Aatm Manthan :कभी-कभी मन इतना बेचैन हो जाता है कि फिर हम सुकून और ख़ुशी पाने के लिए बहोत कुछ करने को तैयार हो जाते हैं कभी -कभी तो बिना सोचे समझे कहीं भी चल देते हैं अपना माहौल बदल कर देखते हैं जिससे कभी तो थोड़ा चैन आ जाता है और कभी ऐसा भी हो जाता है कि लाखों की भीड़ में हम खुद को अकेला महसूस करते हैं और फिर ख़ाली हाँथ वहीं लौट आते हैं जहाँ से चले होते हैं क्योंकि ये वो तलाश है जो खुद से शुरू होकर खुद पर ही ख़तम होती है इसलिए इस सैर के अलावा कहीं भी जाओ सुख नहीं मिलेगा। सुख हमारे अंदर होकर भी हमसे दूर रहेगा जब तक हम इसे महसूस करने की कोशिश नहीं करते ये वो अनुभूति है जिसे हम जब तक सुकून से खोजेंगे नहीं तब तक ये हमें नहीं मिलेगी।
दुनिया भर की चिंताएँ हमारे दिल दिमाग़ में चलती रहती हैं क्या होगा ! कैसे होगा ! और हम आज जो क़ीमती सुखद पल हमारे हाँथ में है उसे गँवा देते हैं तो क्यों न ये सब सोचने की बजाय ये सोचा जाए कि जिस आने वाले पल के बारे में हम आज से सोच में हैं वो पल जब आएगा तो कितना सुखद होगा उस पल में क्या – क्या अच्छा होगा और भी बहोत कुछ जो उस पल में अच्छा होगा वो सब सोचकर आज से ख़ुश हो जाएँ यक़ीन मानिए इस तरह आप अपने अंदर नई ऊर्जा का प्रवाह कर पाएँगे।
भविष्य को सुरक्षित करना अच्छी बात है लेकिन अगर हम उसे सेक्योर करने में कहीं पर असमर्थ हों और उसकी फ़िक्र में खुद को परेशान कर लें तो ग़लत बात है क्योंकि ये चिंताए हमें चैन से जीने नहीं देती और हम सुख की अनुभूति के बिना चिड़चिड़े या बीमार से हो जाते हैं, हमारी एनर्जी ख़त्म हो जाती है और हम उस तरह से अपने और काम नहीं कर पाते जैसे करना होता है जिस वजह से हमारी आज की भी चिंताए या समस्याएँ बढ़ जाती हैं या हम परेशानियों से घिर जाते हैं।
अब ये किसी के लिए भी कैसे अच्छा हो सकता है इसलिए जीवन में उतार चढ़ाव को आसानी से पार करने के लिए खुद को सेहतमंद रखना, खुश रखना भी बहोत ज़रूरी है फिर उसके लिए चाहे आप अपने शौक की तरफ जाएँ या किसी और तरीके से दिल को बहलाएँ ताकि हम हर समस्या को आसानी से सुलझा सकें और अपने आस-पास के लोगों को भी खुश रखकर खुशहाल ज़िंदगी जी सकें ,कल की चिंता करें लेकिन इतनी नहीं कि हम चिता तक जल्द पहुँच जाएँ और फिर स्वस्थ शरीर भी तो परमात्मा तक पहुँचने का मार्ग होता है ,आत्म सुख देता है।
जीवन डगर किसी की भी आसान नहीं होती क्योंकि सबके अपने दायित्व होते हैं और उन्हें वक़्त पर पूरा करने का प्रेशर हर किसी के ऊपर होता है पर कुछ लोग बड़ी खुश मिज़ाजी के साथ जीते हैं और कुछ बड़े नाख़ुश होकर , उनके इस बिहेवियर का असर उनके आसपास मौजूद लोगों पर भी पड़ता है और इसी तरह माहौल अच्छा या बुरा बन जाता है। आत्मा की शुद्धता से जुड़ी सुख की अनुभूति आपको तभी होगी जब आप स्वयं को महसूस करेंगें उसे हर चिंता से मुक्त करेंगें जो सुख आपके सामने है उसमें लीन होकर उसके महत्व को समझेंगें ये जानने की कोशिश करेंगें कि आज है तो ही कल आएगा, इस आज को सुखद बनाए रखना भी हमारा ही दायित्व है। ग़ौर ज़रूर करियेगा इस बात पर फिर मिलेंगें आत्म-मंथन की अगली कड़ी में धन्यवाद।

