Winter Special Teliya Maah Recipe:सर्दियों की ख़ास,पहाड़ी डिश-मां की दाल यानि उड़द की तेली की विधि-ठंड के मौसम में शरीर को गर्म रखने वाली और पोषण से भरपूर पारंपरिक रेसिपीज़ की बात ही अलग होती है। पहाड़ी क्षेत्रों, खासकर हिमाचल प्रदेश में सर्दियों के दौरान बनने वाली “मां की दाल की तेली”- (Teliya Maah) ऐसी ही एक खास डिश है। इसे हिमाचली धाम में विशेष अवसरों पर परोसा जाता है। साबुत उड़द दाल, देसी घी और सीमित लेकिन सुगंधित मसालों से बनने वाली यह दाल न सिर्फ स्वादिष्ट होती है, बल्कि ठंड में शरीर को ऊर्जा भी देती है। धीमी आंच पर पकने से इसमें ऊपर तैरता तेल इसकी पहचान बन जाता है, इसी वजह से इसे तेली कहा जाता है। सर्दियों में बनने वाली हिमाचली धाम की खास डिश मां की दाल की तेली (Teliya Maah) की पारंपरिक रेसिपी जानिए। स्वाद, सेहत और देसी घी की खुशबू से भरपूर यह विंटर स्पेशल दाल चावल के साथ बेहद लाजवाब लगती है।
मां की दाल बनाने के लिए आवश्यक सामग्री (Ingredients)
साबुत उड़द दाल (मां की दाल) – 1 कप
देसी घी या सरसों का तेल – 2–3 बड़े चम्मच
जीरा – ½ छोटा चम्मच
सूखी लाल मिर्च – 2–3
अदरक-लहसुन (पेस्ट या बारीक कटा) – 1 बड़ा चम्मच
हल्दी पाउडर – ½ छोटा चम्मच
धनिया पाउडर – ½ छोटा चम्मच
गरम मसाला – ¼ छोटा चम्मच
नमक – स्वादानुसार
हरा धनिया – गार्निश के लिए
मां की दाल बनाने की विधि (Step-by-Step Recipe)
दाल उबालना-साबुत उड़द दाल को अच्छी तरह धोकर रातभर पानी में भिगो दें। सुबह पानी निकालकर प्रेशर कुकर में दाल, थोड़ा नमक और पर्याप्त पानी डालकर उबालें। ध्यान रखें कि दाल पूरी तरह गले नहीं, दाने थोड़े खड़े रहें-यही तेली दाल की खास पहचान है।
तड़का तैयार करना-भारी तले की कढ़ाही में घी या तेल गरम करें। अब जीरा और सूखी लाल मिर्च डालें और चटकने दें।
मसाला भूनना-कढ़ाही में अदरक-लहसुन डालकर खुशबू आने तक भूनें। फिर हल्दी और धनिया पाउडर डालकर हल्का सा चलाएं, ताकि मसाले जलें नहीं।
दाल मिलाना-उबली हुई दाल कढ़ाही में डालें। स्वादानुसार नमक और गरम मसाला डालकर अच्छी तरह मिक्स करें।
धीमी आंच पर पकाना-अब दाल को धीमी आंच पर 4–5 मिनट पकाएं। बीच-बीच में चलाते रहें। जब दाल के ऊपर तेल साफ नजर आने लगे, तब समझिए दाल तैयार है।
परोसना-गैस बंद करें, ऊपर से हरा धनिया डालें और गरमागरम चावल के साथ परोसें।

विंटर स्पेशल क्यों है मां की दाल की तेली ?
साबुत उड़द दाल प्रोटीन और आयरन से भरपूर होती है,
देसी घी/तेल शरीर को अंदर से गर्म रखता है,
धीमी आंच पर पकी दाल पचने में आसान होती है,
ठंड में ऊर्जा और ताकत देने वाली पारंपरिक रेसिपी है मां कि दाल की तेली।
खास टिप्स-दाल को ज़्यादा न गलाएं, वरना तेली टेक्सचर नहीं आएगा । देसी घी इस्तेमाल करने से स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ जाते हैं। यह दाल अगले दिन और भी ज्यादा स्वादिष्ट लगती है।
निष्कर्ष (Conclusion)-मां की दाल की तेली सिर्फ एक रेसिपी नहीं, बल्कि पहाड़ी संस्कृति और सर्दियों की परंपरा का स्वाद है। सीमित मसालों, देसी घी और सही पकाने की तकनीक से बनी यह दाल ठंड के मौसम में शरीर और मन दोनों को तृप्त कर देती है। अगर आप इस विंटर सीजन में कुछ पारंपरिक, पौष्टिक और अलग स्वाद ट्राई करना चाहते हैं, तो हिमाचली धाम की यह खास डिश ज़रूर बनाएं और गरम चावल के साथ इसका आनंद लें।
