The Importance Of The Courtyard: घर का वो हिस्सा जो सबसे प्यारा होता है वो आँगन ही होता है घर वाले आँगन में बैठकर कभी धूप सेकते हैं तो कभी ठंडी हवा का आनंद लेते हैं, वहीं दरबार होती है वहीं खाना-नाश्ता और बच्चों के खेल खिलवाड़ भी पर जैसे -जैसे ज़मीन महँगी हुई आँगन का चलन कम हो गया इसका असर हमारी लाइफ स्टाइल पर भी पड़ा है, अब हम बालकनी में भी सुकून के दो पल अपनों के साथ बिता लें तो बड़ी बात है पहले जहाँ पूरे दिन भर के रसोई के काम आँगन में ही समेटे जाते थे वो अब छोटे से किचेन में ब- मुश्किल सिमटते हैं, न वो पहले वाला खान पान रहा न वो मज़ा ,जब आँगन में बैठकर आस पड़ोस की चाचियाँ -भाभियाँ एक दूसरे के काम -काज हँसी मज़ाक करते-करते समेटवा देती थीं यहाँ तक कि तीज त्यौहार ,शादी ब्याह सबके रंग आँगन में ही बिखरते थे ,अब तो बच्चे भी बाहर खेलने की जगह ढूढ़ते हैं घर में कहाँ खेल पाते हैं वो पर पहले ये सब घर में संभव था क्योंकि हर घर में बड़े-बड़े आँगन हुआ करते थे।
कौन सा आँगन होता है सबसे अच्छा :-
आँगन वो है जो चारों ओर से घर की दीवारों से घिरा हो किसी बाहर वाले की दखल बिना हमारी इजाज़त मुमकिन न हो उसमें इसलिए अक्सर आँगन घर के बीच में ही बनाया जाता है। वैसे तो लोग आँगन के लिए घर के सामने और पीछे भी जगह छोड़ते हैं पर जो मज़ा घर के बीच वाले आँगन में होता है वो घर के आगे या पीछे वाले आँगन में नहीं होता।
घर में आँगन क्यों है ज़रूरी :-
घर में आँगन (courtyard) इसलिए ज़रूरी है क्योंकि ये घर में प्राकृतिक रोशनी और ताज़ी हवा लाता है, और घर को ठंडा रखने में मदद करता है, जिससे घर-परिवार का स्वास्थ्य और सामंजस्य बेहतर होता है। वास्तु शास्त्र की मानें तो घर के बीचों-बीच का आँगन सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करता है इसके हिसाब से मकान में देहरी और आँगन दोनों होने चाहिए क्योंकि एक तरफ जहाँ आँगन के इतने फायदे हैं वहीं देहरी पर पैर रखे बिना घर में प्रवेश नहीं किया जा सकता इसलिए ये घर बाहर की एक सीमा रेखा की तरह काम करती है। घर के पुराने नक़्शे की बात करें तो पहले आँगन से लगा हुआ एक कमरा होता था जिसमें घर का मेन गेट होता था और उसके बगल से ही मेहमान ख़ाना (Guest Room) बना होता था। जिससे मेहमान बस उसी कमरे और गैलरी तक सीमित रहते, घर के आँगन तक नहीं आते थे यानी एक दायरा या प्राइवेसी बनीं रहती थी।
आँगन के फायदे :-
तंग गलियों और इमारतों के बीच भी अगर घर में, आँगन है तो घर के हर कोने तक सूरज की रोशनी और ताज़ी हवा पहुँचाती है, जिससे घर हवादार और रोशन रहता है। प्राकृतिक उजाला और हवा की वजह से बिजली की कम खपत होती है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार, आँगन घर का केंद्र या ब्रह्मस्थान होता है, जो सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह के लिए महत्वपूर्ण है। इसे खुला रखने से घर में सुख-शांति आती है।
गर्म मौसम में, आँगन घर को ठंडा रखने में मदद करता है क्योंकि खुले आँगन से ताज़ी हवा कमरों में जाती है और गर्म हवा हल्की होने से आँगन से होकर ऊपर उड़ जाती है और आरामदायक वातावरण बनता है यानी आँगन हमारे घर के तापमान को नियंत्रित करता है।
आँगन में पेड़-पौधे लगे हों तो घर के अंदर का तापमान 4 डिग्री सेल्सियस तक कम हो सकता है, जिससे गर्मी में राहत मिलती है।
आँगन एक सुकून की जगह है जहाँ न केवल आराम से बैठ सकते हैं बल्कि बाग़वानी और व्यायाम भी कर सकते हैं यहाँ तक कि पुराणों में भी तुलसी के पौधे (basil plant) को भी आँगन में ही लगाने को कहा गया है जिससे माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहे और वास्तुदोष दूर हो।
वास्तु के हिसाब से मकान में देहरी और आँगन दोनों का अपना महत्व है, वास्तु शास्त्र कहता है कि घर में दोनों होने चाहिए ,आँगन न सिर्फ इसलिए ज़रूरी है कि हवा और धूप आ सके, बल्कि ये धन और सौभाग्य दोनों को बढ़ाता है ,वास्तु के हिसाब से मकान में देहरी और आँगन दोनों होने चाहिए, कहावत है कि घर की इज़्ज़त देहरी से बाहर नहीं जानी चाहिए, पहले देहरी घर में आवश्यक निर्माण था, जो घर और बाहर के बीच विभाजक के रूप में कार्य करता था. देहरी पर पैर रखे बिना घर में प्रवेश करना सम्भव नहीं था लेकिन आजकल मकानों में देहरी और आँगन दोनों ही नहीं होते।
आजकल क्यों कम हो गए आँगन :-
जहाँ एक तरफ जगह की कमी हो गई है तो दूसरी तरफ शहरों में महंगाई और फ्लैट संस्कृति के तहत बहुमंज़िला इमारतें तो खड़ी हो गई हैं लेकिन बीच के आँगन ग़ायब हो गए हैं हालाँकि इनमें बीच के आँगन की योजना बनाना थोड़ा मुश्किल भी हो जाता है जिसकी वजह से बीच में वेंटिलेशन के लिए अक्सर जाली रखी जाती है और मंज़िले बनती जाती हैं पर खुला आँगन पहली मंज़िल पर ही बनाया जाता है उतनी जगह खाली ही रखनी पड़ती है भले ही चारो तरह कई मंज़िलें उठ जाएँ लेकिन आप चाहें तो आँगन बनवा सकते हैं क्योंकि ये सिर्फ एक खाली जगह नहीं, बल्कि घर का दिल होता है जो घर को जीवंत, स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखता है।
लॉबी या लाउंज क्या आँगन की जगह ले सकते हैं :-
आँगन के स्थान पर फ्लैट्स में लॉबी या लाउंज बनाए जाते हैं लेकिन हम इनकी बराबरी उस आँगन से नहीं कर सकते जिसमें रसोई का भी दरवाज़ा खुलता है- शयनकक्ष का भी और स्नान घर का भी यहाँ आकर ठंडियों में सीधी धूप मिलती है तो गर्मियों में ठंडी हवा, जिसमें खुले आँगन के चारो तरफ ओसारी हुआ करती है जो खुले आँगन की धूप से बचाकर सिर्फ ठंडी हवा देती है।
कैसी हो आँगन की सतह :-
पहले ज़माना में आँगन की सुंदरता उसकी चिकनाहट बहोत मायने रखती थी इसीलिए इसे रंगोली बना कर सजाया भी जाता था शायद जिसका जितना सुन्दर आँगन उसकी उतनी सुन्दर गृहणी की कल्पना की जाती थी इसकी सतह का भी बहोत ख्याल रखा जाता है, आँगन ऐसा रखा जाता है कि इसमें बारिश का पानी भी न रुके इसलिए बीच में नीचा और चारों ओर से ऊँचा आँगन ठीक नहीं माना जाता परंतु बीच में ऊँचा हो और चारों ओर से नीचा हो तो ऐसा आँगन शुभ माना जाता है,कच्चे आँगन का इतना महत्व है कि लीपने पोतने की झंझट से जहाँ आँगन पक्का भी कराया जाता है, वहाँ भी विवाह मण्डप जैसे संस्कारों के लिए थोड़ा सा स्थान कच्चा छोड़ दिया जाता है।

