West Bengal CM Suvendu Adhikari : पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार ऐसा राजनीतिक भूचाल आया है, जिसकी कल्पना भी कुछ साल पहले तक मुश्किल थी। कभी तृणमूल कांग्रेस के सबसे भरोसेमंद चेहरे माने जाने वाले सुवेंदु अधिकारी अब उसी पार्टी के लिए सबसे बड़ा चुनावी संकट बनकर उभरे हैं। राज्य की 294 सीटों में से 206 सीटें जीतकर भारतीय जनता पार्टी ने सत्ता पर ऐतिहासिक कब्जा जमाया है, जबकि टीएमसी महज 80 सीटों पर सिमट गई है। इस भारी बदलाव के केंद्र में वही नाम है—सुवेंदु अधिकारी, जो कभी ममता के सबसे भरोसेमंद हुआ करते थे और अब भाजपा के वफादार बनकर चुनाव में सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी बन गए।
कभी ममता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते थे सुवेंदु अधिकारी
सुवेंदु अधिकारी वही नेता हैं जिन्होंने नंदीग्राम आंदोलन में ममता बनर्जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष किया था। लेकिन समय बदला, राजनीति बदली और आज वही नेता ममता बनर्जी के सबसे मजबूत राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बन चुके हैं। इस चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने न सिर्फ नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराया, बल्कि उनके गढ़ भवानीपुर में भी बड़ा झटका दिया। जीत के बाद मीडिया से बातचीत में सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि नंदीग्राम में उन्हें हिंदू मतदाताओं का समर्थन मिला है। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम वोट टीएमसी के पक्ष में गया और वह अब “हिंदुओं के लिए काम करेंगे। उनके इस बयान ने राज्य की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। सुवेंदु अधिकारी ने टीएमसी को “भ्रष्ट और परिवारवादी पार्टी” करार देते हुए कहा कि पार्टी ने जनता के हितों के बजाय सत्ता को प्राथमिकता दी। उन्होंने यह भी कहा कि नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की गारंटी पर जनता का भरोसा जीतकर बीजेपी ने यह ऐतिहासिक जीत हासिल की है।
बंगाल में सीएम की कुर्सी पर बैठेंगे सुवेंदु अधिकारी?
अब बात करते हैं कि क्या भाजपा बंगाल में बड़ी जीत दिलान के लिए सुवेंदु अधिकारी को तोहफे के रूप में मुख्यमंत्री पद की कुर्सी देगी। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि सुवेंदु अधिकारी अब मुख्यमंत्री पद के सबसे मजबूत दावेदार बन चुके हैं। दो सीटों पर बड़ी जीत और पूर्व मेदिनीपुर में बीजेपी की 16 सीटों पर सफलता में उनकी अहम भूमिका ने उन्हें पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के करीब ला खड़ा किया है। हालांकि, बीजेपी ने अभी आधिकारिक तौर पर किसी मुख्यमंत्री चेहरे की घोषणा नहीं की है।
ममता की पार्टी से शुरू किया था पॉलिटिकल करियर
सुवेंदु अधिकारी के राजनीतिक सफर की बात करें तो सुवेंदु अधिकारी का राजनीतिक सफर बेहद दिलचस्प रहा है। राजनीति की शुरूआत छात्र राजनीति और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़कर की। इसके बाद 1999 में टीएमसी में एंट्री कर ली। 2007 में नंदीग्राम आंदोलन से राष्ट्रीय पहचान बनाई फिर 2014 में टीएमसी से लोकसभा चुनाव में जीत हासिल कर सांसद बनें। 2020 में सुवेंदु अधिकारी ने टीएमसी छोड़कर बीजेपी को ज्वाईन कर ली। बीजेपी में शामिल होने के बाद उन्होंने खुद को पार्टी के सबसे आक्रामक और प्रभावशाली नेता के रूप में साबित किया। 2026 के विधानसभा चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने बीजेपी की प्रचंड़ जीत के लिए जीतोड़ मेहनत की और ममता से जीत छीनकर चुनाव का परिणाम भाजपा के खाते में डाल दिया।
बंगाल में सुवेंदु अधिकारी ने दिलाई भाजपा को जीत
पश्चिम बंगाल का यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत माना जा रहा है, जहां एक तरफ टीएमसी को करारी हार का सामना करना पड़ा है, वहीं बीजेपी ने राज्य में अपनी मजबूत पकड़ बना ली है। इस पूरे राजनीतिक तूफान के केंद्र में एक ही नाम है- सुवेंदु अधिकारी, जिन्होंने दोस्ती से दुश्मनी तक का सबसे बड़ा राजनीतिक सफर तय किया है। माना जा रहा है कि सुवेंदु अधिकारी ही बंगाल के अगले मुख्यमंत्री बनेंगे, जो अब बंगाल को हिंदू विचारधारा से जोड़ेंगे।

