उत्तर भारत के कई राज्यों में भीषण गर्मी के बीच अचानक उत्तर भारत में मौसम का मिजाज बदला है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, अगले कुछ घंटों में दिल्ली-एनसीआर समेत हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में तेज धूल भरी आंधी और बारिश की संभावना है। पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बने दबाव के कारण मौसम में यह बदलाव देखा जा रहा है।
दिल्ली-एनसीआर में धूल भरी आंधी का अलर्ट
राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों जैसे नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम में आसमान में काले बादल छाने लगे हैं। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूल भरी आंधी चल सकती है। इसके साथ ही गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं। यह बदलाव पिछले कुछ दिनों से जारी तपिश से राहत दिलाएगा, लेकिन वाहन चालकों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
उत्तर प्रदेश और राजस्थान में दिखेगा असर
उत्तर भारत में मौसम का मिजाज बदला है और इसका सबसे ज्यादा असर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वी राजस्थान में देखने को मिल सकता है। राजस्थान के कई जिलों में ‘येलो अलर्ट’ जारी किया गया है, जहाँ तेज हवाओं के साथ ओलावृष्टि की भी आशंका जताई गई है। यूपी के लखनऊ, आगरा और मेरठ जैसे शहरों में भी शाम तक मौसम में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।
पहाड़ों पर बर्फबारी और उत्तराखंड में चेतावनी
मैदानी इलाकों में जहां बारिश और आंधी का दौर है, वहीं उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के ऊपरी इलाकों में बर्फबारी की खबरें आ रही हैं। उत्तराखंड के चमोली और रुद्रप्रयाग जैसे जिलों में बिजली गिरने और तेज बौछारें पड़ने की चेतावनी जारी की गई है। पर्यटकों को ऊंचाई वाले क्षेत्रों में न जाने की सलाह दी गई है, क्योंकि अचानक होने वाली बारिश से भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है।
खेती पर पड़ सकता है प्रभाव
मौसम में आया यह अचानक बदलाव किसानों के लिए चिंता का विषय बन सकता है। विशेष रूप से उन इलाकों में जहां फसलें कटने के बाद खेतों में रखी हैं या पकने की कगार पर हैं। ओलावृष्टि और तेज आंधी के कारण फसलों को नुकसान होने की संभावना है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थानों पर रखें और मौसम साफ होने तक सिंचाई रोक दें।
तापमान में आएगी गिरावट
पिछले एक हफ्ते से उत्तर भारत के कई हिस्सों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया था। हालांकि, इस आंधी और बारिश के बाद अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। इससे लोगों को चिलचिलाती धूप से तो राहत मिलेगी, लेकिन उमस (Humidity) बढ़ने की भी संभावना है।
आगामी 48 घंटों के लिए मौसम का पूर्वानुमान
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, एक सक्रिय वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (Western Disturbance) के कारण उत्तर भारत में मौसम का मिजाज बदला है। यह सिस्टम अगले 48 घंटों तक सक्रिय रह सकता है। पंजाब और हरियाणा के कुछ हिस्सों में भी छिटपुट बारिश की गतिविधियां जारी रहेंगी।
विभाग द्वारा सुरक्षा दिशा-निर्देश
आंधी के दौरान कच्चे मकानों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी गई है। बिजली कड़कने के समय इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग कम करें और घर के अंदर रहें।
FAQs)
1. उत्तर भारत में अचानक मौसम बदलने का मुख्य कारण क्या है?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, एक सक्रिय वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (Western Disturbance) यानी पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्तर भारत के वायुमंडल में दबाव कम हुआ है। इसके परिणामस्वरूप पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानी इलाकों में धूल भरी आंधी व बारिश की स्थिति बनी है।
2. दिल्ली-एनसीआर में आंधी और बारिश कब तक जारी रहेगी?
मौसम विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के मुताबिक, मौसम का यह मिजाज अगले 24 से 48 घंटों तक बना रह सकता है। बीच-बीच में तेज हवाएं चलने और हल्की बूंदाबांदी होने की संभावना है, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी।
3. क्या इस बारिश से गर्मी से स्थाई राहत मिलेगी?
वर्तमान बारिश और आंधी से अधिकतम तापमान में 3-5 डिग्री सेल्सियस की कमी आएगी, जिससे कुछ दिनों तक गर्मी से राहत मिलेगी। हालांकि, यह प्री-मानसून गतिविधि है, इसलिए मौसम साफ होते ही कुछ दिनों बाद तापमान में दोबारा बढ़ोत्तरी देखी जा सकती है।
4. किन राज्यों में ओलावृष्टि (Hailstorm) की चेतावनी दी गई है?
मुख्य रूप से राजस्थान के उत्तरी हिस्सों, हरियाणा के कुछ जिलों और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। उत्तराखंड के कुछ इलाकों में भी गरज-चमक के साथ ओले गिर सकते हैं।
5. खराब मौसम के दौरान सुरक्षा के लिए क्या करें?
तेज आंधी के दौरान पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें। बिजली कड़कने की स्थिति में ऊंचे खंभों या धातु की वस्तुओं से दूर रहें। यदि आप वाहन चला रहे हैं, तो धूल भरी आंधी के दौरान विजिबिलिटी कम होने पर गाड़ी को सुरक्षित किनारे खड़ा कर देना ही बेहतर है।
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