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Waqf Amendment Bill 2025 : मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने माँगा राष्ट्रपति से समय, वक़्फ़ बिल पर लिखी चिट्ठी 

**EDS: SCREENGRAB VIA SANSAD TV** New Delhi: President Droupadi Murmu addresses the joint sitting of both Houses of Parliament on the first day of the Budget Session, in New Delhi, Friday, Jan. 31, 2025. (Sansad TV via PTI Photo) (PTI01_31_2025_000040A)

Waqf Amendment Bill 2025 : लोकसभा और राज्यसभा से वक़्फ़ संशोधन विधेयक पास हो चुका है। दोनों सदनों से पास होने के बाद वक्फ बिल को राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। इस बीच ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में बोर्ड ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का समय मांगा है। AIMPLB की इस चिट्ठी ने भाजपा सरकार के होश उड़ा दिए हैं। आखिर अब इस बिल का क्या होगा? क्या राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू वक्त संशोधन विधेयक पर हस्ताक्षर करेंगे या फिर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की चिट्ठी को स्वीकार करते हुए बड़ा फैसला लेंगी। 

Waqf Amendment Bill पर विरोध जारी 

लोकसभा और राज्यसभा में पास होने के बाद वक्फ  बिल के खिलाफ विपक्ष का विरोध प्रदर्शन जारी है। कई राज्यों में इस बिल को के विरोध में बड़ा प्रदर्शन भी देखने को मिला। दिल्‍ली की जामिया मिलिया इस्‍लामीया यूनिवर्सिटी में भी जमकर नारेबाजी हुई। वक्फ बिल के विरोध में दंगे की आशंका से देश भर के कई संवेदनशील राज्यों में सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ा दिया गया है जगह-जगह पुलिस मॉक ड्रिल कर रही हैं। 

AIMPLB ने राष्ट्रपति से माँगा समय | President Draupadi Murmu

गुरुवार को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने वक्फ  बिल को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में बोर्ड ने वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर बातचीत करने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का समय मांगा है। संगठन में बल पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने से पहले ही मिलने की विनती की है। संगठन ने छुट्टी में राष्ट्रपति को बताया कि यह विधेयक पूरी तरह से असम राजधानी के और देश के मुसलमानों पर एक हमला है। 

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AIMPLB ने Waqf Bill पर चिट्ठी में क्या लिखा? 

राष्ट्रपति को लिखी गई छुट्टी में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने लिखा, “हमारा मानना है कि अधिनियम के प्रावधानों पर गंभीरता से पुनर्विचार की आवश्यकता है क्योंकि वे भारत के संविधान के तहत गारंटीकृत मौलिक अधिकारों के साथ असंगत हैं, विशेष रूप से धार्मिक स्वतंत्रता, समानता और धार्मिक संस्थानों की सुरक्षा के संबंध में। मामले की गंभीरता को देखते हुए, हम आपसे विनम्र अनुरोध करते हैं कि कृपया हमें आपके लिए सुविधाजनक समय पर शीघ्र नियुक्ति प्रदान करें ताकि हम अपनी चिंताओं को प्रस्तुत कर सकें और संवैधानिक ढांचे के भीतर संभावित समाधानों पर चर्चा कर सकें।”

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