Aatm Manthan :समय बड़ा बलवान है और इसके खेल भी निराले हैं , इसके आगे बड़े -बड़े धुरंधरों को भी हथियार डालने पड़ते हैं इसलिए समय की चाल को पहचानकर दाँव खेलना चाहिए ताकि हम जीवन के खेल में बने रहे और आउट होने से बच जाएँ। समय किसी को नहीं बक्शता ये अच्छे -बुरे दोनों दिन सबको दिखाता है ,तो थोड़ा डर के रहना ही उचित है अच्छे दिन पर घमंड करना भी बेकार है और बुरे दिनों पर ज़्यादा दुख करना भी।
बुरे दिनों पर संत रहीमदास जी ने भी कहा है कि समय परे ओछे बचन, सब के सहै रहीम।
सभा दुसासन पट गहे, गदा लिए रहे भीम॥
यानी जब समय खराब या आपके विपरीत चल रहा हो तो सामर्थ्यवान इंसान को भी ओछे वचन सुनने पड़ते हैं या बेइज़्ज़त होना पड़ता है क्योंकि ये समय का ही खेल था कि गदाधारी बलवान भीम के सामने दुश्शासन द्रोपदी का चीर हरण कर रहा था और भीम हाँथ में गदा होते हुए भी नीची आँख किए बैठे रहे ,अपमानित होते रहे।
जब समय विपत्ति लाता है, तो समर्थ और बलवान व्यक्ति को भी मजबूरन ओछे या बुरी सोच वाले लोगों के कटु वचन सहन करने पड़ते हैं क्योंकि हर व्यक्ति हर क्षेत्र में इतना सक्षम नहीं हो सकता कि वो अपनी मुश्किलें खुद ही सुलझाले ,कभी तो ऐसा होता ही है की समय उसे मात दे देता है और उसे उन लोगों की भी बातें सुननी पड़ती हैं जिनसे वो अधिक श्रेष्ठ हैं सक्षम है।
इसलिए जब समय खराब हो तो धैर्य से काम लेना चाहिए, सोच समझ कर क़दम उठाना चाहिए और समय के अनुकूल व्यवहार करना चाहिए क्योंकि यही उचित है अगर हमने इस समय धैर्य से काम नहीं लिया तो हम समय को कभी अपने अनुकूल नहीं कर पाएँगें ,ये विश्वास नहीं कर पाएँगें कि जल्द वक़्त बदलेगा और हमारा समय भी आएगा। ग़ौर ज़रूर करियेगा इस बात पर फिर मिलेंगे आत्म मंथन की अगली कड़ी में ,धन्यवाद।

