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Who is Kakoli Ghosh? : ममता की पार्टी से निकाल ले गई TMC के 20 सांसद, जानिए कौन है काकोली?

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Who is Kakoli Ghosh? : तृणमूल कांग्रेस (TMC) की वरिष्ठ नेता और सांसद काकोली घोष दस्तीदार इन दिनों चर्चा में हैं। वह कोलकाता से लेकर दिल्ली तक पार्टी का भरोसेमंद चेहरा मानी जाती हैं। लेकिन अब उनके नाम से नई राजनीति शुरू हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक विश्लेषक कह रहे हैं कि संगठन में बदलाव और रणनीति के कारण उनका प्रभाव और बढ़ रहा है।  

20 सांसदों का अलग गुट बना कर बड़ा संकेत

उन्होंने 29 सांसदों में से 20 का एक अलग समूह बना लिया है। इस नए गुट ने संसद में अलग रुख दिखाया है। इसे ममता बनर्जी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। यह कदम बंगाल की राजनीति को और भी दिलचस्प बना सकता है।  

कौन हैं काकोली घोष?

काकोली घोष दस्तीदार कोलकाता की बारासात से तीन बार सांसद रह चुकी हैं। वह डॉक्टर हैं। उन्होंने कोलकाता के आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया है। इसके बाद वे लंदन के किंग्स कॉलेज से भी पढ़ाई कर चुकी हैं।  

राजनीति में काकोली घोष का सफर

2009, 2014 और 2019 में वे सांसद चुनी गईं। वह ममता बनर्जी की करीबी सहयोगी हैं। पार्टी के महिला संगठन से भी जुड़ी हैं। वे संगठन में बहुत मजबूत मानी जाती हैं। हाल के वाकये में उनका नाम चर्चा में आया जब 20 सांसदों ने अलग रुख अपनाया।  

वह स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक मुद्दों पर अक्सर बोलती हैं। संसद में सवाल पूछने और बहस का हिस्सा बनने में वे सक्रिय रहती हैं। कई संसदीय समितियों में भी उनकी भूमिका रही है।  

ममता बनर्जी के साथ काकोली का संबंध

वे पूरी तरह से ममता बनर्जी के नेतृत्व की समर्थक हैं। पार्टी में उनका कोई अलग गुट नहीं है। इसलिए कहना गलत होगा कि उन्होंने पार्टी तोड़ी है या सांसदों को अलग किया है।  

क्यों हैं काकोली घोष चर्चा में?

कभी-कभी अपने बोलने के तरीके या संसद में तीखे सवालों की वजह से वे चर्चा में आ जाती हैं। लेकिन उनका ध्यान बंगाल के विकास और महिला मुद्दों पर रहता है।  

काकोली घोष दस्तीदार एक अनुभवी नेता हैं। उनके नाम पर कोई बड़ा पार्टी तोड़ने या सांसदों को अलग करने का कोई सबूत नहीं है। वे ममता बनर्जी की टीम का हिस्सा हैं और सक्रिय रूप से संसद में काम कर रही हैं।  

काकोली घोष पर सियासी हलचल क्यों बढ़ी?

मीडिया और राजनीतिक गलियारों में सवाल है कि उन्होंने इस बार पार्टी नेतृत्व या संसदीय जिम्मेदारियों के साथ क्या किया। अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। उनके कदम से बंगाल की राजनीति और पार्टी के अंदरूनी समीकरणों में हलचल मची है। इससे सियासी माहौल गरम हो गया है।

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