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सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और इसके संस्थापक अभिजीत दीपके की काफी चर्चा है। जानिए जस्टिस सूर्यकांत के बयान के बाद शुरू हुए इस GenZ आंदोलन की पूरी कहानी।

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भारतीय सोशल मीडिया पर इन दिनों ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम का एक अनोखा और व्यंग्यात्मक डिजिटल आंदोलन तेजी से वायरल हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की एक मौखिक टिप्पणी के बाद शुरू हुए इस अभियान ने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है। बहस के केंद्र में आई इस कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके हैं, जो अमेरिका के बोस्टन में रहकर इस पूरे डिजिटल कैंपेन को लीड कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर क्यों ट्रेंड कर रही है ‘कॉकरोच जनता पार्टी’?

पिछले कुछ दिनों से इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर) और रेडिट जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) की जबरदस्त चर्चा देखने को मिल रही है। इंटरनेट पर इस नाम से एक आधिकारिक वेबसाइट भी लाइव हो चुकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म पर महज कुछ ही दिनों के भीतर लाखों युवाओं ने सदस्यता के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। इंस्टाग्राम पर इसके फॉलोअर्स की संख्या तेजी से बढ़ते हुए मुख्यधारा के कई राजनीतिक दलों को टक्कर दे रही है। यह पूरा आंदोलन मुख्य रूप से देश में बेरोजगारी, पेपर लीक और युवाओं की समस्याओं पर केंद्रित है।

जस्टिस सूर्यकांत के किस बयान से शुरू हुआ यह विवाद?

इस पूरे डिजिटल मूवमेंट की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट में हुई एक मामले की सुनवाई के बाद हुई। दरअसल, कोर्ट में एक याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कथित तौर पर एक टिप्पणी की थी, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया हुई। खबरों के अनुसार, उन्होंने अदालती कार्यवाही के दौरान कुछ युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच’ और समाज के ‘परजीवी’ से कर दी थी, जो रोजगार न मिलने पर सोशल मीडिया, मीडिया या आरटीआई कार्यकर्ता बनकर सिस्टम पर हमला करने लगते हैं।

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हालांकि, इस टिप्पणी पर विवाद बढ़ता देख जस्टिस सूर्यकांत ने शनिवार को अपनी बात पर सफाई भी जारी की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि मीडिया के एक वर्ग ने उनके मौखिक बयान को गलत संदर्भ में पेश किया है। उनका इरादा देश के युवाओं की आलोचना करना बिल्कुल नहीं था। उन्होंने कहा, “मुझे भारतीय युवाओं पर गर्व है और मैं उन्हें विकसित भारत के स्तंभ के रूप में देखता हूं। मेरी आलोचना केवल उन लोगों के खिलाफ थी जो फर्जी डिग्री के सहारे वकालत या अन्य महत्वपूर्ण पेशों में घुस जाते हैं।”

कौन हैं कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके?

इस तेजी से बढ़ते डिजिटल कैंपेन के पीछे 30 वर्षीय पॉलिटिकल कम्युनिकेशन स्ट्रेटेजिस्ट अभिजीत दीपके का दिमाग है। अभिजीत मूल रूप से महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) के रहने वाले हैं। उन्होंने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है और फिलहाल वे अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस (PR) में मास्टर्स की डिग्री ले रहे हैं।

अभिजीत ने बोस्टन में अपने ग्रेजुएशन के दौरान ही भारत की इस न्यायिक टिप्पणी से जुड़ी खबरों को देखा और इसके विरोध में व्यंग्य (Satire) के रूप में एक डिजिटल स्पेस बनाने का फैसला किया। उन्होंने इंटरनेट पर इसे “कमजोर और बेरोजगारों की आवाज” के रूप में प्रचारित किया, जो देखते ही देखते देश के युवाओं के बीच एक बड़ा ट्रेंड बन गया।

राजनीतिक गलियारों से जुड़ाव और आप (AAP) कनेक्शन

अभिजीत दीपके का राजनीतिक अभियानों से पुराना नाता रहा है। वे साल 2020 से 2023 के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) की सोशल मीडिया और डिजिटल कैंपेनिंग टीम का हिस्सा रह चुके हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने पार्टी के लिए कई मीम-आधारित और डिजिटल आउटरीच अभियानों पर काम किया था। इसके अलावा, उन्होंने दिल्ली के शिक्षा विभाग और मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में कम्युनिकेशंस फेलो के रूप में भी सेवाएं दी हैं।

सोशल मीडिया पर उनकी पुरानी तस्वीरें और पोस्ट वायरल होने के बाद कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि यह आंदोलन राजनीति से प्रेरित है। हालांकि, अभिजीत ने इन दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि यह पूरी तरह से एक स्वतंत्र और व्यंग्यात्मक मंच है, जिसका मकसद देश के युवाओं की वास्तविक चिंताओं और हताशा को सामने लाना है।

युवाओं के बीच क्यों लोकप्रिय हो रहा है यह कैंपेन?

इस आंदोलन की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण इसका ‘मीम-हैवी’ और पैरोडी-आधारित दृष्टिकोण है। पार्टी ने बकायदा एक मजाकिया 5-पॉइंट मैनिफेस्टो (घोषणापत्र) और एक एंथम भी जारी किया है। देश के युवा जो लंबे समय से सरकारी नौकरियों की कमी, प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, वे इस व्यंग्य के जरिए अपनी भड़ास निकाल रहे हैं।

इस अभियान को राजनीतिक और सामाजिक गलियारों से भी समर्थन मिल रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की नेता महुआ मोइत्रा, कीर्ति आजाद और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण जैसे दिग्गजों ने भी सोशल मीडिया पर इस ट्रेंड को लेकर अपनी प्रतिक्रियाएं साझा की हैं। इसके अतिरिक्त, आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने भी सोशल मीडिया पर एक रील साझा कर इस युवाओं के इस प्रतीकात्मक आंदोलन के प्रति अपनी एकजुटता प्रकट की है।

निष्कर्ष और आगे की राह

अभिजीत दीपके का मानना है कि भले ही यह आंदोलन एक मजाक या व्यंग्य के रूप में शुरू हुआ हो, लेकिन अब यह उससे कहीं आगे निकल चुका है। यह डिजिटल अभियान दिखाता है कि देश का युवा वर्ग वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था से कितना अलग-थलग महसूस कर रहा है। हालांकि, यह देखना बाकी है कि सोशल मीडिया का यह उबाल भविष्य में किसी गंभीर जमीनी आंदोलन का रूप लेता है या सिर्फ एक इंटरनेट ट्रेंड बनकर रह जाता है।

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आधिकारिक जानकारियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध विवरणों के आधार पर यह स्पष्ट है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं की आवाज उठाने का यह नया डिजिटल तरीका इस समय देश की मुख्यधारा की राजनीति के लिए एक बड़ा कौतूहल का विषय बना हुआ है।

FAQs

प्रश्न 1: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) क्या है?

उत्तर: ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) एक सोशल मीडिया आधारित व्यंग्यात्मक (Satirical) डिजिटल आंदोलन है। इसकी शुरुआत मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट की एक मौखिक टिप्पणी के विरोध में देश के युवाओं द्वारा एक पैरोडी राजनीतिक मोर्चे के रूप में की गई है। इंटरनेट पर यह खुद को “आलसी और बेरोजगारों की आवाज” के रूप में पेश करता है।

प्रश्न 2: कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक कौन हैं?

उत्तर: इस वायरल डिजिटल अभियान के संस्थापक 30 वर्षीय अभिजीत दीपके हैं। अभिजीत मूल रूप से महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर के रहने वाले हैं और एक प्रोफेशनल पॉलिटिकल कम्युनिकेशन स्ट्रेटेजिस्ट हैं। उन्होंने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और हाल ही में अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस (PR) में मास्टर्स पूरा किया है।

प्रश्न 3: इस आंदोलन की शुरुआत किस विवाद के बाद हुई?

उत्तर: इस आंदोलन की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत के उस कथित मौखिक बयान के बाद हुई, जिसमें उन्होंने अदालत की कार्यवाही के दौरान कुछ युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ से कर दी थी जो रोजगार न मिलने पर लॉ, मीडिया या आरटीआई एक्टिविज्म में घुस जाते हैं। हालांकि, बाद में चीफ जस्टिस ने सफाई देते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी केवल फर्जी डिग्री धारकों के खिलाफ थी, न कि देश के आम युवाओं के लिए।

प्रश्न 4: कॉकरोच जनता पार्टी का मुख्य एजेंडा या मैनिफेस्टो क्या है?

उत्तर: भले ही यह एक पैरोडी आंदोलन है, लेकिन इसके 5-पॉइंट मैनिफेस्टो में गंभीर व्यवस्थागत सुधारों की मांग की गई है, जैसे:

प्रश्न 5: क्या कोई भी इस डिजिटल अभियान का हिस्सा बन सकता है?

उत्तर: हां, संस्थापक अभिजीत दीपके ने इसके लिए बेहद मजाकिया और व्यंग्यात्मक पात्रता मानदंड तय किए हैं। उनके अनुसार, जो भी व्यक्ति खुद को बेरोजगार, आलसी, मानसिक रूप से सक्रिय लेकिन शारीरिक रूप से शिथिल मानता है और दिन में कई घंटे सोशल मीडिया पर बिता सकता है, वह इसकी वेबसाइट पर जाकर प्रतीकात्मक रूप से जुड़ सकता है। उपलब्ध विवरणों के आधार पर अब तक लाखों लोग इसकी वेबसाइट पर साइन-अप कर चुके हैं।

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