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Union Budget February 1: बजट 1 फरवरी को ही क्यों पेश होता है? जानें कारण

Illustration of Union Budget 2026 with Indian flag, briefcase, and financial growth charts.

Why India Presents Union Budget on February 1st

भारतीय लोकतंत्र में Union Budget February 1 को पेश किया जाना अब एक स्थापित परंपरा बन चुका है। वित्त मंत्री हर साल इसी तारीख को देश का लेखा-जोखा सदन में रखते हैं। हालांकि, साल 2016 तक यह स्थिति ऐसी नहीं थी। पहले बजट फरवरी के अंतिम कार्य दिवस पर पेश होता था, लेकिन मोदी सरकार ने इस दशकों पुरानी औपनिवेशिक परंपरा को बदलकर एक नई व्यवस्था की शुरुआत की।

भारत का केंद्रीय बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक दिशा तय करने वाला सबसे बड़ा दस्तावेज है। सालों तक हम ब्रिटिश काल से चली आ रही परंपराओं का पालन करते रहे। लेकिन शासन व्यवस्था में सुधार और आर्थिक प्रक्रियाओं को गति देने के लिए बजट की तारीख और समय में बड़े बदलाव किए गए।

India Presents Union Budget on February 1st

बजट की तारीख बदलने का मुख्य कारण

साल 2017 से पहले तक, बजट फरवरी के आखिरी दिन पेश किया जाता था। इसका सबसे बड़ा नुकसान यह था कि 1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्त वर्ष के लिए नीतियों को लागू करने का समय बहुत कम मिलता था। संसद में बजट पर चर्चा और उसे पारित करने की प्रक्रिया में मई तक का समय लग जाता था।

इस देरी के कारण मानसून आने से पहले सरकारी योजनाओं के लिए फंड आवंटित करना और काम शुरू करना मुश्किल होता था। Union Budget February 1 को पेश करने का निर्णय इसीलिए लिया गया ताकि वित्तीय वर्ष शुरू होने से पहले ही सारी विधायी प्रक्रियाएं पूरी हो जाएं और 1 अप्रैल से काम धरातल पर दिखने लगे।

समय में बदलाव: शाम 5 बजे से सुबह 11 बजे तक

बजट के इतिहास में केवल तारीख ही नहीं, बल्कि समय का भी अपना एक रोचक सफर रहा है। 1999 तक बजट शाम 5 बजे पेश किया जाता था। यह परंपरा भी अंग्रेजों के समय से थी, क्योंकि जब भारत में शाम के 5 बजते थे, तब लंदन में सुबह होती थी और ब्रिटिश अधिकारी इसे आसानी से सुन सकते थे।

अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने इस परंपरा को तोड़ा। उन्होंने बजट पेश करने का समय सुबह 11 बजे तय किया। इसका उद्देश्य मीडिया को विश्लेषण के लिए अधिक समय देना और आम जनता तक बजट की बारीकियों को बेहतर ढंग से पहुँचाना था।

बजट पेश करने की तारीख पर क्यों हुआ विवाद?

जब सरकार ने बजट को फरवरी के अंत से हटाकर 1 फरवरी को करने का फैसला लिया, तो इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में काफी हंगामा हुआ। 2017 में कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले थे। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सरकार बजट के जरिए लोकलुभावन घोषणाएं कर मतदाताओं को प्रभावित कर सकती है।

यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा। हालांकि, शीर्ष अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि केंद्रीय बजट पूरे देश का मामला है। अदालत का मानना था कि राज्यों के चुनावों की वजह से केंद्र के कामकाज और देश की आर्थिक प्रगति की प्रक्रियाओं को नहीं रोका जा सकता।

Union Budget on February 1st

बजट सत्र और इसकी तैयारी

बजट पेश करने से पहले ‘हलवा सेरेमनी’ जैसी रस्में निभाई जाती हैं, जो बजट की गोपनीयता और इसकी महत्ता को दर्शाती हैं। अब बजट पूरी तरह से डिजिटल (Paperless Budget) हो चुका है, जिससे इसकी पहुंच और पारदर्शिता और भी बढ़ गई है। समय पर बजट आने से कॉर्पोरेट सेक्टर और टैक्सपेयर्स को भी अपने निवेश की योजना बनाने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है।

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