ड्रग माफिया पर अब तक बहुत सी फिल्में बनी हैं, लेकिन उनमें से ज़्यादातर में ड्रग माफिया पुरुष खलनायक होता है और ग्लैमर बढ़ाने के लिए उसके ग्रुप में एक-दो खूबसूरत लड़कियां जोड़ दी जाती हैं। लेकिन नेटफ्लिक्स की इस सीरीज़ ने तो पूरा मामला ही पलट दिया है। यह पूरा ड्रग का धंधा महिलाओं द्वारा चलाया जाता है और इसे कमाल के तरीके से चलाया जाता है। खास तौर पर शबाना आज़मी स्क्रीन पर बहुत दमदार लगती हैं और एक ड्रग डीलर से कहती भी हैं कि सामान भले ही तुम्हारा हो लेकिन बाज़ार मेरा है और ये महिलाएं इस बाज़ार की रानियाँ हैं।
ये कहानी कुछ ऐसी महिलाओं की है जिनकी कुछ मजबूरियां हैं और उन्हें पैसों की जरूरत है। कोई घर में साफ-सफाई का काम करती है, किसी को अपने होने वाले बच्चे के लिए पैसों की जरूरत है, कोई अपना कारोबार बढ़ाना चाहती है। हालात उन्हें एक साथ लाते हैं और वो लंच बॉक्स में ड्रग्स सप्लाई करने लगती हैं। उन्हें लगता है कि कुछ पैसे कमाने के बाद वो ये काम छोड़ देंगी लेकिन वो उस दलदल में फंस जाती हैं। आगे क्या होता है ये देखने के लिए आपको नेटफ्लिक्स पर इस सीरीज के 7 एपिसोड देखने होंगे, हर एपिसोड करीब 50 मिनट लंबा है। सीरीज शुरुआत में थोड़ी धीमी लगती है।
पहले एपिसोड में कुछ खास नहीं होता लेकिन दूसरे एपिसोड से सीरीज अपने मुकाम पर आ जाती है। शबाना आजमी की एंट्री से सीरीज में नई जान आ जाती है और फिर तीसरे एपिसोड से जब ये गैंग डब्बा कार्टेल चलाना शुरू करता है तो आपको मजा आता है. ऐसा कम ही होता है कि महिलाओं को इतना मजबूत दिखाया जाए और सीरीज की अगुआई सिर्फ और सिर्फ महिलाएं ही करें। इस सीरीज में सभी की परफॉर्मेंस कमाल की है. एक भी कमजोर परफॉर्मेंस नहीं है।
हर किरदार को पूरा मौका दिया गया है. पुरुष किरदारों को भी बढ़िया दिखाया गया है। सीरीज में कोई एक किरदार हावी नहीं होता, चाहे शबाना आजमी कितनी भी कमाल की एक्ट्रेस क्यों न हों। वो स्क्रीन पर आते ही कमाल कर देती हैं लेकिन बाकी किरदारों को भी उभरने का पूरा मौका मिलता है. एक दवा बनाने वाली कंपनी का एंगल भी जोड़ा गया है जो दवा के नाम पर ड्रग्स बनाती है और ये कहीं-कहीं थोड़ा खिंचा हुआ लगता है और उसकी वजह है इन महिला किरदारों का कमाल. आप उन्हें ही देखना चाहते हैं.