73 सांसदों के हस्ताक्षर थे। मोदी सरकार के नियमों के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के जज जैसी प्रक्रिया अपनाई जाती है।
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