अप्रैल फूल्स डे। 1 अप्रैल को मूर्ख दिवस के रूप में मनाया जाता है। मुख्य रूप से हंसी-मजाक, शरारत करने और लोगों को बेवकूफ बनाने के लिए यह डे मनाया जाता है। इसका सबसे प्रमुख कारण 16वीं शताब्दी में फ्रांस द्वारा कैलेंडर परिवर्तन (जूलियन से ग्रेगोरियन) माना जाता है, जिसके बाद नए साल (1 अप्रैल) को पुरानी परंपरा के अनुसार मनाने वालों का मजाक उड़ाया जाता था।
पश्चिमी देशों में बना यह वार्षिक रिवाज
अप्रैल फूल दिवस या अप्रैल फूल्स डे कई पश्चिमी देशों में 1 अप्रैल को मनाया जाने वाला एक वार्षिक रिवाज है, जिसमें मज़ाक, शरारतें और चुटकुले शामिल होते हैं। मज़ाक करने वाले अक्सर “अप्रैल फूल!“ चिल्लाकर अपने कारनामों का खुलासा करते हैं। इन शरारतों में जनसंचार माध्यम भी शामिल हो सकते हैं, जिनका खुलासा अगले दिन हो सकता है। अपने पड़ोसी पर हानिरहित शरारतें करने के लिए एक दिन निर्धारित करने की प्रथा ऐतिहासिक रूप से दुनिया भर में अपेक्षाकृत आम रही है
मूर्ख दिवस से जुड़ी मुख्य बातेंः
ऐतिहासिक कारण- 1564 में फ्रांस के राजा चार्ल्स प्ग् ने नया साल 1 जनवरी से मनाने का आदेश दिया। जो लोग पुराने कैलेंडर के अनुसार 1 अप्रैल के आसपास नया साल मनाते रहे, उन्हें “अप्रैल फूल“ (मूर्ख) कहा जाने लगा।
अन्य मान्यताएंः कुछ मान्यताएं मध्यकालीन यूरोप की हैं, जहां 1 अप्रैल को ’फीस्ट ऑफ फूल’ (मूर्खों का त्योहार) मनाया जाता था। एक अन्य कथा इंग्लैंड के ’गोथम’ गांव के निवासियों द्वारा राजा को बेवकूफ बनाने से जुड़ी है।
उद्देश्यः इस दिन का एकमात्र उद्देश्य हंसी-मजाक करना और तनाव कम करना है।
लोकप्रियताः यह परंपरा फ्रांस से शुरू होकर पूरे यूरोप और फिर दुनिया भर में फैल गई।
