रीवा जिले के जवा जनपद अंतर्गत रौली गांव से एक झकझोर देने वाली और व्यवस्था की पोल खोलने वाली घटना सामने आई है, जहाँ टमस, बेलन और महाना नदियों में आई भारी बाढ़ के कारण रास्ते पूरी तरह बंद हो गए थे। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब रविवार को संजय गांधी अस्पताल में इलाज या निधन के बाद ग्रामीण मोतीलाल तिवारी के शव को एम्बुलेंस से वापस गांव ले जा रहे थे, लेकिन संपर्क मार्ग कटा होने के कारण वाहन आगे नहीं बढ़ सका।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि संकट के इस समय में पंचायत की सरपंच और रोजगार सहायक से मदद मांगने के बावजूद उन्हें कोई सहायता या वैकल्पिक साधन नहीं मिला। प्रशासन की ओर से मदद न मिलने पर परिजनों और ग्रामीणों ने अपनी जान जोखिम में डालकर दो प्लास्टिक के ड्रमों को आपस में बांधकर एक अस्थायी जुगाड़ की नाव बनाई और तेज बहाव के बीच से शव को जैसे-तैसे पार कर घर तक पहुँचाया।
इस अमानवीय घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिला प्रशासन तुरंत हरकत में आया। रीवा कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए कहा कि पंचायत सचिव द्वारा उपलब्ध कराए गए वीडियो के अनुसार, प्रशासन की तरफ से शव को ले जाने के लिए पहले से ही नाव की सुविधा उपलब्ध कराई गई थी। कलेक्टर ने इस बात पर कड़ी हैरानी जताई कि जब सुविधा मौजूद थी, तब कुछ लोगों द्वारा ड्रमों के जरिए शव को क्यों ले जाया गया। प्रशासन ने इसे एक गंभीर जांच का विषय बताते हुए कहा है कि मामले की पूरी सत्यता की जांच की जाएगी और इसमें जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

