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Winter Energy Boosting Foods : सर्दियों की सेहत और ऊर्जा का पारंपरिक रहस्य

Winter Energy Boosting Foods : सर्दियों की सेहत और ऊर्जा का पारंपरिक रहस्य-सर्दियों की सेहत और ऊर्जा का पारंपरिक रहस्य-सर्दियों की कड़कड़ाती ठंड में शरीर को अंदर से गर्म रखने और ऊर्जा से भरपूर रखने के लिए हमारी दादी-नानी के पास एक अचूक नुस्खा हुआ करता था-आटा और गुड़ के लड्डू। यह सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि एक संपूर्ण पौष्टिक आहार है जो स्वाद के साथ-साथ सेहत का खजाना भी देता है। चलिए जानते हैं कि कैसे यह छोटा-सा लड्डू सर्दी में आपकी सेहत का साथी बन सकता है। आटा-गुड़ के लड्डू सर्दियों में शरीर को गर्म रखने, ऊर्जा बढ़ाने और इम्यूनिटी मजबूत करने का पारंपरिक देसी उपाय हैं। जानिए इसके फायदे और सेहत से जुड़ा रहस्य।

आटा-गुड़ के लड्डू के सेहत लाभ-ठंड में स्वास्थ्य का समाधान

शरीर को अंदर से गर्म रखें-आटा-गुड़ के ये लड्डू खासकर सर्दियों में सेहत लाभ-ठंड में स्वास्थ्य का समाधान के लिए राम बाण होते हैं। गुड़ और घी दोनों की तासीर गर्म होती है। इनका संयोजन शरीर के अंदरूनी तापमान को बनाए रखता है, जिससे ठंड का प्रभाव कम होता है और आप सर्दी में भी सक्रिय रहते हैं। आटे में कार्बोहाइड्रेट और मेवों में स्वस्थ वसा होती है, जो शरीर को तत्काल ऊर्जा प्रदान करती है। यह लड्डू खाने के बाद थकान दूर होती है और स्फूर्ति आती है।गोंद (यदि डाला जाए) और मेवों में कैल्शियम व फास्फोरस प्रचुर मात्रा में होते हैं। ये तत्व हड्डियों को मजबूती देते हैं और जोड़ों के दर्द व अकड़न में राहत प्रदान करते हैं।गेहूं के आटे और मेवों में मौजूद फाइबर पाचन क्रिया को सुचारु रखते हैं, जिससे कब्ज की समस्या दूर होती है और पेट स्वस्थ रहता है। सूखे मेवों और अन्य सामग्रियों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत बनाते हैं, जिससे सर्दी-जुकाम और संक्रमण से बचाव होता है। गुड़ आयरन का एक उत्कृष्ट प्राकृतिक स्रोत है। इसके नियमित सेवन से खून की कमी (एनीमिया) दूर होती है और शरीर में ऑक्सीजन का संचार बेहतर होता है। इसलिए सर्दी के मौसम में इन्हें ज़रूर बनाए और अपने साथ अपनी फॅमिली को नहीं दुरुस्त रखें तो आइए जाने इसकी सामग्री , मात्रा ओरबनाने की विधि भी।

लड्डू बनाने की सामग्री और प्राकृतिक गुणों का संगम

गेहूं का आटा-ऊर्जा और फाइबर का मुख्य स्रोत।
गुड़-प्राकृतिक मिठास, गर्म तासीर और आयरन से भरपूर।
देसी घी-ऊर्जा देने के साथ पाचन में सहायक।
सूखे मेवे-बादाम, काजू, पिस्ता,अखरोट-ये विटामिन, मिनरल और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होते हैं।
गोंद (वैकल्पिक)-हड्डियों को मजबूत करने और अतिरिक्त गर्माहट देने के लिए।
तिल और मूंगफली (वैकल्पिक)-कैल्शियम और प्रोटीन का अच्छा स्रोत।

आटा-गुड़ के लड्डू बनाने की सरल विधि

सबसे पहले एक कड़ाही में देसी घी गर्म करें। इसमें गेहूं का आटा डालकर धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए सुनहरा भूरा और खुशबूदार होने तक भूनें। फिर इसे एक बड़े बर्तन में निकालकर ठंडा होने दें। अब मेवों को हल्का भूनकर दरदरा पीस लें,यदि गोंद का उपयोग कर रहे हैं, तो उसे घी में फुलाकर तल लें और पीसकर बारीक कर लें। एक अलग पैन में गुड़ और थोड़ा शुद्ध घी डालकर मध्यम आंच पर पिघलाएं। गाढ़ी चाशनी बन जाने पर इसे एक तार तक आने पर आंच बंद कर दें। ध्यान रहे चाशनी जले नहीं। भुने हुए आटे, पिसे मेवों, गोंद को एक साथ मिला लें। अब इसमें गुनगुनी गुड़ की चाशनी धीरे-धीरे डालते हुए अच्छी तरह मिलाएं। जब मिश्रण हल्का गर्म रह जाए, तो तुरंत हाथों पर घी लगाकर मनचाहे आकार के लड्डू बांध लें। मिश्रण के पूरी तरह ठंडा होने पर लड्डू बांधना मुश्किल हो जाता है।

किसे खाना चाहिए और कितनी मात्रा में ?

आटा-गुड़ के लड्डू सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए फायदेमंद हैं-बच्चों के लिए ऊर्जा और पोषण का उत्तम स्रोत। युवाओं और वयस्कों के लिए थकान दूर करने वाला स्नैक है ये उन्हें ज़रूर खिलाएं गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए पोषक तत्वों से भरपूर। ये बुजुर्गों के लिए भी हड्डियों व जोड़ों के दर्द में राहत देने वाला इसलिए उन्हें भी नाश्ते के रूप में सुबह शाम दे सकते हैं। यह लड्डू ऊर्जा से भरपूर होते हैं,इसलिए संतुलित मात्रा में ही सेवन करें एक दिन में एक या दो लड्डू पर्याप्त हैं। अधिक मात्रा में सेवन से बचें।

निष्कर्ष-स्वाद और सेहत का पारंपरिक संगम-आटा-गुड़ के लड्डू सिर्फ एक पारंपरिक व्यंजन नहीं, बल्कि हमारी पुरानी पीढ़ी का स्वास्थ्य विज्ञान है। यह सर्दियों में शरीर को गर्म रखने, ऊर्जा देने और रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाने का एक स्वादिष्ट तरीका है। इसे बनाना आसान है और इसके फायदे अनेक। इस सर्दी, अपने आहार में इस पौष्टिक लड्डू को शामिल करें और प्राकृतिक रूप से स्वस्थ रहें। इसमें सावधानी ये बरतना ज़रूरी है की मधुमेह (डायबिटीज) के रोगी अपने चिकित्सक से परामर्श के बाद ही इसका सेवन करें, क्योंकि इसमें गुड़ की मात्रा अधिक होती है।






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