Waqf Bill Live Hindi: आज, 2 अप्रैल 2025 को, लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक (Waqf Amendment Bill Live ), 2024 पर चर्चा शुरू हो चुकी है। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने इस बिल को पेश किया और इसके बारे में कई अहम बातें कही हैं। यहाँ अब तक उनके बयानों का सारांश दिया जा रहा है, जो विभिन्न समाचार स्रोतों और उनके हालिया बयानों पर आधारित है:
Waqf Bill Live Video
रिजिजू ने कहा कि यह बिल वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता, जवाबदेही और समावेशिता लाने के लिए है। उनका दावा है कि यह सुधार गरीब मुस्लिम समुदाय, खासकर महिलाओं और बच्चों के हित में है, न कि राजनीति के लिए।
रिजिजू ने अभी कहा कि यह बिल वक्फ संपत्तियों को लेकर फैली अव्यवस्था को दूर करने के लिए लाया गया है। उनका कहना था कि कई जगह वक्फ की जमीनों का गलत इस्तेमाल हो रहा है, और यह बिल उस पर लगाम लगाएगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार ने इस विधेयक को बनाने से पहले हर पहलू पर विचार किया और यह किसी के खिलाफ नहीं है।
उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि कुछ लोग इसे गलत रंग दे रहे हैं, लेकिन यह बिल गरीब मुस्लिमों के हित में है। रिजिजू ने यह भी बताया कि वक्फ बोर्ड में महिलाओं को जगह देना इस बिल का एक अहम हिस्सा है, जो समाज में बराबरी को बढ़ावा देगा।
वक्फ बोर्ड में महिलाओं को हक कैसे गैर-संवैधानिक?
रवि शंकर प्रसाद ने लोकसभा में कहा कि विपक्ष इस बिल को गैर-संवैधानिक बताकर भ्रम फैला रहा है, लेकिन उनके तर्कों में कोई दम नहीं है। उन्होंने कहा कि यह बिल संविधान के दायरे में है और इसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उनका कहना था कि वक्फ बोर्ड में महिलाओं को हक देने की बात करना कैसे गैर-संवैधानिक हो सकता है। प्रसाद ने जोर देकर कहा कि यह बिल मुस्लिम महिलाओं को सशक्त करने की दिशा में एक कदम है, और इसे रोकना महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि यह बिल समाज के पिछड़े मुस्लिम तबकों के लिए बनाया गया है। उनका तर्क था कि वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार से उन लोगों को फायदा होगा जो सालों से उपेक्षित हैं। प्रसाद ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि वे इस बिल का विरोध सिर्फ राजनीति के लिए कर रहे हैं, न कि किसी ठोस वजह से। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष को इस बिल के फायदे समझने चाहिए, जो पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देगा।
किरेन रिजिजू का विपक्ष के आरोपों पर बयान
रिजिजू ने लोकसभा में कहा कि विपक्ष गलत तरीके से यह आरोप लगा रहा है कि सरकार इस बिल के जरिए मस्जिदों को छीन लेगी। उन्होंने इसे “झूठा प्रचार” करार दिया और कहा कि यह बिल मस्जिदों या किसी धार्मिक स्थल के प्रबंधन में दखल देने के लिए नहीं है। उनका कहना था कि सरकार का मकसद सिर्फ वक्फ संपत्तियों को व्यवस्थित करना और उनके गलत इस्तेमाल को रोकना है। रिजिजू ने जोर देकर कहा कि यह देश संविधान से चलता है, और कोई भी किसी की संपत्ति या मस्जिद को हड़प नहीं सकता।
वक्फ में गैर-मुस्लिम सदस्यों पर रिजिजू की बात
वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने के मुद्दे पर रिजिजू ने कहा कि यह कदम पारदर्शिता और समावेशिता को बढ़ाने के लिए उठाया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि वक्फ बोर्ड एक प्रशासनिक संस्था है, न कि कोई धार्मिक निकाय, इसलिए इसमें गैर-मुस्लिमों की मौजूदगी से कोई धार्मिक हस्तक्षेप नहीं होगा। रिजिजू ने यह भी कहा कि यह प्रावधान समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की सोच को दर्शाता है, और इससे वक्फ की कार्यप्रणाली में निष्पक्षता आएगी।
विपक्ष पर निशाना
उन्होंने विपक्ष पर भ्रामक प्रचार करने का आरोप लगाया। रिजिजू ने कहा, “कुछ नेता और धार्मिक संगठन मासूम मुस्लिमों को गुमराह कर रहे हैं। वही लोग जो CAA को लेकर डर फैला रहे थे, अब इस बिल के खिलाफ झूठ बोल रहे हैं। CAA से किसी की नागरिकता नहीं गई, वैसे ही यह बिल किसी का हक नहीं छीनेगा।”
ऐतिहासिक कदम
रिजिजू ने इसे “ऐतिहासिक बिल” करार दिया और कहा कि यह देश के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा, “यह बिल आने वाले कई सालों तक याद किया जाएगा। यह वक्फ बोर्ड में भ्रष्टाचार रोकने और संपत्तियों के गलत दावों को खत्म करने के लिए है।”
समर्थन की अपील
उन्होंने सभी सांसदों से बिल का समर्थन करने की अपील की और कहा कि अगर कोई इसका विरोध करना चाहता है, तो “तर्क के आधार पर करें, झूठ का सहारा न लें।” उनका कहना था कि एनडीए के साथ-साथ कई विपक्षी सांसद भी निजी तौर पर इस बिल की जरूरत को मानते हैं।
महिला सशक्तिकरण
रिजिजू ने जोर दिया कि बिल में वक्फ बोर्ड में मुस्लिम महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने का प्रावधान है, जो 21वीं सदी की सबसे बड़ी मांगों में से एक है। उन्होंने पूछा, “क्या विपक्ष महिलाओं के खिलाफ है?”
JPC की भूमिका
उन्होंने संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की व्यापक चर्चा का हवाला दिया, जिसमें 284 प्रतिनिधिमंडलों और 25 राज्यों के वक्फ बोर्डों ने हिस्सा लिया। उनका कहना था कि यह बिल गहन विचार-विमर्श और 9.7 लाख से ज्यादा सुझावों के बाद तैयार किया गया है।
धार्मिक स्वतंत्रता पर सफाई
रिजिजू ने स्पष्ट किया कि “इस बिल से किसी भी धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप नहीं होगा। यह अधिकार छीनने के लिए नहीं, बल्कि जिन्हें कभी अधिकार नहीं मिले, उन्हें देने के लिए लाया गया है।”
विपक्ष का विरोध तेज
विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस, सपा, और AIMIM ने बिल के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की है। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने बहस में हिस्सा लेते हुए कहा कि यह बिल संविधान के मूल ढांचे को कमजोर करता है और अल्पसंख्यक अधिकारों पर हमला है। सपा सांसद अखिलेश यादव ने भी इसे “राजनीति से प्रेरित” करार दिया और कहा कि यह मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने की कोशिश है।
एनडीए सहयोगियों का समर्थन
एनडीए के प्रमुख सहयोगी दलों जैसे टीडीपी, जेडीयू, और शिवसेना (शिंदे गुट) ने अपने सांसदों को बिल के समर्थन में वोट देने का निर्देश दिया है। जेडीयू नेता राजीव रंजन सिंह ने कहा कि बिल में JPC की सिफारिशों को शामिल किया गया है, जिससे यह और मजबूत हुआ है। टीडीपी और जनसेना ने भी इसे मुस्लिम समुदाय के हित में बताया।
मुस्लिम संगठनों की प्रतिक्रिया
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने बिल के खिलाफ देशव्यापी विरोध की चेतावनी दी है। बोर्ड के महासचिव मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने कहा कि यह बिल वक्फ संपत्तियों पर सरकारी कब्जे को बढ़ावा देगा, जो समुदाय के लिए अस्वीकार्य है। कुछ स्थानीय मुस्लिम संगठनों ने दिल्ली और भोपाल में प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं।
सुरक्षा व्यवस्था सख्त
बिल की चर्चा के बीच दिल्ली पुलिस ने संसद भवन और आसपास के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है। यह कदम किसी भी संभावित कानून-व्यवस्था की समस्या से निपटने के लिए उठाया गया है। भोपाल में भी पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया है।
वर्तमान स्थिति
लोकसभा में अभी बहस जारी है। रिजिजू ने बिल को पेश करने के बाद चर्चा शुरू की, और अब विभिन्न दलों के सांसद अपनी बात रख रहे हैं। विपक्ष इसे असंवैधानिक बता रहा है, जबकि सरकार इसे पारदर्शिता की दिशा में कदम बता रही है। यह बहस 8 घंटे तक चलने की उम्मीद है, जिसे जरूरत पड़ने पर बढ़ाया जा सकता है।
यह खबर अपडेट हो रही है. ….