world asthma day। हवा में धूल, धुआं और हानिकारक कण सांस की बीमारियों को बढ़ा रहे हैं। विश्व अस्थमा दिवस 2026 पर डॉक्टरों ने बढ़ते प्रदूषण को अस्थमा के मामलों में वृद्धि का मुख्य कारण बताया। मास्क, साफ वातावरण, नियमित दवाएं और समय पर जांच से अस्थमा नियंत्रित किया जा सकता है।
1998 से मनाया जा रहा अस्थमा दिवस
वर्ष 1998 में बार्सिलोना स्पेन में आयोजित विश्व अस्थमा बैठक में 33 से अधिक देशों ने पहली बार यह दिवस मनाया था। तब से यह प्रतिवर्ष मई माह के पहले मंगलवार को मनाया जाता है। इसे मनाने का मुख्य उद्देश्य अस्थमा के प्रति जागरूकता बढ़ाना उपचार समय पर लेना और उपचार की गुणवत्ता में सुधार करना है।
क्या है अस्थमा रोग
अस्थमा श्वास नली में आने वाली सूजन है। इसमें सामान्य व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ, सांस फूलना, चलने में हाफनी आना, सीने में जकड़न, खांसी और एलर्जी होती है। इन लक्षणों के कारण मरीज असहज महसूस करता है, अस्थमा में सांस लेने की कठिनाई के साथ, फेफड़ों में बलगम जमाव और सीने में जकड़न के अलावा सांस फूलने जैसी तकलीफ होती है। सांस की तकलीफ से शीघ्र लाभ के लिए इसके मरीजों को इन्हेलर से दवाएं लेनी होती हैं।
गर्मी में क्यों बढ़ जाती है परेशानी?
गर्मियों में अस्थमा मरीजों को ज्यादा दिक्कत हो सकती है क्योंकि इस मौसम में कई ट्रिगर बढ़ जाते हैं। जैसे धूल, प्रदूषण, तेज धूप, उमस, परागकण, फंगस और बाहर का धुआं। इन सबका असर सीधे फेफड़ों पर पड़ता है और सांस लेना मुश्किल हो सकता है।
गर्मियों में अस्थमा को कंट्रोल करने के उपाय
हवा और परागकण ज्यादा होने पर घर में रहें। AC का सही इस्तेमाल करें और बाहर से आने के बाद साफ-सफाई जरूर करें। अचानक परेशानी कभी भी हो सकती है, इसलिए इनहेलर हमेशा अपने पास रखें और उसकी एक्सपायरी चेक करते रहें। कम पानी पीने से सांस की नलियों में बलगम गाढ़ा हो जाता है। पर्याप्त पानी पीने से सांस लेना आसान रहता है और फेफड़े साफ रहते हैं। घर में धूल, फंगस और गंदगी अस्थमा को बढ़ा सकती है। नियमित सफाई, बेडशीट बदलना और AC फिल्टर साफ रखना जरूरी है। दवाएं बंद करना या इलाज छोड़ना सबसे बड़ी गलती है। डॉक्टर की सलाह मानें और किसी भी परेशानी पर तुरंत संपर्क करें।

