रीवा। विगत वर्षो की तरह इस वर्ष भी रीवा किला में रविवार को विंध्य फाग महोत्सव प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। जिसमें विंध्य क्षेत्र की लोक संस्कृति का रंग जमकर उभरा। इस प्रतियोगिता में रीवा, सतना सहित आसपास के क्षेत्रों से 30 से अधिक टीमें शामिल हुईं। टीमों ने एक से बढ़कर एक शानदार फाग गीतों की प्रस्तुतियां दीं। सुबह 10 बजे आयोजित फाग गीत देर शाम तक जारी रहा। तो वही किला परिसर गुलाल से सराबोर रहा।
विंध्य में रही है फाग की समृद्ध लोक परंपरा
फाग महोत्सव कार्यक्रम में विधायक दिव्यराज सिंह ने कहा कि विंध्य क्षेत्र में फाग की समृद्ध लोक परंपरा रही है। इसे जीवंत रखने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए ऐसे आयोजन आवश्यक हैं। इससे हमारी सांस्कृतिक धरोहर को मजबूती मिलती है और युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ती है।यह महोत्सव विंध्य की फाग परंपरा को संरक्षित करने और लोक संगीत-नृत्य को प्रोत्साहन देने का एक महत्वपूर्ण प्रयास साबित हुआ। दर्शकों की भारी भीड़ ने आयोजन की सफलता को और रेखांकित किया।
पुरस्कृत हुई टीमें
प्रतिभागियों ने पारंपरिक ढोल-नगाड़ों, फाग गीतों और उत्साहपूर्ण प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।प्रतियोगिता के समापन पर विजेता टीमों को महाराजा पुष्पराज सिंह और सिरमौर विधायक दिव्यराज सिंह ने पुरस्कार वितरित किए।
क्या है विंध्य का फाग
विंध्य क्षेत्र (मुख्यतः रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली) में होली के अवसर पर गाए जाने वाले पारंपरिक लोकगीत और संगीत को विंध्य फाग कहते हैं। यह बघेलखंड की संस्कृति का अहम हिस्सा है, जिसमें बघेलखंडी (बघेली) भाषा में राधा-कृष्ण के प्रेम, फागुन के उमंग और होली के रंगों का वर्णन होता है। यहाँ ढोलक, मजीरा और निशान के साथ ’फगुआ’ गाया जाता है।
विंध्य फाग की विशेषताएँ
शैली- यह पारंपरिक लोकगीत है, जो ढोलक और मजीरे की थाप पर सामूहिक रूप से गाया जाता है।
अवसर- बसंत पंचमी से लेकर होली तक विशेष रूप से गाँवों में फगुआ का आयोजन होता है।
विषय- फाग गीतों में रासलीला, राधा-कृष्ण के प्रेम, प्रकृति के सौंदर्य और ग्रामीण होली के उल्लास का चित्रण होता है।
कलाकार- इसमें स्थानीय कलाकार, जैसे नीरज निर्मोही और विभिन्न क कमेटी (जैसे गुढ़ कष्टहरनाथ फाग कमेटी) सक्रिय हैं।
आयोजन- विंध्य के रीवा (किला प्रांगण) जैसे स्थानों पर भव्य फाग महोत्सव का आयोजन होता है, जिसमें बघेलखंडी लोक नृत्य और गायन प्रस्तुत किए जाते हैं।
