Happy Birthday Waheeda Rehman :आज जन्मदिन है उस एक्ट्रेस का जिसने फिल्म इंडस्ट्री में अपनी ख़ूबसूरती , अदाकारी और डांस से भी एक मुख्तलिफ पहचान बनाई है। उन्होंने ‘पान खाए सइयाँ हमारो …’ ,’आज फिर जीने की तमन्ना है. ..’ और ‘पिया तोसे नैना लागे रे. ..’ जैसे गीतों में अपने नृत्य की अनुपम छठा बिखेरी ,’ काग़ज़ के फूल’, ‘गाइड’, ‘प्यासा’, ‘तीसरी कसम’, ‘खामोशी’ और ‘नीलकमल’ जैसी सुपरहिट फिल्मों में अपने बेमिसाल अभिनय का जलवा बिखेरा ,ख़ूबसूरती तो आपकी ऐसी थी कि दर्शक उन्हें पर्दे पर देखते ही दीवाने हो जाते थे।जी हाँ आपका अंदाज़ा बिलकुल सही है हम बात कर रहे हैं मशहूर अभिनेत्री वहीदा रहमान की जो आज भी कहीं- कहीं हमें नज़र आ जाती हैं और ‘ससुराल गेंदा फूल. . ‘ जैसे गानों में अपनी अदाओं से नई पीढ़ी का भी दिल जीत चुकी हैं।
क्या था वहीदा की आँखों का सपना :-
यहाँ आपको बता दें कि 1938 में तमिलनाडु की चेंगलपट्टु में पैदा हुईं. वहीदा रहमान की मातृभाषा तमिल है और मुस्लिम होने के नाते उर्दू में भी अच्छी पकड़ है , वो पढाई में बहोत तेज़ थीं और बचपन से एक्ट्रेस नहीं डॉक्टर बनने का सपना देखती थीं हाँ ,डांस में दिलचस्पी ज़रूर थी इसलिए भरतनाट्यम सीखा था और स्कूल में डांस भी करती थीं , पर कुछ तो बात थी उनके डांस में कि उन्हें परफॉर्म करते देख लोग उनके डांस के कायल हो जाते और धीरे-धीरे उन्हें डांस के लिए कई बड़े ऑफर मिलने लगे, पहले तो उनके पेरेंट्स को भी कोई ऐतराज़ नहीं था लेकिन फिर उनकी उम्र और पढाई में हो रहे डिस्टर्बेंस को देखते हुए उन्होंने वहीदा के लिए आने वाले डांस के ऑफर एक्सेप्ट करने बंद कर दिए।
पदार्पण ने ही किया कमाल :-
लेकिन क़िस्मत को तो कुछ और ही मंज़ूर था ,वहीदा को डांस का हुनर यूँ ही नहीं मिला था ,कुछ सालों बाद उनके वालिद का इंतकाल हो गया और वहीदा ने इसी डांस का सहारा लेके घर को संभाला ,स्टेज पर डांस परफॉर्म करते हुए ही उन्हें फिल्म निर्माताओं ने देखा और उनके रक़्स और ख़ूबसूरती में अदाकारी को जोड़ने के बारे में सोचा और निर्देशक तपी चाणक्य ने पहल करते हुए अपनी 1955 की तेलुगु फिल्म ‘ रोजुलु मरयी ‘में उन्हें पहला मौका दिया वहीदा के चुनाव को लेकर वो तब पारखी साबित हुए जब फिल्म में वहीदा रहमान के डांस को देखने के लिए गीत ‘एरुवाका सागरो रानो चिन्नन्ना’ को दर्शक फिल्म के बाद भी बार बार प्ले करवाने की मांग करने लगे और ये डांस -सांग देखते ही देखते सुपरहिट हो गया इसी की लोकप्रियता से प्रभावित होकर गुरु दत्त ने वहीदा के साथ तीन साल का कॉन्ट्रेक्ट किया था।
कुछ दायरे बनाए और हमेशा निभाए :-
हालाँकि वहीदा ने अपने करियर की शुरुआत में ही कुछ दायरे अपने लिए बना लिए थे और उन्हें हमेशा निभाया भी सिर्फ अपनी कला को प्रदर्शित किया और उसके लिए जो ज़रूरी था सिर्फ वही किया इसलिए गुरुदत्त के साथ काम करने के लिए भी वहीदा ने शर्त रखी थी कि वो सिर्फ अपनी मर्ज़ी के ही कपड़े पहनेंगी ख़ैर गुरुदत्त भी पारखी थे तो उन्होंनें भी उनकी ये शर्त स्वीकार कर ली और वहीदा पहली हिंदी फिल्म बनी ‘सीआईडी’ जिसमें वहीदा ने वैम्प की भूमिका निभाई है, जो उस वक़्त की अभिनेत्रियों की सादगी से भरी भूमिकाओं से अलग थी या कहें लीग से हटके थी ,इस फिल्म में उन पर फिल्माया शमशाद बेगम का दिलकश गीत ‘ कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना’ तो आपको याद ही होगा जिसकी लोकप्रियता आज भी बरक़रार है। गुरुदत्त के साथ उनका नाम जोड़ा गया लेकिन वहीदा रहमान इस बारे में कहती हैं कि वो उन्हें अपना गुरु मानती हैं।
सिनेमा में योगदान और सम्मान :-
वहीदा रहमान ने कई बेमिसाल फिल्मों में काम किया और सिनेमा में दिए अपने अमूल्य योगदान की वजह से नेशनल अवॉर्ड ,पद्मश्री और पद्मभूषण भी हासिल कर चुकी हैं सबसे बड़ी बात की दादासाहेब फाल्के पुरस्कार पाने वाली पहली मुस्लिम महिला और ये पुरस्कार पाने वाली आठवीं महिला भी हैं। ‘रेशमा और शेरा’ में उनकी शानदार एक्टिंग के लिए नेशनल फिल्म अवॉर्ड से सम्मानित किया गया ,साल 1972 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया। ‘नीलकमल’ और ‘गाइड’ फिल्म में उन्होंनें बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर पुरस्कार जीता तो वहीं फिल्म में अपने नागिन नृत्य और शास्त्रीय नृत्य से अपने डांस का लोहा भी मनवाया इसी फिल्म के लिए शिकागो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड दिया गया यही नहीं 1994 में फिल्मफेयर ने इन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया और 2006 में इन्हें एनटीआर नेशनल अवॉर्ड भी दिया गया। फिल्म ‘तीसरी कसम’ के लिए वहीदा रहमान को बंगाली फिल्म जर्नलिस्ट असोसिएशन यानि बीएफजीए बेस्ट एक्ट्रेस अवॉर्ड दिया गया।
टीन एज गर्ल से दादी तक हर किरदार में लगीं परफेक्ट :–
टीन एज गर्ल के किरदार से शुरू हुआ वहीदा रहमान का फिल्मीं सफर नायिका ,भाभी और माँ की भूमिका से दादी तक पहुँचा और उन्होंनें हर रूप में दर्शकों का दिल जीता उनके कुछ ऐसे ही रोल हम आपको याद दिलाए देते हैं जिसमें एक तरफ वो ‘अदालत’ और ‘कभी-कभी’ जैसी फिल्मों में अमिताभ बच्चन के साथ उनकी नायिका के रूप में दिखाई दीं तो फिल्म ‘रेशमा और शेरा’ में वो अमिताभ बच्चन की भाभी बनीं हैं फिर फिल्म’ त्रिशूल’ में और ‘रंग दे बसंती’ में में माँ का किरदार निभाया है वहीं फिल्म ‘दिल्ली 6’ में दादी के किरदार में नज़र आईं हैं। बच्चन परिवार से उनका उनका फिल्मीं नाता कुछ ख़ास है वो ऐसे कि उन्होंनें अमिताभ बच्चन, जया बच्चन और अभिषेक बच्चन की भी माँ का रोल फिल्मों में निभाया है ,वहीं ‘फागुन’ में इन्होंने जया बच्चन की माँ का रोल भी निभाया और इसके बाद साल 2002 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘ओम जय जगदीश’ में ये अभिषेक बच्चन की माँ बनी।
वहीदा रहमान की हिट जोड़ी :-
फिल्म में वहीदा रहमान की हिट जोड़ी की बात करें तो उनकी और देव आनंद की जोड़ी दर्शकों ने खूब पसंद की और दोनों ने -सीआईडी, सोलवां साल, काला बाज़ार, बात एक रात की, गाइड, रूप की रानी चोरों का राजा और प्रेम पुजारी को मिलाकर क़रीब सात फिल्मों में काम किया था।

शादी के बाद भी नहीं तोड़ा फिल्मों से नाता :-
यूँ तो वहीदा रहमान के पास बहोत से शादी के प्रस्ताव आए पर उन्होंनें तवज्जो दी अभिनेता कंवलजीत के प्रस्ताव को और उन्हीं से शादी की। पर फिल्मों से जुड़ी रहीं और हमें अपने अभिनय से सजी शानदार फिल्में देती रहीं ,इस दौरान वो बेहद खुशहाल ज़िंदगी जी रहीं थीं कि साल 2002 में अचानक उनके शौहर का इंतकाल हो गया और वो अकेली रह गईं लेकिन एक्टिंग नहीं छोड़ी।
वहीदा रहमान आज भी हैं सक्रिय :-
वहीदा रहमान के करियर की सबसे बड़ी हिट फिल्म मानी जाती है ‘खामोशी ‘ जो एक बंगाली फिल्म की रीमेक थी और जिसे हिंदी में बनाने के लिए वहीदा रहमान ने ही हेमंत कुमार को कहा था लेकिन हेमंत दा बड़ी मुश्किल से माने थे क्योंकि उन्हें लगा कि फिल्म नहीं चलेगी ,पर जब फिल्म बनी तो सुपर हिट साबित हुई ,इसमें वहीदा के साथ हीरो थे राजेश खन्ना। बतौर लीड रोल वहीदा रहमान की आखिरी फिल्म थी साल 1971 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘मन मंदिर’ जिसमें उनके हीरो थे अभिनेता संजीव कुमार और ये फिल्म भी हिट साबित हुई। वहीदा रहमान की हालिया फिल्मों की बात करें तो उन्होंने 2018 की एक्शन थ्रिलर फिल्म ‘विश्ववरूपम 2 ‘, 2021 की स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म ‘ स्केटर गर्ल ‘और 2023 की ड्रामा फिल्म ‘द सॉन्ग ऑफ स्कॉर्पियंस’ में दमदार और यादगार किरदार निभाए हैं।
कुछ ख़ास बातें :-
उनकी कुछ ख़ास बातें बताएँ तो वहीदा खाना बनाने की बहोत शौकीन हैं और उनके हाँथ की बनी सेवइयाँ खाने को हर कोई बेक़रार रहता है यही नहीं उनके फार्म हाउस में तैयार सीरियल केलोग्स का नाश्ता पूरा भारत में बहोत पसंद किया जाता है। वाइल्ड लाइफ लवर भी हैं इसलिए इससे जुड़ी फोटोग्राफी भी करती हैं और एग्ज़िबिशन (Exhibition) भी लगाती हैं। सोशल वर्कर भी हैं और संस्था’ रंग दे ‘की ब्रांड अंबेसडर भी रह चुकी हैं।
नाम क्यों नहीं बदला :-
अपने दौर की अभिनेत्रियों की तरह उन्होंनें अपना कोई शॉर्ट नाम नहीं रखा जबकि इंडस्ट्री में सबको लगता कि उनके नाम में एक अभिनेत्री के हिसाब से कुछ बहोत ज़्यादा रौब झलकता है इसलिए उनसे सवाल भी किया गया कि आखिर उन्होंनें निर्माताओं के कहने पर भी छोटा सा नाम क्यों नहीं रखा तो इस पर भी वहीदा रहमान ने अपने बिंदास अंदाज़ में जवाब दिया और कहा कि ये मेरी पहचान है और मुझे मेरा नाम बहोत पसंद है।
जयलक्ष्मी क्यों वहीदा को डांस नहीं सीखना चाहती थीं :-
वहीदा रहमान ने भरतनाट्यम में महारत हासिल की लेकिन आपको पता है कि ये हुनर भी उन्हें आसानी से नहीं मिला क्योंकि जब वहीदा डांस टीचर जयलक्ष्मी अल्वा के पास भरतनाट्यम सीखने पहुँचीं तो उन्होंनें ये कहकर डांस सिखाने से मना कर दिया था कि वो मुसलमानों को डांस नहीं सिखाती क्योंकि वो परिवार के खिलाफ जाकर कुछ वक़्त के लिए डांस सीखने आ तो जाती हैं लेकिन फिर ट्रेनिंग पूरी किए बिना ही डांस छोड़ देती हैं लेकिन जब वहीदा ने उनसे वादा किया कि वो ऐसा नहीं करेंगीं तब जाके वो राज़ी हुईं और वहीदा रहमान ने अपना वादा मिभाया भी ,वहीदा भरतनाट्यम में पारंगत भी हुईं और जयलक्ष्मी अल्वा के सभी स्टूडेंट्स में सबसे ज़्यादा नाम भी कमाया।
अपने फ़िल्मी करियर ने वहीदा रहमान ने ऐसे किरदार भी निभाए जिन्होंनें उनकी नृत्य कला को बखूबी रुपहले परदे पर उकेरा जैसे – प्यासा में वेश्या गुलाबो का किरदार और गाइड में नर्तकी रोज़ी की भूमिका जिसे देखकर यूँ लगता है कि ये रोल वहीदा के अलावा और कोई इतनी शिद्दत से नहीं निभा सकता था।
