VIP in Ankita Bhandari case : उत्तराखंड के सबसे चर्चित और दिल दहला देने वाले अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर बड़ी खबर सामने आई है। उस ‘VIP’ के नाम पर जो सालों से रहस्य बना हुआ था और जिसे लेकर पूरे प्रदेश में गहरा आक्रोश था, पुलिस ने अब तक का सबसे बड़ा खुलासा कर दिया है।
पुलिस अधिकारी ने कहा- कोई VIP शामिल नहीं था
शनिवार को को हरिद्वार में एक प्रेस वार्ता के दौरान पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने साफ कर दिया कि इस पूरे मामले में कोई रसूखदार ‘वीआईपी’ शामिल नहीं था। इस बयान के बाद जहां पुलिस अपनी जांच को सही और पुख्ता बता रही है, वहीं उत्तराखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अंकिता के न्याय की उम्मीद लगाए बैठे लोगों के लिए यह खबर किसी बड़े मोड़ से कम नहीं है।
कौन हैं अभिनेत्री उर्मिला सनावर?
बता दें कि सोशल मीडिया पर अभिनेत्री उर्मिला सनावर का एक वीडियो वायरल होने के बाद अंकिता भंडारी मर्डर का मामला फिर सुर्खियों में आ गया। पूर्व विधायक सुरेश राठौर की पत्नी होने का दावा करने वाली उर्मिला सनावर ने वीडियो जारी कर आरोप लगाया है कि अंकिता हत्याकांड में शामिल वीआईपी कोई और नहीं बल्कि भारतीय जनता पार्टी का एक प्रभावशाली नेता है, जिसका नाम ‘गट्टू’ है।
सनावर ने राठौर और अपने इंटरव्यू में कई ऑडियो और वीडियो भी वायरल किए हैं, जिनमें इस केस से जुड़े कई राज खुलने का दावा किया गया है। इन आरोपों ने उत्तराखंड पुलिस के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं और जनता के बीच संशय बढ़ा दिया है।
वो VIP नहीं नोएडा का एक सामान्य व्यक्ति है
हरिद्वार के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) शेखर सुयाल ने शनिवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि जांच के दौरान जिस ‘VIP’ का बार-बार जिक्र हो रहा था, वह कोई बड़े नेता या अधिकारी नहीं, बल्कि नोएडा का एक सामान्य व्यक्ति है। पुलिस के मुताबिक, उस व्यक्ति का नाम धर्मेंद्र कुमार उर्फ प्रधान है।
सुयाल ने स्पष्ट किया कि आरोपियों के मोबाइल चैट और अंकिता के मित्र से हुई पूछताछ के आधार पर पुलिस धर्मेंद्र तक पहुंची थी। जांच में पता चला कि अंकिता की हत्या से दो दिन पहले धर्मेंद्र उस इलाके में आया था और सिर्फ खाना खाने के लिए ‘वनंत्रा रिजॉर्ट’ में कुछ देर रूका था। रिजॉर्ट के रिकॉर्ड और कर्मचारियों ने भी इसकी पुष्टि की है।
कांग्रेस ने पुलिस पर लगाया नेताओं को बचाने का आरोप
पुलिस के हालिया खुलासे और उर्मिला सनावर के आरोपों के बीच विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का कहना है कि पुलिस बड़े नेताओं को बचाने के लिए छोटे-छोटे नाम लेकर पर्दा डाल रही है। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच अब उत्तराखंड पुलिस या एसआईटी के बजाय केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई को सौंप दी जाए। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि जब तक यह जांच निष्पक्ष एजेंसी से नहीं होगी, तब तक ‘गट्टू’ और ‘प्रधान’ जैसे नामों का रहस्य ही बना रहेगा।
2022 का है ये मामला
बता दें कि अंकिता भंडारी हत्याकांड साल 2022 में हुआ था, जब शेखर सुयाल पौड़ी जिले के अपर पुलिस अधीक्षक थे और बाद में वे एसआईटी के सदस्य भी रहे। पुलिस का कहना है कि उसने हर पहलू की जांच की है और सबूतों के आधार पर धर्मेंद्र कुमार का नाम सामने आया है। लेकिन अंकिता के माता-पिता और पूरे प्रदेश की जनता आज भी
इस ‘वीआईपी’ एंगल से संतुष्ट नहीं हैं। एक तरफ पुलिस इसे महज एक गलतफहमी या छोटा नाम बता रही है, तो दूसरी तरफ राजनीतिक स्तर पर आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। अब देखना यह है कि क्या सरकार इस बढ़ते दबाव के बीच सीबीआई जांच को मंजूरी देगी या यह मामला फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।
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