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World Book Fair 2026 : विश्व पुस्तक मेला 2026 में रीवा की पुष्तकों का बोलबाला

World Book Fair 2026 : विश्व पुस्तक मेला 2026 में रीवा की पुष्तकों का बोलबाला -रीवा 17 जनवरी 2026 को प्रगति मैदान, नई दिल्ली में आयोजित विश्व पुस्तक मेला केवल पुस्तकों का उत्सव नहीं रहा, बल्कि यह भारतीय साहित्य, विशेषकर विंध्य प्रदेश के साहित्यिक वैभव, के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण बन गया। इस अवसर पर विंध्य प्रदेश के वरिष्ठ कवि एवं प्रतिष्ठित साहित्यकार रामनरेश तिवारी निष्ठुर की दो पुस्तकों का विमोचन देश के नौसेना प्रमुख Admiral दिनेश कुमार त्रिपाठी के हाथों संपन्न हुआ। कार्यक्रम में उनकी गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को एक विशेष ऊंचाई प्रदान की और साहित्य तथा राष्ट्रसेवा के सुंदर समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत किया। नई दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित विश्व पुस्तक मेला 2026 में विंध्य प्रदेश के वरिष्ठ कवि रामनरेश तिवारी निष्ठुर की दो पुस्तकों का विमोचन नौसेना प्रमुख Admiral Dinesh Kumar Tripathi के करकमलों से संपन्न हुआ। यह आयोजन साहित्य और सम्मान का अविस्मरणीय संगम बना।

गरिमा और सादगी से भरा ऐतिहासिक क्षण

Admiral दिनेश कुमार त्रिपाठी का साहित्यकारों के बीच सहज रूप से घुलना-मिलना, लेखकों से आत्मीय संवाद करना और रचनाकारों को अपने प्रेरक शब्दों से सम्मानित करना उपस्थित सभी जनों के लिए अविस्मरणीय अनुभव बन गया। उनकी उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि साहित्य केवल शब्दों का संसार नहीं, बल्कि राष्ट्र की चेतना का आधार है। इस विमोचन समारोह ने साहित्य और समाज के बीच की दूरी को और कम किया।

रीवा से दिल्ली तक की साहित्यिक यात्रा

इस आयोजन से जुड़ा एक भावनात्मक और प्रेरणादायी पहलू यह भी रहा कि 16 जनवरी को रीवा से दिल्ली की यात्रा
रामनरेश तिवारी निष्ठुर,संतोष द्विवेदी लोकनाथ,प्रवेश तिवारी,विभूति तिवारी,दीपक दीपक,बुद्धिमान नील,के साथ आरंभ हुई और पुस्तक मेले के उपरांत सभी की साथ में वापसी ने इस यात्रा को स्मृतियों में स्थायी स्थान दे दिया। यह केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि साहित्यिक और आत्मीय यात्रा भी रही।

प्रसिद्ध साहित्यकारों से संवाद का अवसर

विश्व पुस्तक मेले के दौरान अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकारों से साक्षात्कार और संवाद का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इनमें प्रमुख रूप से-विवेक चतुर्वेदी,इंदु श्रीवास्तव,संतोष तिवारी,सांत्वना श्रीकांत शामिल रहीं।इस दौरान विचारों के आदान-प्रदान और साहित्यिक दृष्टि के विस्तार का अवसर प्रदान किया।

पुस्तकों से प्रेम और पाठकों की भीड़

पुस्तक मेले में उमड़ी भारी भीड़, पाठकों की आंखों में साहित्य के प्रति उत्साह,रचनाकारों को देखने और उनसे मिलने की ललक आदि ,ये सभी दृश्य इस बात का प्रमाण थे कि डिजिटल युग के बावजूद पुस्तकों का आकर्षण अक्षुण्ण है। यह अनुभव पढ़ने और लिखने के लिए नई ऊर्जा और सृजनात्मक प्रेरणा देने वाला रहा।

निष्कर्ष-विश्व पुस्तक मेला 2026 न केवल पुस्तकों का उत्सव रहा, बल्कि यह साहित्य, सम्मान, संवाद और संवेदनाओं का संगम बन गया। रामनरेश तिवारी निष्ठुर जी की पुस्तकों का विमोचन विंध्य साहित्य के लिए एक गौरवपूर्ण उपलब्धि है। मन में यही कामना है कि साहित्य जगत निरंतर समृद्ध होता रहे, नई पीढ़ियों को प्रेरित करता रहे और शब्दों के माध्यम से समाज को दिशा देता रहे।

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