US Venezuela Tension : मध्य-पूर्व के तनाव पर टिकी थीं, लेकिन अचानक से लातिन अमेरिका ही भू-राजनीति का केंद्र बन गया है। वजह है अमेरिका का वेनेजुएला की राजधानी काराकास और आसपास के इलाकों पर किया गया बड़ा सैन्य हमला। शनिवार सुबह अमेरिकी विमानों ने कम ऊंचाई पर उड़ान भरकर कई हमले किए। सात से अधिक धमाकों की आवाज़ से काराकास और आसपास के इलाक़े दहल गए। सिर्फ राजधानी ही नहीं, बल्कि मिरांडा, अरागुआ और ला गुएरा जैसे राज्यों में भी नागरिक और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसके बाद अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में ले लिया। सवाल ये है कि अचानक अमेरिका ने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया?
अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला करने से पहले दिया था हिंट
आमेरकी हमले से पहले पिछले 24 घंटों में वेनेजुएला के तटों के पास अमेरिकी सैन्य गतिविधियों में तेजी देखी गई। अमेरिकी संघीय उड्डयन प्रशासन (FAA) ने धमाकों से कुछ घंटे पहले ही वेनेजुएला के पूरे हवाई क्षेत्र में वाणिज्यिक और निजी विमानों पर प्रतिबंध लगा दिया था। यह साफ संकेत था कि कुछ बड़ा होने वाला है। हालांकि, व्हाइट हाउस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन अमेरिकी मीडिया का दावा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई दिन पहले ही इस सैन्य कार्रवाई की अनुमति दे दी थी।खराब मौसम और अन्य सैन्य अभियानों के कारण इस ऑपरेशन को टाल दिया गया था। इसे ट्रंप प्रशासन का वेनेजुएला के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा और सबसे गंभीर सैन्य कदम माना जा रहा है।
वेनेजुएला ने कहा – तेल संसाधनों पर कब्जा चाहते हैं ट्रंप
वेनेजुएला के राष्ट्रपति मदुरो की गिरफ्तारी के बाद उपराष्ट्रपति ने सरकार संभाली है। इन हमलों को सीधे आक्रमण करार देते हुए कहा है कि अमेरिका का असली मकसद ड्रग्स नहीं, बल्कि देश के तेल और खनिज संसाधनों पर कब्जा करना है। राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने इसे अवैध युद्ध बताया और कहा कि अमेरिका वेनेजुएला की संप्रभुता को कुचलना चाहता है। लेकिन इस कार्रवाई पर अमेरिका के भीतर भी सवाल उठने लगे हैं। डेमोक्रेटिक सीनेटर ब्रायन शाट्ज़ ने कहा है कि वेनेजुएला में ऐसा कोई अमेरिकी राष्ट्रीय हित नहीं है जो युद्ध को जायज ठहरा सके। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से मांग की है कि अमेरिकी जनता को साफ-साफ बताया जाए कि आखिर हो क्या रहा है।
क्या मादुरो एक ‘नार्को-स्टेट’ बना रहा था?
दरअसल, अमेरिका का दावा है कि उसने वेनेजुएला के कुछ नार्को-टेररिस्ट ठिकानों और समुद्री जहाजों पर ड्रोन से हमला किया है। वाशिंगटन ने मादुरो सरकार पर देश को एक “नार्को-स्टेट” बनाने का आरोप लगाया है और उसके अधिकारी ड्रग कार्टेल्स के साथ मिलकर अमेरिका में कोकीन और अन्य नशीले पदार्थ भेज रहे हैं। इसी के तहत अमेरिका ने वेनेजुएला से जुड़े कई तेल टैंकर भी जब्त कर लिए हैं। लेकिन सवाल है कि अगर मकसद सिर्फ ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई है, तो फिर तेल टैंकरों को क्यों निशाना बनाया गया है?
वेनेजुएला के पास है तेल का भंडार
वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार है- करीब 303 अरब बैरल। यह सऊदी अरब से भी अधिक है। हाल के वर्षों में आर्थिक संकट और प्रतिबंधों के कारण वहां का उत्पादन घटकर करीब 9 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया है। लेकिन आज की ऊर्जा-आधारित दुनिया में यह तेल बहुत ही महत्वपूर्ण है।
अमेरिका के लिए वेनेजुएला का तेल जरूरी क्यों?
विशेषकर अमेरिका के लिए वेनेजुएला का तेल बहुत जरूरी है, क्योंकि यह गाढ़ा तेल अमेरिकी रिफाइनरियों के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। रूस और मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच, अमेरिका अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहता।
विश्लेषकों का मानना है कि तेल टैंकरों को रोकने का असली मकसद मादुरो सरकार की कमाई का अंतिम स्रोत बंद करना है, ताकि वेनेजुएला की आर्थिक स्थिति चरमरा जाए और वहां सत्ता परिवर्तन संभव हो। हाल ही में मादुरो ने अमेरिका को तेल सौदों का प्रस्ताव देकर तनाव को कम करने की कोशिश भी की थी, जिससे पता चलता है कि इस संघर्ष की जड़ में तेल ही है।
चीन और भारत पर भी पड़ेगा असर
बिल्कुल चाहे यह लड़ाई अमेरिका और वेनेजुएला के बीच हो, लेकिन इसकी आग पूरी दुनिया को झुलसा सकती है। अगर वेनेजुएला का तेल पूरी तरह से बाजार से गायब हो जाता है या वहां लंबे समय तक गृहयुद्ध चलता रहता है, तो कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। चीन और भारत जैसे देशों में, जो अपनी जरूरत का करीब 80% तेल आयात करते हैं, पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ना तय है।
