Asthma एक ऐसी बीमारी है जो किसी भी उम्र में हो सकती है लेकिन महिलाओं में इसका असर कई बार पुरुषों की तुलना में ज्यादा गंभीर होता है। इसके पीछे सिर्फ शारीरिक कारण ही नहीं होते बल्कि कुछ हार्मोनल बदलाव और समय पर इलाज की कमी आदि भी होते हैं। हाल ही में इस विषय पर हुई चर्चा में महिलाओं की अस्थमा देखभाल से जुड़ी कई जरूरी सवाल पर ध्यान रखा गया है।
आखिर महिलाओं में Asthma का असर ज्यादा क्यों होता है?
डॉक्टर के अनुसार बचपन में अस्थमा लड़कों में ज्यादा होता है लेकिन किशोर अवस्था होने के बाद महिलाओं में इसके मामले ज्यादातर देखने को मिलते हैं। इसका मुख्य कारण शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव को बोला जाता है मासिक धर्म गर्भावस्था और रजवानीवृद्धि के दौरान हार्मोन बदलाव होने से कई महिलाओं में सांस लेने की परेशानी और अस्थमा के लक्षण ज्यादा बढ़ते देखे जा सकते हैं इसलिए हर महिला में बीमारी का असर एक जैसा नहीं होता है।
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हार्मोन और शरीर में होने वाले बदलाव की भी भूमिका
डॉक्टर बताते हैं कि एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रॉन जैसे हार्मोन फेफड़ों की बायो मार्ग में होने वाली सूजन को प्रभावित कर सकते हैं यही कारण है कि कुछ महिलाओं को पीरियड शुरू होने से पहले या गर्भावस्था के दौरान अस्थमा ज्यादा परेशान करता है। ऐसे मामलों में डॉक्टर मरीज की उम्र हारमोंस स्थिति और हेल्थ को ध्यान में रखकर ही इलाज करते हैं।
Asthma के इलाज में महिलाओं की चुनौति
भारत में कई सारी महिलाएं अपनी सेहत को प्राथमिकता नहीं दे पाती हैं अपने परिवार की जिम्मेदारी आर्थिक दिक्कत जागरूकता की कमी के कारण में समय पर डॉक्टर के पास नहीं पहुंचतीहै। ग्रामीण क्षेत्रों में फेफड़ों की जांच और विशेषज्ञ डॉक्टर की उपलब्धता भी सीमित हो बताई जाती है जिससे बीमारी की पहचान और इलाज में देरी हो जाती है।
इसका सही इलाज और जागरूकता क्यों जरूरी है?
डॉक्टर के मुताबिक अस्थमा को केवल दवा से ही नहीं बल्कि सही जानकारी और नियमित देखभाल से भी नियंत्रित किया जा सकता है। इनहेलर का सही तरीके से उपयोग करना डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाइयां लेना और नियमित जांच करना बहुत जरूरी होता है। केवल इतना ही नहीं इसके साथ-साथ धूल धुएं एवं एलर्जी पैदा करने वाले चीजों से बचाव भी जरूरी होता है।
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इसपर विशेषज्ञों की क्या सलाह है?
डॉक्टर ऐसा मानते हैं कि महिलाओं के लिए एक जैसा इलाज हर स्थिति में कारगर नहीं होता इसलिए इलाज के दौरान हार्मोनल बदलाव गर्भावस्था वजन मानसिक तनाव और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का भी ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है। इससे बीमारी को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने में मदद मिलती है और मरीज की जीवन की गुणवत्ता में भी सुधारआता है।

