कुत्ते का धर्मशास्त्र में क्या है स्थान ! क्या इसे देवता की सवारी से लेकर दूत भी माना गया है, क्यों बने हैं कुत्तों के मंदिर

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Dogs in Hindu Mythology: कुत्तों ने मनुष्यों का साथ सदा से निभाया है और इसे सबसे वफादार जानवर माना गया है पर क्या आप जानते हैं, हमारी सनातन परंपरा में कुत्ते को देवताओं से जोड़कर देखा गया है, जबकि हमारे धर्मशास्त्र में कुत्ते का स्पर्श ही नहीं बल्कि इसकी दृष्टि भी दोष वाली मानी गई है।

कुत्ते को सनातन परंपरा में श्वान कहा गया है और इसका ज़िक्र पौराणिक कथाओं में भी मिलता हैं ,जहाँ एक तरफ कुत्ते को भगवान भैरव की सवारी माना गया है तो दूसरी तरफ ये भगवान दत्तात्रेय और यम देवता के साथ भी कहीं -कहीं चित्रित है।

कुत्ता शुभ है या अशुभ :-

एक तरफ तो धर्मशास्त्र में कुत्ते को स्वामी भक्त माना जाता है, इससे जुड़े कुछ ज्योतिष उपाय बताए जाते हैं , पितृ पक्ष (Pitru Paksha) में भोजन खिलाया जाता है ,तो वहीं दूसरी तरफ कुत्ते का कुछ चीज़ों को स्पर्श कर लेना या उसे चाटना बहुत अशुभ भी माना जाता है ,कहीं-कहीं तो घर के भीतर प्रवेश पर भी प्रतिबन्ध है यहाँ तक की उसकी दृष्टि पड़ जाने पर भी दोष माना जाता है, लेकिन फिर भी कुत्ता हमारे धर्म और देवताओं से कैसे जुड़ा है ! तो आइये आज यही जानने की कोशिश करते हैं।

कैसा है श्वान का भगवान भैरव (Lord Bhairav) से नाता :-

शास्त्रों में कुत्ते को शिव के रुद्रावतार माने जाने वाले भगवान भैरव की सवारी बताया गया है,इसलिए भैरव देवता का प्रतीक मानकर पूजनीय भी माना गया है इसी वजह से हमारे देश में कई जगहों पर कुत्तों का मंदिर भी बनाया गया है ,ये भी मान्यता है कि कुत्ते की सेवा और पूजा से भगवान भैरव का विशेष आशीर्वाद मिलता है और मनुष्य आपदाओं से बचा रहता है।

क्यों है भगवान दत्तात्रेय (Lord Dattatreya) के साथ कुत्ते का चित्र :-

कुत्ते के बारे में ये सच जान कर भी आप आश्चर्य चकित हो जाएँगे कि सनातन परंपरा में ब्रह्मा, विष्णु और भगवान शिव यानि त्रिमूर्ति के अवतार माने जाने वाले भगवान दत्तात्रेय के साथ भी श्वान यानी कुत्ता कई चित्रों में साथ दिखता है और हिंदू मान्यता के अनुसार ये विवरण भी मिलता है कि कुत्ते एक दो नहीं बल्कि चार वेदों का प्रतिनिधित्व करते हैं और युगों के साथ मनुष्य की चार अवस्थाओं यानि जागृति, स्वप्न, सुषुप्ति और तुरीय के भी प्रतीक हैं।

स्वामीभक्ति का प्रतीक बना इंद्र देवता (Indra Devta) के साथ :-

शास्त्रों में इंद्र देवता के साथ भी एक मादा कुत्ते का विवरण किया गया है जिसे इंद्रदेव ने सरमा नाम दिया था और वो उन्हें बहोत प्रिय भी थी क्योंकि उसने राक्षसों के द्वारा चुराई गाय को वापस लाने में देवताओं की मदद की थी। ये भी माना जाता है कि सरमा ही सभी कुत्तों की माता है और इसी की संतानें यम की रक्षा के लिए हमें उनके साथ दिखती हैं।

महाभारत के धर्मराज युधिष्ठिर (Yudhishthira)के साथ की स्वर्ग की यात्रा :-

आपको याद हो तो महाभारत की कथा में धर्मराज यु​धिष्ठिर के साथ एक कुत्ते का प्रसंग मिलता है, जो कि उनके साथ स्वर्ग तक की यात्रा करता है ऐसा माना जाता है कि ये कोई और नहीं बल्कि स्वयं भगवान यम थे और ये भेद जब खुला जब स्वर्गारोहण के दौरान युधिष्ठिर इस कुत्ते के साथ स्वर्ग के द्वार पर पहुँचे तो स्वर्ग के राजा इंद्रदेव ने उन्हें कुत्ते के साथ अंदर आने की अनुमति नहीं दी और इस बात से रुष्ट होकर युधिष्ठिर ने भी स्वर्ग में जाने से मना कर दिया और ये देखकर यम देवता कुत्ते का शरीर छोड़कर अपने वास्तविक रूप में सामने आ गए और फिर इंद्रदेव ने युधिष्ठिर को उनके कुत्ते के साथ स्वर्ग में प्रवेश दिया।

ज्योतिष शास्त्र (Astrology)में श्वान का स्थान :-

ज्योतिष शास्त्र में भी कुत्ते को काफी महत्व दिया गया है गाय की तरह कुत्ते को भी महत्वपूर्ण प्राणी मानते हुए और उससे जुड़े कई ज्योतिष उपाय भी बताये गये हैं यहाँ तक कि पितरों की तृप्ति के लिए गाय, कौआ आदि के साथ कुत्ते को भी भोग लगाने को कहा गया है ऐसा माना जाता है कि कुत्ते को भोजन खिलाने से शनि ग्रह और केतु से संबंधित दोष दूर होते हैं। हालाँकि ये सभी मान्यताए हैं इनका कोई ठोस आधार नहीं है।  

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