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Women Rights in India : महिलाएं क्यों नहीं जान पातीं अपने अधिकार ?

कार्यशाला में महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी देती सामाजिक कार्यकर्ता, नोट्स और पोस्टर के साथकार्यशाला में महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी देती सामाजिक कार्यकर्ता, नोट्स और पोस्टर के साथ

भारत में महिलाओं के अधिकारों पर जागरूकता

Women Rights in India-महिलाएं क्यों नहीं जान पातीं अपने अधिकार ?-भारत में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए अनेक सशक्त कानून बनाए गए हैं, जिनमें घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 (PWDVA) एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानून है। यह अधिनियम महिलाओं को शारीरिक, मानसिक, आर्थिक और भावनात्मक हिंसा से सुरक्षा प्रदान करता है लेकिन वास्तविकता यह है कि आज भी बड़ी संख्या में महिलाऐं अपने कानूनी अधिकारों से अनजान हैं। कानून किताबों में मौजूद है, पर ज़रूरतमंद महिला तक उसकी जानकारी नहीं पहुंच पाती। सवाल यह है कि आखिर महिलाएं अपने अधिकार क्यों नहीं जान पातीं ? इसके पीछे कई सामाजिक, आर्थिक और मानसिक कारण छिपे हुए हैं। भारत में महिलाओं के अधिकारों के प्रति जागरूकता की कमी क्यों है ? जानिए कैसे कानूनी जानकारी का अभाव,सामाजिक दबाव और आर्थिक निर्भरता के कारण PWDVA जैसे महत्वपूर्ण कानून महिलाओं तक नहीं पहुंच पाते।

महिलाओं के अधिकारों से अनभिज्ञता के प्रमुख कारण

कानूनी जानकारी का अभाव-अधिकांश महिलाओं को यह तक पता नहीं होता कि घरेलू हिंसा सिर्फ मारपीट तक सीमित नहीं है। मानसिक प्रताड़ना,आर्थिक नियंत्रण,अपमानजनक भाषा,जबरन रिश्ते-ये सभी PWDVA के अंतर्गत अपराध हैं। कानूनी भाषा की जटिलता और सरल जानकारी के अभाव में महिलाएं कानून से दूरी बनाए रखती हैं।

सामाजिक डर और शर्म

समाज में आज भी यह सोच गहराई से बैठी है कि “घर की बात घर में ही रहनी चाहिए। महिलाएं बदनामी, तानों और सामाजिक बहिष्कार के डर से चुप रह जाती हैं। उन्हें यह सिखाया जाता है कि सहना ही उनका धर्म है, जबकि कानून उन्हें आवाज़ उठाने का अधिकार देता है।

परिवार का दबाव

कई बार महिला अपने अधिकार जान भी लेती है, लेकिन-मायके का समझौता करने का दबाव,बच्चों का भविष्य,परिवार की ‘इज़्ज़त’ उसे कदम उठाने से रोक देते हैं। परिवार का सहयोग न मिलना कानून तक पहुंच की सबसे बड़ी बाधा बन जाता है।
आर्थिक निर्भरता जो महिला आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं होती, उसके लिए कानूनी लड़ाई डरावनी लगती है जैसे – वकील का खर्च,रहने की चिंता,बच्चों की ज़िम्मेदारी,PWDVA मुफ्त कानूनी सहायता और भरण-पोषण का अधिकार देता है, लेकिन इसकी जानकारी के अभाव में महिलाएं खुद को असहाय समझती हैं।

जागरूकता कार्यक्रमों की जानकारी का अभाव

सरकार द्वारा-वन स्टॉप सेंटर,महिला हेल्पलाइन,संरक्षण अधिकारी,मुफ्त कानूनी सहायता
जैसी कई सुविधाएं उपलब्ध हैं लेकिन ग्रामीण और छोटे शहरों की महिलाएं इन सेवाओं के बारे में जान ही नहीं पातीं। सूचना का अभाव, अधिकारों को निष्क्रिय बना देता है। PWDVA जैसे कानून क्यों नहीं पहुंच पाते महिलाओं तक ? PWDVA एक प्रभावी कानून है, लेकिन जानकारी की कमी,डर का माहौल,सामाजिक चुप्पी-इसे कागज़ों तक सीमित कर देती है। जब तक महिला को यह विश्वास नहीं होगा कि कानून उसके साथ है, तब तक कानून का उद्देश्य अधूरा रहेगा।

समाधान-जागरूकता ही सशक्तिकरण है

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