Aatm Manthan :कभी-कभी जीवन में धैर्य रखने की बहोत ज़रुरत होती है मगर हमें लगता है बस जब कर्म करो तब ही फल मिल जाए जबकि कर्म तो हमें करने ही होते है उसके बिना तो फल की आशा ही व्यर्थ है इसीलिए तो संत कबीरदास जी ने कहा है “धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय, माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय”
क्यों दिया है पौधे का उदाहरण :-
कोई भी फल पाने के लिए हमें धीरे -धीरे बहोत से प्रयत्न करने पड़ते हैं पर फल या परिणाम हमें समय आने पर ही मिलता है यहाँ हमें समझाने के लिए कबीरदास जी ने किसी फलदार पौधे का उदाहरण दिया हैं जिसे माली सौ घड़ा भी पानी एक दिन दे दे तो भी वो उसी दिन फल नहीं देने लगेगा बल्कि वो अपने समय पर ही बड़ा होगा और फल तो उसकी सही ऋतु आने पर ही मिलेंगें इसीलिए जीवन में धैर्य (Patience) रखना चाहिए , जल्दबाज़ी करने से कुछ नहीं होता, हर काम अपने सही समय पर ही होता है। मेहनत के साथ सब्र रखना ही बेहतर फल देता है।
दोहे का विस्तृत अर्थ क्या है :-
“धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय, माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय” इस दोहे के शाब्दिक अर्थ को समझें तो कबीरदास जी कहते हैं -हे मन! धैर्य रख, सब कुछ धीरे-धीरे अपनी गति से अपने समय पर ही होता है, जल्दबाज़ी मत कर क्योंकि कोई माली किसी पौधे को जल्दी बड़ा करने या फल पाने के लिए एक बार सौ घड़े पानी से भी सींच दे, तब भी फल तभी आएगा जब उसका सही समय आएगा वो वृक्ष बनेगा और अपने फल की ऋतु आने पर ही फल देगा।
सब्र का साथ क्यों न छोड़ें :-
तात्पर्य ये है कि जीवन में धैर्य और सही समय का बहुत महत्व है अगर हम धैर्य से काम नहीं लेंगें तो प्रयास नहीं कर पाएँगें और जिस दिन कोशिश करना छोड़ देंगें उसी दिन से सब बेकार हो जाएगा क्योंकि हर बात का वक़्त मुक़र्रर है बस वक़्त की ही क़ीमत होती है लेकिन हमारा वक़्त तब और क़ीमती हो जाता है जब उसे हम किसी मक़सद से जोड़ लेते हैं ऐसा वक़्त भी सबके पास नहीं होता जिसमें कोई मक़सद हो और वो मक़सद तभी पूरा होता है जब हम सब्र करते हैं उम्मीद बनाए रखते हैं।
निराशा से बचाते हैं प्रयास :-
प्रयास हमें हताशा से बचाकर आशावादी बनने के लिए भी प्रेरित करते हैं बिना फल प्राप्त करे भी हम ऊर्जावान बने रहते हैं और निरंतर प्रायसरत रहते हैं जो सफलता का सही मार्ग है और सही पूछिए तो हर चीज़ अपने सही वक़्त पर ही अच्छी लगती है ये प्रकृति का नियम भी है। तो जब भी आप थकने लगें तो कबीदास जी का ये दोहा ज़रूर याद करें ,ग़ौर ज़रूर करियेगा इन बातों पर फिर मिलेंगें आत्ममंथन की अगली कड़ी में धन्यवाद।

