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क्या है V2V Communication? हर नई गाड़ी में अनिवार्य!

V2V Communication: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (Ministry of Road Transport and Highways) ने बड़ा फैसला लिया है। 1 अप्रैल 2026 से भारत में बिकने वाली हर नई गाड़ी में V2V कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी (Vehicle-to-Vehicle Communication) अनिवार्य कर दी गई है। इसका मतलब है कि अब कारें एक-दूसरे से बात करेंगी और दुर्घटनाओं को पहले से ही रोकने में मदद करेंगी। यह तकनीक अमेरिका और यूरोप में पहले से लागू है, और भारत में इसे लागू करने वाला यह पहला बड़ा कदम है।

V2V कम्युनिकेशन क्या है?

V2V (Vehicle-to-Vehicle) एक वायरलेस तकनीक है जो कारों को रियल-टाइम में एक-दूसरे से जानकारी शेयर करने देती है। इसमें शामिल होता है:

मंत्रालय का दावा है कि इस तकनीक से दुर्घटना दर में 70-80% तक कमी आ सकती है। खासकर हाईवे और शहरों में जहां रियर-एंड और साइड-इंपैक्ट एक्सीडेंट ज्यादा होते हैं।

सरकार ने ऐसा फैसला क्यों लिया?

भारत में हर साल करीब 1.5 लाख लोग सड़क हादसों में मारे जाते हैं, और 4-5 लाख घायल होते हैं। सरकार का मानना है कि V2V टेक्नोलॉजी से बड़े पैमाने पर जानें बचाई जा सकती हैं। यह फैसला भारत न्यू न्यूट्रल मोबिलिटी (Bharat New Neutral Mobility) पॉलिसी का हिस्सा है, जिसके तहत 2030 तक सभी नई गाड़ियां इलेक्ट्रिक और सेफ्टी से जुड़ी हाई-टेक होंगी।मंत्रालय ने कहा कि V2V के लिए DSRC (Dedicated Short-Range Communications) और C-V2X (Cellular V2X) दोनों स्टैंडर्ड्स को अप्रूव किया गया है। कंपनियों को 1 अप्रैल 2026 से पहले इस टेक्नोलॉजी को फिट करना होगा।

मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स, महिंद्रा, हुंडई और किया जैसी कंपनियां पहले से ही V2V टेस्टिंग कर रही हैं। लग्जरी ब्रांड्स जैसे BMW, Mercedes और Audi पहले से ही V2V फीचर दे रहे हैं। इससे छोटी कारों में लागत बढ़ेगी, लेकिन सरकार ने कहा है कि सब्सिडी और टैक्स छूट दी जाएगी।

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