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रीवा कलेक्ट्रेट में गूंजी ग्रामीणों की समस्याएं: कहीं राशन न मिलने पर हंगामा, तो कहीं आवास और सड़क की मांग

Villagers' grievances echoed in the Rewa Collectorate.Villagers' grievances echoed in the Rewa Collectorate.

Villagers' grievances echoed in the Rewa Collectorate.

रीवा: जिले के ग्रामीण इलाकों से परेशान ग्रामीणों का गुस्सा मंगलवार को कलेक्ट्रेट में फूट पड़ा। अलग-अलग समस्याओं को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीणों ने जिला प्रशासन के सामने अपनी मुश्किलें रखीं और त्वरित न्याय की गुहार लगाई। सेमरिया और सिरमौर तहसील से आए ग्रामीणों की शिकायतों पर प्रशासन अब जांच और कार्रवाई की बात कह रहा है।

सेमरिया में पांच महीने से राशन बंद, ग्रामीणों ने किया हंगामा
रीवा जिले की सेमरिया तहसील के लैनबधरी गांव से दर्जनों ग्रामीण अपनी खाद्यान्न पर्ची लेकर मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे और कोटेदार पर गंभीर आरोप लगाते हुए हंगामा किया। ग्रामीणों का कहना है कि कोटेदार मशीन पर अंगूठा तो लगवा लेता है और पर्ची भी दे देता है, लेकिन यह कहकर गल्ला देने से मना कर देता है कि राशन नहीं आया है। पिछले पांच महीने से राशन न मिलने के कारण गांव के करीब साढ़े चार सौ परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। परेशान ग्रामीणों ने कलेक्टर से तत्काल गल्ला दिलवाने और दोषी कोटेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

सिरमौर के बड़ागांव में हर साल बारिश में ढह जाते हैं घर
वहीं, सिरमौर तहसील के बड़ागांव के ग्रामीण मंगलवार को कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी से मिलकर अपने घरों और स्थायी बसाहट की गुहार लगाने पहुंचे। पीड़ित ग्रामीण केदार आदिवासी ने बताया कि गांव के करीब सौ परिवार पिछले 50 वर्षों से जिस जमीन पर निवास कर रहे हैं, उसके एक तरफ तालाब और दूसरी तरफ बांध है। इसके कारण हर साल बारिश में उनके घर गिर जाते हैं। पानी घरों को तबाह कर देता है, जिससे न सिर्फ मकान ढह जाते हैं बल्कि अनाज और गृहस्थी का सामान भी पूरी तरह बर्बाद हो जाता है। बेघर होने की इस गंभीर समस्या से जूझ रहे आदिवासी परिवारों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि उन्हें किसी सुरक्षित स्थान पर स्थायी मकान मुहैया कराए जाएं।

चंद्रपुर गांव में सड़क मार्ग न होने से बढ़ी मुश्किलें
इसी तरह, सिरमौर तहसील के ही चंद्रपुर गांव के ग्रामीणों ने मंगलवार को कलेक्टर से मिलकर अपने गांव के लिए सड़क मार्ग बनवाने की गुहार लगाई। ग्रामीणों ने बताया कि उनकी बस्ती तक पहुंचने के लिए एक किलोमीटर तक कोई भी कच्चा-पक्का रास्ता नहीं है, जिसके कारण गंभीर रूप से बीमार और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है और बच्चे भी स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि रास्ते के अभाव में लोग इस गांव में रिश्ते लेकर आना बंद कर चुके हैं, जिससे युवाओं की शादियां होना भी मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुराने रास्तों को भू-स्वामियों द्वारा खेत बना लिए जाने के कारण मार्ग बेहद संकरा हो गया है, जिससे कई बार लोग हादसों का शिकार हो चुके हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से बस्ती के लिए जल्द से जल्द पक्की सड़क की व्यवस्था करने की मांग की है।

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