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क्यों कहते हैं -एकै साधे सब सधै, सब साधै सब जाय।

sadho (1)

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Aatm Manthan : करना तो बहोत कुछ चाहते हैं पर जाने क्यों एक काम करते हैं फिर वो ख़ास नहीं भाता तो उसे छोड़कर या उसके साथ ही दूसरा शुरू कर देते हैं और इसी तरह दो या तीन नाव में सवार हो जाते हैं शायद ये समय की माँग भी है कि हम बेहतर से बेहतर अपने लिए तलाश करें और समय का सदुपयोग करें पर क्या ये सही नहीं कि हम पहले जो कर रहे हैं उसे ही पूरा दिल लगाकर करने की कोशिश करें ये सोचकर कि शायद कहीं कोई कसर रह गई हो इसलिए हमें तरक्की नहीं मिल रही हो।

रहीमदास जी ने इस बारे में कहा भी है कि – एकै साधे सब सधै, सब साधै सब जाय।
रहिमन मूलहिं सींचिबो, फूलै फलै अघाय॥

अर्थात जिस तरह एक पौधे की जड़ को अच्छी तरह सींचने से उसका तना, शाख़ाएँ, पत्ते, फल-फूल सब हरे-भरे रहते हैं और हमें उचित फल देते हैं ,उसी प्रकार जब हम किसी एक काम को पूरा मन लगा कर उसके हर पहलू पर ग़ौर करते हुए पूरा करने के बाद ही किसी और काम की ओर ध्यान देते हैं तो ही हम सफलता के शिखर पर पहुँच पाते हैं क्योंकि बहोत से काम एक साथ शुरू करने से हमारा ध्यान बँट जाता है और कोई भी काम ढंग से नहीं हो पाता फिर सब काम अधूरे ही छूट जाते हैं इसलिए एक वक़्त पर एक ही काम में मन लगाकर उसे अंजाम तक पहुँचाना चाहिए।

 इस दोहे में एक ही काम से तात्पर्य जीवन के उस मुख्य लक्ष्य से है जिसकी तुलना किसी पौधे की जड़ से की जा सकती है और बस उसी एक लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने से हम जीवन के और छोटे-छोटे उद्देश्यों की भी पूर्ती कर सकते हैं। जिस प्रकार जड़ को पानी देने से पौधा मोटा हो जाता है पेड़ बन जाता है ,शाखाएँ फल फूल सब आने लगते हैं उसी तरह जीवन में किसी एक काम को लक्ष्य मानकर पूरा करने से और कार्य अपने आप ही सिद्ध हो जाते हैं लेकिन वहीं अगर इन छोटे- छोटे कार्यों में उलझ कर बड़ा काम या मुख्य कार्य अधूरा छोड़ दिया जाए तो हमारे सभी काम अधूरे ही रह जाते हैं।

इसलिए कहा गया है कि एकै साधे सब सधै सब साधै सब जाय।
रहिमन मूलहिं सींचिबो, फूलै फलै अघाय॥ मतलब एक ही मुख्य लक्ष्य की प्राप्ति से सारे काम पूरे हो जाते हैं वहीं अगर कई कामों को एक साथ हम करने में लग जाते हैं तो एक भी काम सही तरीके से नहीं हो पाता। इसलिए किसी भी काम के लिए उसकी नींव को मज़बूत करना चाहिए जैसे पौधे की जड़ को सींचने से फल फूल मिलते हैं उसी तरह किसी विशेष लक्ष्य की प्राप्ति के बाद हमें संतोष और सफलता का सुख मिलता है। इसीलिए जीवन में मुख्य उद्देश्य की प्राप्ति के लिए एकाग्रता (focus), प्राथमिकता (priority) और धैर्य यानी (Patience ) को स्थान देना चाहिए। ग़ौर ज़रूर करियेगा इस बात पर फिर मिलेंगें आत्म-मंथन की अगली कड़ी में धन्यवाद।

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