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Health Insurance के बाबजूद, इलाज क्यों नहीं? जाने सिस्टम की सच्चाई…

Health Insurance: हमारे भारत में हेल्थ इंश्योरेंस का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है लेकिन इसके बावजूद मरीजों को अस्पताल में समय पर इलाज मिलना अभी भी चुनौती बना हुआ है। हाल ही में प्रकाशित The Hindu के आर्टिकल में यह सवाल उठाया गया था कि बीमा होने के बाद भी लोगों को हेल्थ रिलेटेड सेवाओं से वंचित होना क्यों पड़ता है?

अस्पतालों द्वारा इलाज से इनकार एक बड़ी समस्या है?

Health Insurance होने के बावजूद कई सारे प्राइवेट हॉस्पिटल मरीजों को भर्ती करने से बचते हैं जिसका मुख्य कारण बीमा कंपनियां या फिर सरकारी योजनाओं से मिलने वाली कम दर और भुगतान में देरी को बताया जाता है। ऐसे में हॉस्पिटल उन मरीजों को प्राथमिकता देता है जो सीधे भुगतान करके पेमेंट करते हैं।

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क्लेम प्रक्रिया बनी सबसे बड़ी बाधा

हेल्थ इंश्योरेंस के बीमा के अनुसार कैशलेस इलाज की सुविधा होने के बावजूद इसका प्रोसेस अक्सर जटिल होता है। प्रीऑथराइजेशन में देरी होना कागजी औपचारिकताएं और तकनीकी खामियां होना मरीजों के इलाज में रुकावट बनती है। इमरजेंसी के समय यह देरी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है।

सीमित कवरेज से बढ़ता है खर्च

अधिकांश हेल्थ इंश्योरेंस योजनाएं केवल हॉस्पिटल में भर्ती होने के खर्च को ही कवर करती है।OPD सेवाएं, दवाइयां और जांच जैसी जरूरी चीजें अक्सर इसमें शामिल नहीं किया जाता है जिसके कारण मरीज को इलाज का बड़ा हिस्सा अपनी जेब से देना पड़ता है।

निजी क्षेत्र पर निर्भरता बढ़ी हुई है

हमारे भारत में स्वास्थ्य सेवाओं का सबसे बड़ा हिस्सा प्राइवेट क्षेत्र में देखा जाता है यह संस्थान लाभ आधारित मॉडल पर काम करते हैं जिससे बीमा मरीजों को कम प्राथमिकता मिलती है। यही कारण है कि बीमा कवरेज होने के बावजूद सामान हेल्थ फैसेलिटीज सभी तक नहीं मिल पाती।

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क्या है इसके समाधान के लिए जरूरी कदम

डॉक्टर के अनुसार केवल Health Insurance का विस्तार करना जरूरी नहीं होता है इसके साथ ही सरकारी अस्पतालों को मजबूत करना प्राइवेट हॉस्पिटल पर निगरानी बढ़ाना और भुगतान प्रणाली को स्पष्ट बनाना जरूरी है तभी लोगों को सामान हेल्थ फैसिलिटी मिल पाएगी। साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश बढ़ाना भी अहम कदम है।

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