तमिलनाडु की राजनीति में थलपति विजय की एंट्री ने मुकाबला दिलचस्प बना दिया है। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि उनकी पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) विधानसभा की 234 सीटों में से बहुमत के लिए जरूरी 118 सीटों का आंकड़ा नहीं छू पाती, तो विजय के पास क्या विकल्प बचेंगे? मौजूदा सियासी हालात संकेत देते हैं कि ऐसी स्थिति में PMK और कांग्रेस जैसे दल निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजे अगर त्रिशंकु विधानसभा की ओर इशारा करते हैं, तो राज्य में दशकों से चले आ रहे डीएमके और एआईएडीएमके के वर्चस्व के बीच विजय के लिए राह आसान नहीं होगी। विजय ने अपनी रैलियों में भ्रष्टाचार और परिवारवाद के खिलाफ मोर्चा खोलकर युवाओं को आकर्षित किया है, लेकिन सत्ता की सीढ़ी चढ़ने के लिए उन्हें अनुभवी सहयोगियों की आवश्यकता पड़ सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय की विचारधारा ‘धर्मनिरपेक्ष सामाजिक न्याय’ पर आधारित है। यह रुख उन्हें कुछ क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दलों के करीब लाता है। यदि TVK 80 से 100 सीटों के बीच सिमट जाती है, तो उसे सरकार बनाने के लिए कम से कम 20 से 30 अतिरिक्त सदस्यों के समर्थन की दरकार होगी।
PMK की भूमिका और क्षेत्रीय समीकरण
पट्टाली मक्कल काची (PMK) का उत्तरी तमिलनाडु के वन्नियार समुदाय में मजबूत आधार है। PMK अक्सर चुनाव के बाद गठबंधन के विकल्पों को खुला रखती है। यदि विजय को बहुमत के लिए कुछ सीटों की कमी खलती है, तो PMK एक स्वाभाविक सहयोगी के रूप में उभर सकती है। हालांकि, PMK की अपनी शर्तें और उपमुख्यमंत्री पद जैसी मांगें समझौते की राह में बाधा भी बन सकती हैं।
कांग्रेस का रुख और वैचारिक मेल
विजय ने स्पष्ट किया है कि उनकी राजनीति विभाजनकारी ताकतों के खिलाफ है। यह स्टैंड कांग्रेस की राष्ट्रीय विचारधारा से मेल खाता है। फिलहाल कांग्रेस डीएमके (DMK) गठबंधन का हिस्सा है, लेकिन राजनीति में समीकरण बदलते देर नहीं लगती। यदि डीएमके गठबंधन बहुमत से दूर रहता है और विजय एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरते हैं, तो कांग्रेस राज्य में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए विजय का हाथ थाम सकती है।
गठबंधन की चुनौतियां और अवसर
किसी भी नए गठबंधन के लिए सबसे बड़ी चुनौती विभागों का बंटवारा और साझा न्यूनतम कार्यक्रम (CMP) तैयार करना होगा। विजय के लिए अपने समर्थकों को यह समझाना मुश्किल हो सकता है कि उन्होंने उन्हीं पुरानी पार्टियों से हाथ क्यों मिलाया जिनके खिलाफ उन्होंने चुनाव लड़ा था। दूसरी ओर, सत्ता में हिस्सेदारी न मिलने की स्थिति में सरकार के अस्थिर होने का खतरा भी बना रहेगा।
क्या विजय को मिलेगा निर्दलीयों का साथ?
बहुमत के करीब पहुंचने की स्थिति में छोटे दल और निर्दलीय उम्मीदवार भी अहम हो जाते हैं। तमिलनाडु में अक्सर छोटी पार्टियां सत्ताधारी दल के साथ जाना पसंद करती हैं ताकि उनके क्षेत्रों में विकास कार्य सुचारू रूप से चल सकें।
विजय की TVK बहुमत से चूकी तो क्या होगा?
यदि विजय 118 का जादुई आंकड़ा नहीं छू पाते, तो राज्य में राष्ट्रपति शासन की नौबत भी आ सकती है या फिर एक कमजोर गठबंधन सरकार का जन्म हो सकता है। विजय को अपनी रणनीति में लचीलापन दिखाना होगा ताकि वह सरकार का नेतृत्व कर सकें।
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डीएमके और एआईएडीएमके की रणनीति
दोनों स्थापित दल कभी नहीं चाहेंगे कि कोई तीसरा खिलाड़ी सत्ता के केंद्र में आए। ऐसे में वे छोटे दलों को विजय के पाले में जाने से रोकने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। जोड़-तोड़ की राजनीति में इन दलों का अनुभव विजय की तुलना में कहीं अधिक है।
FAQs
1. तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत के लिए कितनी सीटों की आवश्यकता है?
तमिलनाडु विधानसभा में कुल 234 सीटें हैं। किसी भी दल या गठबंधन को पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के लिए कम से कम 118 सीटों के जादुई आंकड़े को पार करना होता है।
2. क्या विजय की पार्टी TVK अकेले चुनाव लड़ रही है?
फिलहाल के राजनीतिक घटनाक्रमों के अनुसार, विजय ने ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) को एक स्वतंत्र और मजबूत विकल्प के रूप में पेश किया है। हालांकि, चुनाव के समय गठबंधन की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता।
3. यदि किसी भी दल को बहुमत न मिले (Hung Assembly) तो क्या होगा?
ऐसी स्थिति में राज्यपाल सबसे बड़े दल या गठबंधन को सरकार बनाने का न्यौता देते हैं। यदि विजय की TVK बहुमत से चूकती है, तो उन्हें सरकार बनाने के लिए PMK, कांग्रेस या अन्य निर्दलीय विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी।
4. PMK और कांग्रेस ही विजय के लिए संभावित विकल्प क्यों माने जा रहे हैं?
इसका मुख्य कारण वैचारिक समानता और क्षेत्रीय समीकरण हैं। विजय की ‘धर्मनिरपेक्ष सामाजिक न्याय’ की राजनीति कांग्रेस के करीब है, वहीं PMK का क्षेत्रीय आधार उन्हें सत्ता के करीब पहुँचाने में मदद कर सकता है।
5. क्या विजय चुनाव के बाद डीएमके (DMK) या एआईएडीएमके (AIADMK) से हाथ मिला सकते हैं?
विजय ने अपनी शुरुआती रैलियों में दोनों प्रमुख द्रविड़ दलों की नीतियों की आलोचना की है। राजनीतिक रूप से उनके साथ जाना विजय के ‘बदलाव’ के वादे को कमजोर कर सकता है, इसलिए वह छोटे क्षेत्रीय दलों को प्राथमिकता दे सकते हैं।
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