हिंदी पत्रकारिता के 200 साल, 3 दिवसीय राष्ट्रीय विमर्श प्रणाम उदंत मार्तण्ड आज से

विशेष। हिन्दी पत्रकारिता की शुरुआत बंगाल से हुई और इसका श्रेय राजा राममोहन राय को दिया जाता है। राजा राममोहन राय ने ही सबसे पहले प्रेस को सामाजिक उद्देश्य से जोड़ा। भारतीयों के सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक, आर्थिक हितों का समर्थन किया। समाज में व्याप्त अंधविश्वास और कुरीतियों पर प्रहार किये और अपने पत्रों के जरिए जनता में जागरूकता पैदा की। राजा राममोहन राय ने कई पत्र शुरू किये, जिसमें अहम हैं- साल 1816 में प्रकाशित ‘बंगाल गजट’। बंगाल गजट भारतीय भाषा का पहला समाचार पत्र है। इस समाचार पत्र के संपादक गंगाधर भट्टाचार्य थे। इसके अलावा राजा राममोहन राय ने मिरातुल, संवाद कौमुदी, बंगाल हैराल्ड पत्र भी निकाले और लोगों में चेतना फैलाई।

1826 को निकला था पहला समाचार पत्र

30 मई 1826 को कलकत्ता से पंडित जुगल किशोर शुक्ल के संपादन में निकलने वाले ‘उदंत्त मार्तण्ड’ को हिंदी का पहला समाचार पत्र माना जाता है। कोलकाता से पंडित जुगल किशोर शुक्ल द्वारा पहले हिंदी समाचार पत्र उदंत मार्तंड के प्रकाशन के साथ शुरू हुई हिंदी पत्रकारिता, मई 2026 में अपने गौरवशाली 200 वर्ष पूरे कर रही है। यह यात्रा राष्ट्र निर्माण, सामाजिक चेतना और स्वतंत्रता संग्राम से लेकर डिजिटल युग तक की एक ऐतिहासिक गाथा है।

हिन्दी पत्रकारिता का एक लम्बा सफर

हिन्दी पत्रकारिता ने एक लम्बा सफर तय किया है। जब पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने उदन्त मार्तण्ड को रूप दिया, तब किसी ने भी यह कल्पना नहीं की थी कि हिन्दी पत्रकारिता इतना लम्बा सफर तय करेगी। जुगल किशोर शुक्ल ने काफ़ी दिनों तक उदन्त मार्तण्ड को चलाया और पत्रकारिता करते रहे, लेकिन आगे के दिनों में उदन्त मार्तण्ड को बन्द करना पड़ा था। यह इसलिए बंद हुआ, क्योंकि पंडित जुगल किशोर के पास उसे चलाने के लिए पर्याप्त धन नहीं था, हांलाकि 200 वर्षों में हिंदी अखबारों एवं समाचार पत्रकारिता के क्षेत्र में काफ़ी तेज़ी आई है। साक्षरता बढ़ी है। पंचायत स्तर पर राजनीतिक चेतना बढ़ी है। इसके साथ ही साथ विज्ञापन भी बढ़े हैं। हिंदी के पाठक अपने अखबारों को पूरा समर्थन देते हैं।

भोपाल में आयोजन

भोपाल के भारत भवन में शुक्रवार से हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय विमर्श प्रणाम उदंत मार्तण्ड शुरू होगा। कार्यक्रम में देशभर के 60 से अधिक संपादक और वरिष्ठ पत्रकार शामिल होंगे। आयोजन में लाइव कार्टून शो, हास्य प्रस्तुतियां, सांस्कृतिक संध्या और पत्रकारिता की 200 साल की यात्रा पर प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रहेंगी।

हिंदी पत्रकारिता के मुख्य बिंदु

शुरुआत और नींव- 30 मई 1826 को उदंत मार्तंड के प्रकाशन के कारण ही हर साल 30 मई को ख्हिंदी पत्रकारिता दिवस, मनाया जाता है।
स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका- हिंदी पत्रकारिता ने राष्ट्रप्रेम और देश की स्वाधीनता की भावना से राष्ट्र को एकजुट किया।
विकास यात्रा- कोलकाता के अमरतल्ला लेन से शुरू होकर, यह यात्रा आज भोपाल के भारत भवन में आयोजित प्रणाम उदंत मार्तण्ड जैसे राष्ट्रीय विमर्शों तक पहुंच गई है, जिसमें देशभर के 60 से अधिक संपादक हिस्सा ले रहे हैं।
बदलता स्वरूप- पारंपरिक पत्रकारीय मूल्यों से लेकर डिजिटल मीडिया की मोबाइल जनित व्यस्तता तक, हिंदी पत्रकारिता ने एक लंबा सफर तय किया है।
वर्तमान स्थिति- वर्तमान में हिंदी पत्रकारिता ने अंग्रेजी के दबदबे को पीछे छोड़ दिया है और देश की सबसे लोकप्रिय भाषा पत्रकारिता बन गई है।

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