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उद्धव जैसा होगा ममता का हाल? सत्ता के साथ पार्टी छीनने का खतरा!

पश्चिम बंगाल (West Bengal) की राजनीति में इस वक्त ऐसा सियासी भूचाल आया है, जिसने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की नींद उड़ा दी है। कभी पूरे बंगाल पर एकछत्र राज करने वाली ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की पार्टी अब अंदरूनी कलह (TMC Internal Conflict) और बगावत (Rebellion) से जूझती नजर आ रही है। हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और शिवसेना (Shiv Sena) के साथ जो हुआ था, वैसी ही कहानी अब बंगाल में दोहराई जा सकती है।

दरअसल, TMC से निष्कासित विधायक संदीपन साहा (Sandipan Saha) और ऋतब्रत बनर्जी (Ritabrata Banerjee) ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। सोमवार देर शाम दोनों नेताओं ने एमएलए हॉस्टल (TMC MLA Hostel Meating) में एक अहम बैठक बुलाई, जिसमें टीएमसी (TMC) के कई विधायक शामिल हुए। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इनमें कुछ ऐसे विधायक भी मौजूद थे, जो ममता बनर्जी की आधिकारिक बैठक से गायब रहे थे, लेकिन साहा की बैठक में पहुंच गए।

ममता ने छीन लेंगे TMC

यहीं से अटकलों का बाजार गर्म हो गया। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के निष्कासित प्रवक्ता ने एक टीवी डिबेट में दावा किया कि बैठक में शामिल करीब 80 विधायकों में से 50 विधायक खुद को “असली तृणमूल कांग्रेस” घोषित करने की तैयारी में हैं। इतना ही नहीं, ये विधायक विधानसभा अध्यक्ष के सामने प्रस्ताव रख सकते हैं कि आखिर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (West Bengal Leader of Opposition) कौन होगा।

दोनों नेताओं ने इस मामले की शिकायत विधानसभा अध्यक्ष (Assembly Speaker) से की। इसके बाद मामला पुलिस और सीआईडी (CID) तक पहुंच गया। जांच शुरू हुई और फिर ममता बनर्जी ने दोनों नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया।

लेकिन पार्टी से निकाले जाने के बाद अब दोनों नेता आर-पार की लड़ाई के मूड में दिखाई दे रहे हैं। उनका संदेश साफ है—अगर ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने हमें पार्टी से निकाला है, तो हम ममता से उनकी पार्टी ही छीन लेंगे।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगर वास्तव में 50 विधायक एकजुट होकर अलग गुट बनाते हैं, तो बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर हो सकता है। यही वजह है कि अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या तृणमूल कांग्रेस (TMC) भी शिवसेना (Shiv Sena) की तरह दो हिस्सों में बंटने वाली है? क्या ममता बनर्जी के सामने अब सबसे बड़ा खतरा विपक्ष नहीं, बल्कि उनकी अपनी पार्टी के भीतर से पैदा हो गया है?

फिलहाल इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन एक बात तय है कि पश्चिम बंगाल (West Bengal) की राजनीति में तस्वीरें तेजी से बदल रही हैं। अब देखना होगा कि यह बगावतसिर्फ नाराजगी साबित होती है या फिर ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ा सियासी संकट बनकर सामने आती है।

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