Who Will be Bihar CM: करीब 19 साल तक और पिछले 11 सालों से लगातार अलग अलग पार्टियों के साथ गठबंधन कर 10 बार बिहार के मुख्य मंत्री की शपथ लेने वाले नितीश कुमार (Nitish Kumar) अंततः सीएम पद छोड़ने का फैसला ले चुके हैं. नितीश कुमार ने सीएम पद छोड़ राज्यसभा (Nitish Kumar Rajya Sabha Election) जाने का फैसला लिया है. इस निर्णय को बिहार में नीतीश युग का अंत माना जा रहा है जबकि नितीश कुमार 75 की उम्र में राजनीति की नई पारी खेलने जा रहे हैं.
पिछले कई दिनों से यह चर्चा थी कि नितीश कुमार को राज्यसभा भेजा जाएगा, इस सिलसिले में कई बैठकें भी हुईं मगर नितीश की पार्टी के लोग इस बात को नकारते रहे। मगर गुरुवार, 5 मार्च को सीएम नितीश ने X पर पोस्ट करके राज्यसभा सांसद बनने की इच्छा जाता दी.
नितीश कुमार ने पोस्ट कर लिखा- संसदीय जीवन शुरू करने के समय से ही मेरे मन में एक इच्छा थी कि मैं बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों के साथ संसद के भी दोनों सदनों का सदस्य बनूँ। इसी क्रम में इस बार हो रहे चुनाव में राज्यसभा का सदस्य बनना चाह रहा हूँ। जो नई सरकार बनेगी उसको मेरा पूरा सहयोग एवं मार्गदर्शन रहेगा।
हालांकि नितीश कुमार के चाहने वाले उनके इस फैसले के खिलाफ दिखाई दे रहे हैं. कार्यकर्ताओं में नाराजगी है, लोग कह रहे हैं कि नितीश कुमार के खिलाफ साजिश हुई है. इधर कांग्रेस और RJD के लोग भी यह दावा कर रहे हैं कि BJP नितीश कुमार को जबरन राज्यसभा भेज रही है, नितीश कुमार बीजेपी की कठपुतली बन गए हैं.
देखा जाए तो नितीश कुमार का बिहार के मुख्य मंत्री पद को छोड़ना ताज्जुब की बात तो है ही. क्योंकी नितीश कुमार को अगर सीएम पद नई सरकार बनने के बाद इतना जल्दी ही छोड़ना होता तो वे 20 नवंबर 2025 को 10वीं बार सीएम पद की शपथ न लेते। राजनीतिक गलियारों में उस वक़्त ऐसी चर्चा थी कि गृहमंत्री अमित शाह नहीं चाहते थे कि नितीश सीएम बनें तब बीजेपी ने नितीश कुमार को यह ऑफर दिया था कि वे अपनी जगह अपनी पसंद के किसी नेता को चुन लें जब नितीश कुमार ने इस ऑफर को ठुकरा दिया था. और जब JDU की तरफ से यह मांग की जा रही है कि बिहार का सीएम नितीश कुमार की पसंद का हो.
कौन बनेगा बिहार का नया मुख्य मंत्री
सम्राट चौधरी
इस लिस्ट में सबसे पहला नाम आता है बीजेपी नेता और बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी का, जिनके पास सीएम बनने के सभी गुण भी हैं और एक ड्राबैक भी है. कोइरी समाज से आने वाले सम्राट चौधरी के पास सरकार से लेकर संगठन चलाने तक का अनुभव है. वे राबड़ी सरकार में भी सबसे कम उम्र के मंत्री बने और मौजूद नितीश सरकार में दो बार डिप्टी सीएम और उससे पहले नितीश कुमार की सरकार में एक बार मंत्री भी बनें, वे नितीश की सरकार में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका भी निभा चुके हैं इसके अलावा पार्टी में सचिव, उपाध्यक्ष से लेकर प्रदेश के अध्यक्ष की भूमिका भी निभा चुके हैं। बस उनके साथ ड्राबैक ये है कि वे बीजेपी से पहले RJD और फिर JDU में भी थे, ऐसे में बीजेपी में कई लोग आज भी उनका विरोध करते हैं।
जय सिन्हा
दूसरे नंबर पर आते हैं डिप्टी सीएम विजय सिन्हा। जिन्हे संघ का भरोसेमंद नेता माना जाता है, वे संघ से ही बीजेपी में आए और पीएम मोदी और शाह के करीबी माने जाते हैं वे 2010 से लगातार लखीसराय विधानसभा से जीतते आए हैं वे नीतीश सरकार में मंत्री से लेकर स्पीकर की भूमिका निभा चुके हैं, वे नितीश के बीजेपी छोड़ने का बाद नेता प्रतिपक्ष भी रहे और नितीश सरकार में दो बार डिप्टी सीएम भी. विजय सिन्हा के साथ ड्राबैक यह है कि वे भूमिहार समाज से आते हैं जिसकी आबादी बिहार में 3 फीसदी से भी कम है और बिहार में पिछले 35 सालों से पिछड़ी जाती की राजनीति काबिज रही है. अब बीजेपी विजय सिन्हा के साथ रिस्क लेती है या नहीं कुछ भी कहना मुश्किल है.
विजय चौधरी
इधर नितीश कुमार अपने भरोसेमंद हनुमान विजय चौधरी को आगे ला सकते हैं. जिन्हे बिहार में नितीश कुमार 2 कहा जाता है. उन्हें नितीश कुमार का हनुमान भी कहा जाता है क्योंकी जहां नितीश दिखाई देते हैं वहां हनुमान विजय चौधरी भी नज़र आते हैं. विजय चौधरी विवादों से दूर रहते हैं। वे सरकार की पॉलिसियों और रणनीतियों को बनाने वाली ‘कोर कमेटी’ के अहम सदस्य हैं. वित्त, शिक्षा, ग्रामीण कार्य और जल संसाधन जैसे कई अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इसके अलावा विधानसभा में स्पीकर भी रह चुके हैं।
निशांत कुमार
अंत में नाम आता है नितीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का, वे 2025 से पहले तक खुद को पॉलिटिक्स से अलग ही रखते आए हैं. नीतीश कुमार के अलग होने के बाद जाति और पार्टी के बीच कॉम्बिनेशन स्थापित करने के लिए ऐसे नेता की जरूरत है. इसमें निशांत कुमार पूरी तरह फिट बैठते हैं।
26 साल पुरानी बीजेपी की गलती
उम्मीद कम ही है कि बिहार में इस बार JDU से कोई सीएम बने क्योंकी बीजेपी 26 साल पुरानी गलती को दोहराना नहीं चाहेगी। साल 2000 में बिहार विधानसभा के चुनाव में बीजेपी को 67 सीटें मिली थीं जबकि नितीश कुमार की पार्टी को महज 34, इसके बावजूद बीजेपी ने नितीश को अपना नेता माना और वे पहली बार बिहार के सीएम बने मगर उनकी सरकार सिर्फ 7 दिन चली, फ्लोर टेस्ट में लालू यादव ने नितीश कुमार को पटखनी देदी। तब से बीजेपी बिहार में नितीश कुमार की पिछलग्गू बनी रह गई।
2020 के चुनाव में बीजेपी को 74 तो JDU को 43 सीटें मिली तब भी बीजेपी ने नितीश कुमार को सीएम बनाया और इस बीच नितीश ने पलटी मारकर RJD के साथ गठबंधन कर लिया हालांकि बाद में वे फिर NDA के साथ जुड़ गए. 2025 में भी बीजेपी को RJD से ज्यादा सीटें मिली फिर भी नितीश ही सीएम बनें। लेकिन अब बीजेपी बिहार में नया नितीश कुमार नहीं बनने देना चाहेगी, ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि जो भी सीएम होगा वो बीजेपी से ही होगा भले दोनों डिप्टी सीएम JDU के हों.
