यूपी। उत्तर-प्रदेश में इन दिनों सरकार और संत के बीच जो कुछ जुबानी जंग चल रही है, उसमें कालेनमि की सबसे ज्यादा बात की जा रही है। यही वजह है कि कालेनमि अब ट्रेड में आ गया है। आखिर यह कालेनमि कौन है, जिसका जिक्र उत्तर-प्रदेश के मुख्यमत्री आदित्यनाथ ने किया और अब कालेनमि का जिक्र स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद कर रहे है।
बोले सीएम योगी
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने बिना किसी का नाम लिए कहा है कि एक संत के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ भी नहीं होता. उसकी कोई संपत्ति नहीं होती, धर्म ही उसकी संपत्ति और राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान होता है. जब कोई धर्म के विरुद्ध आचरण करता है तो समझना चाहिए कि ऐसे बहुत से कालनेमि हैं, जो धर्म की आड़ में सनातन को कमजोर कर रहे हैं. ऐसे लोगों से सतर्क रहना होगा. उनकी पहचानकर मुकाबला करना होगा।
बोले अविमुक्तेश्वरानंद
सीएम योगी का यह बयान आने के बाद माघ मेले में अनशन करने वाले अविमुक्तेश्वरानंद का भी बयान सामने आ रहा है। उन्होने कहा कि चोला तो साधु का और गौ हत्या हो रही है। अब बताए कालनेमि कौन!
ऐसे शुरू हुआ मामला
दरअसल 18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या पर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेले के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी को संगम तट तक नहीं जाने दिया गया था. मेला प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा वजहों से उस क्षेत्र में पैदल जाने की अनुमति दी थी. पालकी रोके जाने से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद काफी नाराज हैं और वे धरने पर बैठे हुए हैं।
कौन था कालनेमि
कलयुग हो या फिर त्रेतायुग और अब इस युग में भी कालनेमि का जिक्र होना इस बात पर चर्चा हो रही है कि आखिर यह कालनेमि कौन था। जो कि उत्तर-प्रदेश के सरकार और संत की जुबान पर छाया हुआ है। जो तथ्य मिलते है उसके तहत रामायण काल यानि त्रेतायुग में कालनेमि को रावण का ममेरा भाई माना जाता है. कालनेमि मायावी राक्षस मारीच का बेटा था, मारीच रावण का मामा लगता था. कालनेमि ने हनुमान जी को छलने और उनको मारने के लिए साधु का रूप धारण किया था।

