Waqf Bill Passed : वक्फ बिल पास, मगर, क्या है सेक्शन-40 जिससे उपजा विवाद 

Waqf Bill Passed : लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक के पास होने के बाद आज इस बिल को राज्यसभा में पेश किता गया। जहां बिल पर विस्तृत चर्चा हुई। अब इस बिल को राष्ट्रपति के पास अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति से पास होने के बाद वक्फ संशोधन विधेयक को देशभर में लागू कर दिया जाएगा। लेकिन वक्त बिल को लेकर लोगों के मन में कई सवाल है, जैसे वफ्क़ बिल क्या है, इसके आने से वफ्क बोर्ड पर क्या बदलाव होंगे, आखिर सेक्शन 40 क्या है जिसे बिल से हटाया गया है? इस बिल को लेकर लोकसभा से लेकर राज्यसभा तक ही नहीं बल्कि देशभर में आम लोगों के बीच भी हो-हल्ला मच गया है।

वक्फ बिल में है क्या? 

वक्फ संशोधित विधेयक में 10 मुस्लिम सदस्य होंगे, जिनमें से दो महिला का होना अनिवार्य है। वक्फ बोर्ड में कुल 22 सदस्य होंगे, 2 अप्रैल को जब बिल लोकसभा में पेश हुआ था, तो इसमें गैर मुसलमान सदस्य की भी बात हुई थी, लेकिन बाद में इसमें संशोधन कर दिया गया और अब कोई भी गैर मुसलमान बोर्ड में शामिल नहीं होगा। पूर्व अधिकारियों सहित संसद के 3 सांसद भी सदस्य होंगे, जो किसी भी धर्म के हो सकते हैं। वक्फ बोर्ड में शिया और सुन्नी दोनों संप्रदाय के मुसलमान शामिल होंगे। 

वक्फ बोर्ड में क्या बदलाव होंगे?

वक्फ बोर्ड की शक्ति पर अंकुश लगाया गया है और अब वक्फ ट्रिब्यूनल का फैसला अंतिम नहीं होगा, उसे रेवेन्यू कोर्ट, सिविल कोर्ट और हाईकोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।वक्फ की संपत्ति का रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा। वक्फ की पूरी संपत्ति का ब्यौरा वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। वैसी संपत्ति वक्फ नहीं की जा सकेगी, जिसपर किसी का हक हो। यानी महिला और बच्चों के अधिकारों को दरकिनार कर कोई संपत्ति वक्फ नहीं की जा सकती है। इस्तेमाल के आधार पर वक्फ की संपत्ति का दावा मान्य नहीं होगा, उसके लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी है।

वक्फ बोर्ड के अधिकारों को सीमित किया गया है और जिला कलेक्टर की भूमिका बढ़ाई गई है। अब वक्फ संपत्ति के सर्वेक्षण का अधिकार जिला कलेक्टर के पास है, पहले यह काम एक स्वंतत्र सर्वेक्षण आयुक्त करता था। अब वक्फ संपत्ति की पहचान और उसके दस्तावेजीकरण के लिए कलेक्टर सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे।

वक्फ संपत्ति का विवाद कलेक्टर के पास जाएगा 

कोई संपत्ति वक्फ संपत्ति है या नहीं इसपर विवाद होने पर अब फैसला जिला कलेक्टर द्वारा लिया जाएगा, जबकिन पहले यह अधिकार वक्फ ट्रिब्यूनल के पास था। बस यही वो खास बिंदु है जो वक्फ बोर्ड से जुड़े लोगों को पंसद नहीं है क्योंकि बड़े स्तर पर वक्फ की सम्पत्तियों को बेंचने के मामले भी सामने आये है। 

बिल से क्यों हटाया गया सेक्शन 40 

वक्फ एक्ट का सेक्शन 40 वक्फ संपत्तियों के बारे में फैसला करने से जुड़ा हुआ है। इसका मतलब है कि अगर किसी संपत्ति के बारे में यह सवाल उठता है कि वह वक्फ संपत्ति है या नहीं, तो वक्फ बोर्ड इस सवाल का फैसला कर सकता है। इस सेक्शन के तहत, अगर वक्फ बोर्ड किसी संपत्ति को वक्फ संपत्ति मानता है, तो उसका यह फैसला अंतिम होता है।

इसका मतलब है कि सरकार या कोई और संस्था इस फैसले में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है। अगर किसी को बोर्ड के फैसले से आपत्ति होती, तो वह वक्फ ट्रिब्यूनल में अपील कर सकता है। सेक्शन 40 वक्फ बोर्ड को एक तरह से स्वतंत्रता देता था कि वह बिना किसी बाहरी दबाव के यह तय कर सके कि कोई संपत्ति वक्फ संपत्ति है या नहीं।

बिल में संशोधन से वक्फ बोर्ड के छिन गए अधिकार

वक्फ बिल में जब सेक्शन 40 जुड़ा था, तब कोई अन्य ट्रस्ट या सोसाइटी की संपत्ति को वक्फ संपत्ति के रूप में पंजीकरण कराने की आवश्यकता होती है तो बोर्ड उसे ऐसा करने का निर्देश दे सकता था। लेकिन अब सरकार ने बिल से सेक्शन 40 को हटा दिया। केंद्र सरकार का कहना है कि इस बदलाव से वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और प्रभावशीलता आएगी। उनका मानना है कि अब वक्फ संपत्तियों के मामलों में कोई भ्रम नहीं होगा और यह प्रक्रिया ज्यादा सरल और सुचारू होगी।

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