सीएम मोहन का बड़ा ऐलान, जनजातीय नायकों पर बनाए फिल्म, सरकार करेगी सहयोग

जबलपुर। मध्यप्रदेश के आदिवासी संस्कृत और उनके जननायकों को जन-जन तक पहुचाने के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बड़ा ऐलान किए है। जबलपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होने कहां कि प्रदेश के गौरवशाली अतीत को सबके सामने लाना राज्य सरकार का दायित्व है। सरकार जनजातीय महापुरुषों और बलिदानियों के जीवन पर फिल्म तैयार करने सहित सभी योजना में पूरा सहयोग करेगी।

कांग्रेस पर कसा तंज

सीएम मोहन ने कांग्रेस पर तंज कसते हए कहा कि बड़े दुर्भाग्य की बात है हमारे विरोधी सदैव समाज के वोट तो पाते रहे, लेकिन लगातार झूठ बोलते रहे। उन्हें आदिवासी जननायकों को पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं बनने दिया। कांग्रेस और उनकी सरकार लंबे समय तक रही, लेकिन इस समाज से कोई राष्ट्रपति नहीं बनाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आदिवासी बहन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को देश का प्रेसिडेंट बनाया। यह हमारी सरकार के काम करने का तरीका है। छत्तीसगढ़ में जनजातीय नेता विष्णुदेव साय मुख्यमंत्री हैं। हमारी सरकार रानी दुर्गावती लोक का निर्माण करेगी। निमाड़ के जनजातीय नायक क्रांतिसूर्य टंट्या मामा के नाम पर खरगोन में विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है। बुंदेलखंड के सागर में भी रानी अवंती बाई लोधी के नाम पर विश्वविद्यालय की शुरुआत की गई है।

सीएम ने बताया कौन थे राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और जनजातीय महानायक राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि हमारे लिए आज का दिन बेहद पवित्र है। यह दिन उस दौर से संबंधित है, जब अंग्रेजों का शासनकाल था। उस समय कहा जाता था कि अंग्रेजों के राज्य में सूर्यास्त नहीं होता। अंग्रेज इतने बड़े भूभाग में सरकार चलाते थे। हमें गर्व है आदिवासी नायक राजा शंकर शाह-कुंवर रघुनाथ शाह ने उन्हें देश की शक्ति से परिचित कराया। सीएम डॉ. यादव ने कहा कि 1857 के पहले समर में बलिदान से पहले आदिवासी नायक राजा शंकर शाह ने गीतों-कविताओं के माध्यम से आजादी की अलख जगाई। वे देश और धर्म को साथ लेकर चले। उन्होंने तलवार का काम कलम से करके दिखाया।

गीतों से जनता में किया नए जीवन का संचार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनता के दमन के खिलाफ स्वभाषा-स्वधर्म-रचनात्मकता-साहित्य साधन करते-करते राजा शंकर शाह भगवान के रूप में स्थापित हो गए। जनता के बीच उनके गीतों ने नए जीवन का संचार किया। उन्होंने कहा कि राजा शंकर शाह के बेटे रघुनाथ शाह ने भी बढ़-चढ़कर पिता के अभियान को जारी रखा। उनकी गतिविधियों से अंग्रेजों की चूलें हिल गईं, अंग्रेज डर के मारे कांपने लगे। तब अंग्रेजों ने उनको पकड़ा और बंदी बनाकर रखा। अंग्रेजों ने उन्हें छोड़ने के लिए पहली शर्त रखी कि वे उनके पराधीन हो जाएं, पेंशन लेकर राज समर्पित कर दें। दूसरी शर्त में कहा गया कि उन्हें अपना धर्म छोड़ना होगा। अंग्रेजों की शर्त सुनकर राज शंकर शाह-रघुनाथ शाह ने कहा कि तुम लोगों ने हमें बहुत छोटा समझा है।

सिकल सेल पर अभूतपूर्व काम

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सिकल सेल में अभूतपूर्व काम किया गया। मध्यप्रदेश के साथ-साथ गुजरात और राजस्थान में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज रहता है। उन्हें सिकल सेल से बचाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने अभियान चलाया। उनके साथ-साथ राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने भी इस दिशा में पूरा ध्यान दिया। सरकार के स्तर पर भी हमने राजा भभूत सिंह, राजा शंकर शाह-रघुनाथ शाह, रानी दुर्गावती जैसे महापुरुषों को पाठ्यक्रम में शामिल किया, ताकि भविष्य में पीढ़ियां इनके बारे में जानें, इनको समझें।

कौन थे राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह

राजा शंकर शाह और उनके पुत्र कुंवर रघुनाथ शाह गोंडवाना साम्राज्य के महान जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में अंग्रेजों के खिलाफ अद्भुत वीरता दिखाई थी। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री (डॉ. मोहन यादव) ने उनके बलिदान दिवस पर उनके योगदान को याद करते हुए बताया कि ये महानायक ‘स्वदेशी’ और देश की स्वतंत्रता के लिए समर्पित थे।

मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • परिचय: राजा शंकर शाह गढ़ा-मंडला (जबलपुर क्षेत्र) के गोंडवाना साम्राज्य के राजा थे, और कुंवर रघुनाथ शाह उनके सुपुत्र थे।
  • क्रांति में योगदान: उन्होंने अपनी ओजस्वी और क्रांतिकारी कविताओं के माध्यम से आम जनता और सैनिकों को ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ विद्रोह करने के लिए प्रेरित किया।
  • बलिदान: अंग्रेजों ने 14 सितंबर 1857 को उन्हें गिरफ्तार किया और 18 सितंबर 1857 को पिता-पुत्र दोनों को तोप के मुंह से बांधकर उड़ा दिया था।

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