Vishwakarma Puja 2025 : श्रम, कारीगरी और सफलता का उत्सव – भारतीय संस्कृति में हर पर्व का अपना गहरा महत्व है। कुछ त्योहार जहां परिवार और समाज को जोड़ते हैं, वहीं कुछ त्योहार हमें हमारे काम और कर्म के प्रति सम्मान का पाठ पढ़ाते हैं। इन्हीं में से एक है विश्वकर्मा जयंती, जो हर वर्ष भगवान विश्वकर्मा के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। भगवान विश्वकर्मा को देव शिल्पी, प्रथम वास्तुकार, इंजीनियर और कारीगरों के आराध्य देवता माना जाता है। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो निर्माण कार्य, मशीनरी, कारीगरी, डिजाइनिंग, इंजीनियरिंग और श्रम से जुड़े हैं। इस दिन फैक्ट्री, ऑफिस, वर्कशॉप, शोरूम और यहां तक कि वाहनों की भी पूजा की जाती है। विश्वकर्मा जयंती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह हमें याद दिलाती है कि हर काम का सम्मान है, हर श्रम महत्वपूर्ण है और सफलता का मूल मंत्र परिश्रम और दक्षता है।
भगवान विश्वकर्मा का परिचय – हिंदू धर्मग्रंथों में भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का प्रथम शिल्पकार कहा गया है।
उनका जन्म – ऋग्वेद में उनका उल्लेख दिव्य शिल्पी के रूप में मिलता है।
श्री विश्वकर्मा परिवार में – पुराणों के अनुसार उनकी पत्नी का नाम ऋद्धि था और उनके पांच पुत्र माने जाते हैं – मन्नु, माया, त्वष्टा, शुभ और विश्वजना।
विश्वकर्मा परिवार का प्रमुख कार्य – उन्होंने स्वर्गलोक, इन्द्रपुरी, द्वारका, लंका, हस्तिनापुर और अर्जुन का गाण्डीव धनुष निर्मित किया। पुष्पक विमान का निर्माण भी उन्हीं के द्वारा किया गया था। उन्हें वास्तुशास्त्र, शिल्पकला और मशीनरी का जनक माना जाता है।
विश्वकर्मा जयंती का इतिहास और महत्व – विश्वकर्मा जयंती का महत्व केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी है। यह पर्व हमें यह सिखाता है कि कोई भी काम छोटा-बड़ा नहीं होता और हर कारीगर, हर मजदूर समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह दिन श्रमिकों, इंजीनियरों, आर्किटेक्ट्स, मिस्त्रियों, बढ़इयों और औद्योगिक कामगारों को समर्पित है। यह श्रम और उत्पादन का उत्सव है।
विश्वकर्मा पूजा का महत्व
श्रम का सम्मान – यह दिन हमें सिखाता है कि श्रम ही सृष्टि की नींव है। चाहे मशीन चलाने वाला हो या डिजाइन बनाने वाला, सभी समाज के विकास में बराबर के भागीदार हैं।
कार्य और उद्योग की सफलता – भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से कार्यक्षेत्र में बाधाएँ दूर होती हैं, सफलता और उन्नति प्राप्त होती है।
दक्षता और ज्ञान – जिस प्रकार देवी सरस्वती ज्ञान प्रदान करती हैं, उसी प्रकार भगवान विश्वकर्मा कार्यक्षेत्र में दक्षता और सृजनशीलता प्रदान करते हैं।
वास्तु दोष निवारण – पूजा करने से घर, फैक्ट्री या ऑफिस के वास्तु दोष दूर होते हैं और वहां सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।
सृष्टि के प्रथम इंजीनियर – उनके द्वारा रचित दिव्य नगरों और वास्तुकला के उदाहरण आज भी प्रेरणा स्रोत हैं।
विश्वकर्मा पूजा के लाभ –
कार्य में सफलता और उन्नति – नौकरी करने वाले लोगों के लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है। पूजा करने से कार्यक्षेत्र में आने वाली रुकावटें दूर होती हैं और प्रमोशन या वेतन वृद्धि के अवसर बनते हैं।
व्यापार में वृद्धि – व्यवसायियों के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है। पूजा करने से व्यापार में वृद्धि, ग्राहकों का विश्वास और लाभ में बढ़ोतरी होती है।
मशीनरी की कुशलता – मशीन, औजार और वाहन की पूजा करने से उनमें खराबी कम आती है और वे लंबे समय तक सुचारू रूप से चलते हैं।
वास्तु दोष निवारण – घर और कार्यस्थल के दोष दूर होते हैं जिससे वहां का माहौल शांत और सकारात्मक बनता है।
समृद्धि और खुशहाली – यह पूजा घर-परिवार में सुख-शांति और जीवन में समृद्धि लाती है।

इस सबको अनिवार्य रूप से करनी चाहिए विश्वकर्मा पूजा – फैक्ट्री, वर्कशॉप और इंडस्ट्रियल एरिया के मालिक और कर्मचारी,आर्किटेक्ट्स, इंजीनियर और डिजाइनर,लोहार, सुनार, कारीगर, बढ़ई,वाहन चालक, मैकेनिक,ऑफिस और शोरूम संचालक आदि सभी को विश्वकर्मा पूजा करना चाहिए।
विश्वकर्मा पूजा की विधि
तैयारी – सुबह स्नान करके पवित्र मन से पूजा स्थल को साफ करें। भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
मशीनरी की सफाई – मशीन, औजार, वाहन आदि को अच्छे से साफ करें और उन्हें पूजा स्थल पर सजाएं।
पूजन सामग्री – फूल, अक्षत (चावल), हल्दी, कुमकुम, धूप, दीपक, नैवेद्य, नारियल और मिठाई।
पूजन विधि – पहले गणेश जी की पूजा करें, फिर भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करें। मंत्रोच्चार, आरती और प्रसाद वितरण करें। कर्मचारियों को मिठाई और उपहार देकर सम्मानित करें।
भारत के विभिन्न हिस्सों में विश्वकर्मा जयंती
पूर्वोत्तर और बंगाल – यहां इसे बड़े धूमधाम से मनाया जाता है, पतंगबाजी का विशेष आयोजन होता है।
बिहार और झारखंड – कारखानों में विशेष छुट्टी दी जाती है। पूजा के बाद सामूहिक भोज होता है।
उत्तर भारत – ऑफिस, दुकानों और घरों में साधारण तरीके से पूजा की जाती है।
दक्षिण भारत – इसे विश्वकर्मा पूजा या “आयुध पूजा” के रूप में नवरात्रि के दौरान भी मनाया जाता है।
आधुनिक समय में विश्वकर्मा जयंती – आज के समय में यह पर्व सिर्फ पारंपरिक पूजा तक सीमित नहीं है। कॉर्पोरेट ऑफिस और आईटी कंपनियां भी इस दिन कर्मचारियों के योगदान को सराहने के लिए सेमिनार, मोटिवेशनल टॉक्स और अवॉर्ड सेरेमनी आयोजित करती हैं। यह दिन वर्कप्लेस पॉजिटिविटी, टीम बिल्डिंग और इनोवेशन को बढ़ावा देने का भी अवसर बन गया है।
विशेष – विश्वकर्मा जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि कर्म, परिश्रम और सृजनशीलता का उत्सव है। इस दिन की गई पूजा से व्यक्ति को कार्यक्षेत्र में सफलता, व्यापार में तरक्की, मशीनरी में कुशलता और घर-परिवार में खुशहाली प्राप्त होती है। यह दिन हमें सिखाता है कि मेहनत, ज्ञान और कारीगरी का संगम ही जीवन को सफल और संतुलित बनाता है। यदि आप अपने जीवन में निरंतर प्रगति चाहते हैं तो इस दिन भगवान विश्वकर्मा की आराधना जरूर करें।
